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Barailwi Dharm ka History, Barailwi aur Hindu dharm me Kitna Fark hai?

Hindu Dharm se Tarike lekar Barailwi  Dharm Izaad Hua.


हिंदू धर्म सबसे प्राचीन धर्म है, तकरीबन हजारो लाखो साल पुरानी, इस धर्म की प्रमुख चार किताबे है ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्वेद और सामवेद। इस धर्म मे बहुत से देवी देवता भी हुए जिनकी पूजा की जाती है, हिंदू धर्म मे कई अवतार भी हुए। खैर हर कोई इस धर्म के बारे मे जानता है मगर आज यहाँ आप को एक ऐसे धर्म के बारे मे बताऊंगा जिसके मानने वाले को देखे होंगे मगर उनके धर्म के बारे मे शायद आपको मालूम नही होगा।

वह धर्म है बरेलवी धर्म: 

इस धर्म के मानने वाले ज्यादातर हिंदुस्तान, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश मे है। बरेलवी धर्म के मानने वाले और हिंदू धर्म के मानने मे ज्यादा फर्क है। मगर हिंदू धर्म बहुत पुराना धर्म है, इस धर्म मे अवतार है, वेद की किताबे है, शास्त्र है, और इनका अपना तरीका है। मगर बरेलवी धर्म का न कोई अवतार है, न इतिहास मालूम है, बल्कि इन लोगो के पास कुछ नही था तो हिंदू धर्म के रीति रिवाजों को अपनाकर एक अलग धर्म बनाया। बरेलवी धर्म का कोई सर पैर मालूम ही नही, इसका डेट ऑफ बर्थ किसी को मालूम नही।

आइये जानते है इस बगैर सर पैर वाले धर्म के बारे मे, इसने कौन कौन से तरीके हिंदू धर्म से लिए है।

हिंदू अपने धार्मिक शास्त्रों को छोड़कर पंडित जी की कही हुई बात और किताबो पर चलते है।
वही बरेलवी कुरान व हदीस को छोड़ कर अपने मौलवियो, इमामो और बुजुर्गो की लिखी हुई किताब व उनके बातिल अकिदे पर चलते है।

(1) हिंदू को अगर कोई पंडित जी रात भर पानी मे रहने को कहे तो वह खडा रह जायेगा।

उसी तरह बरैलवी का मौलवी बरेलवी को पानी मे खड़ा रहने को बोले तो वह खड़ा रहेगा।

(2) हिंदुओ के चार वेद है। ऋग् वेद, अथर्वेद, सामवेद और यजुर्वेद। इन वेदो को छोड़कर वे अपने अपने पंडितो की किताबें पढ़ते है और मूर्ति पूजा करते है।

इसी तरह बरेलवी धर्म वाले भी कुरान व हदीस को छोड़कर अपने अपने बुजुर्गो, इमामो और खानकाहो को पुकारते है। यह बागी अपने चार इमामो की किताब को ही मानते है।

(3) हिंदू मूर्ति पूजा करेंगे और कहेंगे की हम इन्हें रूपक मानते है, इसके जरिये हम ईश्वर के करीब होते है।

इसी तरह बरेलवी भी मजारो पर जाकर बाबाओ, पिरो और सज्जादा नशीं से  मांगते है और कहते है के हम इनसे मांगते नही बल्कि इनसे वसीला लेते है, ये हमारी दुवाओ को अल्लाह तक पहुचाते है।

(4) ये खड़ी मूर्ति की पूजा करते है और वो (बरेलवी) पड़ी मूर्ति की।
ये देवी देवता के स्थान पर जाते है और वो क़ब्रिस्तान की जयारत् करने जाते है।

हिंदू मूर्ति को धोकर पीते है तो कहते है की ये गंगा जल से भी पवित्र है।
वही बरेलवी उर्स के मौके पर पक्की कब्र को धोकर पियेंगे तो कहेंगे के यह तो आब ए ज़मज़म से भी पाक है।

(5) ये अपने पूजा स्थलों पर भजन गाते है, वो अपने इबादतगाहो (मजार, दरगाह) पर कव्वालिया गाते है।

(6) ये मंदिरो का दर्शन करने के लिए धाम/ यात्रा करते है, जबकि बरेलवी मजार की जियारत के लिए सफर पर जाते है।

