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Islam Me Auraton Ko Parde Ka Hukm. (Part 04)

Islam Me Auraton Le Liye Parda.
way of jannah institute (Part 04)
सवाल: इस्लाम औरतों को पर्दे में रख कर उनका अपमान क्यों करता है??
पर्दे के लिये ज़रूरी शर्ते
मकद्दस कु्रआन और हदीष (पैग़म्बर के कथन) के मुताबिक़ पर्दे के लिए निम्नलिखित छः बातों का ध्यान देना आवश्यक है।
(1) पहला शरीर का पर्दा है जिसे ढंका जाना चाहिये। यह मर्द और औरत के लिए अलग- अलग है। मर्द के लिए नाफ़ (नाभि) से लेकर घुटनों तक ढंकना ज़रूरी है और औरत के लिए चेहरे और हाथों की कलाई को छोड़कर पूरे शरीर को ढंकना ज़रूरी है। हालांकि वह चाहें तो खुले हिस्से को भी छुपा सकती हैं। इस्लाम के कुछ आलिम इस बात पर जोर देते हैं कि चेहरे और हाथ भी पर्दे का लाज़मी हिस्सा है।
दीगर बातें ऐसी हैं जो औरत व मर्द दोनों के लिए समान हैं:
(2). पहना गया लिबास ढीला-ढाला हो और वह शरीर के अंगों को ज़ाहिर न करे।
(3). पहना हुआ लिबास पारदर्शी न हो कि जिस्म के अन्दरूनी हिस्से नज़र आएं।
(4). पहना हुआ लिबास भड़कीला न हो कि विपरीत लिंग को आकर्षित करे।
(5). पहना हुआ लिबास विपरीत लिंग से न मिलता-जुलता न हो।
(6). पहना गया लिबास ऐसा नहीं होना चाहिये जो किसी ख़ास गैर-मुस्लिम धर्म की निशानदेही करता हो और उस धर्म का प्रतीक हो।
*पर्दा इन्सान के बर्ताव और व्यवहार की निशानदेही करता है पूर्ण पर्दा, वस्त्र (लिबास) की छः कसौटियों के अलावा नैतिक व्यवहार और आचरण को भी अपने अन्दर समाए हुए है। अगर कोई शख्स सिर्फ लिबास की कसौटियों को अपनाता है तो वह पर्दे के महदद माने (सीमित अर्थ) का पालन कर रहा है।
TO BE CONTINUE Insha
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