(7) ये मूर्ति, पेड़ों पर कपड़े और माला डालते है , इधर बरेलवी मजारो और दरगाहों पर फूल और चादर चढ़ाते है।

(8) हिंदू मंदिरो मे भजन कीर्तन पढ़ते है उसी तरह बरेलवी मजारो व दरगाहों पर कव्वालियान गाते है और ठुमके लगाते है।

इतना ही नही दोनो की शादियों मे भी बहुत सी समानताएं है।

(1) इनके यहाँ शादी से एक दिन पहले मटकोर पूजा होती है, उसी दिन भोज भी होता है। भोज होने से पहले पंडित जी पूजा कराकर प्रसाद बांट देते है।

बरेलवी धर्म मे भी शादी के एक दिन पहले मटकोर होता है जिसमे ये पहले मिलाद करते है, मिलाद के बाद खड़े होकर कयाम करते है उसके बाद मिठाई पर फ़ातेहाँ पढ़ते है फिर बाँटते है उसके बाद भोज होता है।

(2) हिंदुओ मे जिसकी शादी होती है वह मटकोर के दिन अपने माँ के साथ मंदिर मे पूजा करने जाता / जाती है, इसमे आसपास की बहुत सो औरतें भी शामिल होती है।

वही बरेलवियो मे  मटकोर के दिन बहुत सारी औरते एक साथ लड़का या लड़की को लेकर मस्ज़िद मे "ताक " भरने जाती है। इतना ही नही लड़का सारी जिंदगी नमाज पढ़ता हो या न हो मगर बारात जाने से पहले दो रकात् नमाज जरूर पढ़ता है, वह अलग बात है के दुल्हे राजा कभी मस्ज़िद गया न हो।

(3) हिंदू भाईयो के यहाँ शादी मे दुल्हा से धान कुटवाया जाता है, उसी तरह बरेलवियो के यहाँ भी घर - भराव होता है जिसमे चावल उपर से फेंका जाता है और सास ससुर का घर भरा जाता है ।

(4) हिंदुओ मे लड़की की विदाई के वक़्त लड़की का भाई गाड़ी को धक्का देकर आगे बढ़ाता है, ठीक उसी तरह बरेलवी के यहाँ भी लड़की का भाई गाड़ी को धक्का देकर आगे बढ़ाता है।

पर्व व त्योहार मे यक्सानीयत (सिमिलार्लिटीज)

(1) हिंदू धर्म के मानने वाले छठ पूजा (कुछ राज्य मे ही होता हो) मनाते है, बरेलवी भी बीबी पब्नी और बेड़ा नाम का पर्व मनाते है।

(2) हिंदू रक्षा बंधन के मौके पर महाविरि झंडा मनाते है तो दूसरी तरफ झंडे के जैसा ही 10 मुहर्रम को ताजिया मनाया जाता है।

(3) हिंदू सकरात् मनाते है जिसमे तिल का लाइ खाते है तो बरेलवियो के यहाँ शब् ए बारात मनाया जाता है जिसमे हलवा खाते है।

(4) हिंदू महायज्ञ मनाते है, जिसमे बहुत सारी देवी देवताओं की पूजा की जाती है, बरेलवी लोग भी उर्स मनाते है जिसमे सज्जादा नशीं के आगे सजदा करते है और अपनी मुरादें मांगते है। उर्स मे ये लोग दरगाहों और मजारो पर जाते है वहाँ मेला लगता है। मेला मे ज्यादातर लड़के और लड़कियो की भीड़ होती है जहाँ से लड़किया किसी लड़के के साथ भाग जाती है।

तहज़ीज़ व तदफ़ीन / अंतिम संस्कार या क्रिया कर्म मे समानताएँ

(1) हिंदू धर्म मे मरने वाले के यहाँ श्राद होता है उसी तरह
बरेलवियो मे चहारम, दस्वां, बिस्वां, चलिस्वा, बरसी और बरखि होता है मरने वाले के नाम पर।

(2) हिंदू धर्म के धर्मगुरु, संत या आचर्यं भगवा या नारंगी रंग का कपड़ा पहनते है
ठीक उसी तरह बरेलवी लोगो के पीर, मौलवी, सज्जादा नशी व उलेमा चिश्तिया रंग के कपड़े पहनते है।

(3) हिंदू राशि देख कर अपने भाग्य / भवीष्य का फैसला करते है वहीं बरेलवी भी जंतरि देख कर शादी या किसी खास मौके का तारीख तय करते है, वो अपने किस्मत का फैसला जंतरि की तरिखो से करते है।

(4) हिंदू भाई यंत्र बनाते है और उसे दरवाजे के सामने लटका देते है तो दूसरी तरफ लौह ए कुरानी लटका देते है।

(5) ज्यादातर हिंदू भाई जब बाहर से आते है तो देवी देवता का दर्शन करने धाम जरूर जाते है। उसी तरह जब कोई बरेलवी विदेश से आता है तो बाबा के दरबार पर हाजिरी देने जरूर जाता है।

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Apne jawani ko Allah ki ibadat me gujarne wale ek Ladke ki kahani

Islam me Ladke ladkiyon ka milna Haram hai ya halal?
Apne jawani ko Duniyawi Lajjato me bitane wale nawjawano ke liye sabak.

اویس اچھے نمبر حاصل کرکے اب یونیورسٹی میں داخلہ لے چکا تھا ۔ یونیورسٹی کا ماحول بہت الگ تھا ، شاید اس سے پہلے اس نے ایسا ماحول کبھی نہ دیکھا تھا ۔ ہر طرف نوجوان لڑکے اور لڑکیوں کا شباب عروج پر تھا ۔ ہر کوئی خود کو آزاد سا محسوس کر رہا تھا ۔ اس روایتی ماحول سے آزادی جو کہ اسکول ،اکیڈمی یا کالج لیول تک ہوتا ہے جس میں مخلوط ماحول میں پڑھنے کے باوجود بھی ایک لڑکے اور لڑکی کا ایک دوسرے سے بات کرنے کو بھی معیوب سمجھا جاتا ہے ۔

آج وہ بھی آزاد تھے ۔ شاید اللہ کی حدودیں یونیورسٹی کی باؤنڈری سے باہر ہی ہوتی ہیں ۔

خیر ایک دوسرے سے انٹریکشن کے نام پر تعلقات بڑھنا شروع ہوئے ، واٹس ایپ پر نمبروں کے تبادلے ہوئے ، فیس بک پر ایک دوسرے کو ایڈ کرنے لگے یہ نوجوان لڑکے لڑکیاں ۔ اور کیوں نہ کرتے وہ یہ سب آخر اب وہ یونیورسٹی کے طالب علم تھے ۔ اب وہ ایک دوسرے کے “کولیگ” تھے ۔ ہاں “کولیگ” کے لیے یہ پردے کہاں ضروری ہوتے ہیں ۔

گروپ بندی ہونا شروع ہوئی ۔ جس کی انٹرکشن کے نام پر بات بن جاتی اب وہ نامحرم لڑکے اور لڑکیوں پر مشتمل گروہ کبھی یونیورسٹی کے کیفیٹیریا پر بیٹھا ہوا ملتا تو کبھی گراؤنڈ میں ۔
کبھی پڑھائی کے نام پر لائبریری میں یا تفریح کے نام پر پارکوں یا سیاحتی مقامات پر ۔

اویس یہ سب ابھی تک ہضم نہ کر پایا تھا ۔ اس کا بھی خون گرم تھا ۔ دل اس کا بھی کرتا تھا کہ وہ بھی ایسے موج مستی کرے ، وہ بھی حسیناؤں کے جھرمٹ میں بیٹھے ۔

کبھی ان کو ہسائے تو کبھی ان کی باتوں پر ہنسے ۔ لیکن وہ صبر کرتا گیا ، وہ برداشت کرتا رہا کیوں کہ اس کو علم تھا کہ ایک اور بھی ہستی “ اللہ پاک کی ذات “ موجود ہے جس کی رفاقت اس سے بھی اعلی چیز ہے ۔

وہ کہ جس جیسی دوستی کسی کی نہیں ۔ جس سے بڑھ کر وفا کسی کی نہیں ۔ وہ جب بھی یہ منظر دیکھتا تو اللہ سے کہ اٹھتا “  یا اللہ “ اگر میں چاہتا تو میں بھی یہ سب کرسکتا تھا ، میرا بھی یہ سب کرنے کو جی کرتا ہے ۔ لیکن میں تیری محبت میں اس سب عارضی موج میلے کو ٹھکراتا ہوں ۔

آج اس کی اللہ کے لیے محبت اس کی ان خواہشات پر غالب آگئیں ۔ اب اس کو فرق نہیں پڑتا تھا کہ کون کیا کر رہا ہے کیوں کہ وہ اللہ کے نبی صلی اللہ علیہ والہ وسلم کے اس فرمان سے بخوبی واقف تھا کہ :-

“سات قسم کے لوگ جو کل قیامت کے دن اللہ کے عرش کے سائے تلے ہوں گے ان میں ایک وہ نوجوان بھی شامل ہوگا جس کی
جوانی اللہ کی عبادت میں گزری ہوگی “ ( البخاری )

آج اپنی جوانی کی قدر کریں کیوں کہ “ جوانی پھر نہیں آنی “

بقلم : اللہ کا یہ بندہ

طالبان کے برتاؤ سے متاشر ہو کر یورپ لیڈی رپورٹر اسلام قبول کر لی ۔

مسلم دنیا میں بے پردگی کی کہاں سے ابتدا ہوئی ۔ اس کی تاریخ ۔

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Love Jihad Ek Propganda: Boy Friend Banane wali Muslim Ladkiyaa Hoshiyaar ho jaye nahi to anjaam bahut bura hoga?

Muslim Ladkiya Gair Muslim ladko se shadi kyu kar rahi hai?

Boy friend aur Girl Friend Banane walo ka anjaam kya hota hai?

ब्वॉय फ्रेंड बनाने वाली लड़कियां जरूर पढ़े।

सभी मुसलमान भाईयो तक यह पैगाम पहुंचा दीजिए।

लड़के ने नम्बर मांगा उसने दे दिया...

लड़के ने तस्वीर मांगी उसने दे दी...

लड़के ने कॉल किया वह रिसीव कर ली... फिर यहाँ से मुहब्बत के अफसाने शुरू हो गए।
फोन पर मिठी मिठी बातें होने लगी  , तरह तरह के इशारे होने लगे।

लड़के ने दुपट्टा हटाने को कहा उसने हटा दिया...

लड़के ने कुछ देखने की ख्वाहिश की उसने पूरी कर दी...

लड़के ने मिलने को कहा वो माँ बाप, घरवाले, कोचिंग के टीचर को धोखा देकर आशिक़ से मिलने पहुंच गयीं..

लड़के ने बाग में बैठ कर तारीफ़ करते हुए सरसब्ज़ बाग दिखाए उसने देख लिये...

फिर जूस कार्नर पर जूस पीते वक़्त लड़के ने हाथ लगाया, इशारे किये, मगर कोई बात नहीं अब नया ज़माना है यह सब तो चलता ही है... हम सब मॉडर्न है नो प्रॉब्लम...

फिर लड़के ने होटल में कमरा लेने की बात की, उसने शर्माते हुए इंकार कर दि, कि शादी से पहले यह सब अच्छा तो नहीं लगता ना...

फिर दो तीन बार कहने पर आप तैयार हो गयीं होटल के कमरे में जाने के लिए...

आप दोनों ने मिल कर खूब एंजॉय किया...
अंडरस्टेंडिंग के नाम पर दुल्हा दुल्हन बन गए
प्रोटेक्शन का इस्तेमाल किया ताकि बच्चा पैदा न हो ... जिस्मो की हवस बुझ जाने पर अच्छी अंडरस्टेंडिंग हो गयी।

फिर एक दिन झगड़ा हुआ और सब खत्म क्योंकि नजाएज़ रिश्तों का अंजाम कुछ ऐसा ही होता है... अगर रिश्तों की बुनियाद हवस मिटाने से शुरू हुई है तो उसका अंजाम भी खुद गर्ज़ी होगा।

और फिर जब उसने शादी की जिद की तो उसे ले जाकर किसी होटल मे बेच दिये, जहाँ हमेशा हमेश के लिए महफ़िल की शम्मा बन गयी

अगर शादी कर भी ली तो पता चला वो तो समीर खान  नहीं बल्कि सुमित कुमार निकला।

अब शादी के बाद एक बेवा और अछूत की जिंदगी जी रही है, जिससे हर कोई नफरत करता है, सभी भागते है के यह मुस्लिम है हमारे घरों के देवता भाग जाएंगे, लक्ष्मी चली जायेगी। हमारा वंश नही चलेगा, हमारा गोत्र , कुंडली नही मिल रही है,वगैरह वगैरह।

मौलाना जब किसी जलसे मे इस उनवान पर ब्यान देते है तो खुद मुस्लिम लड़किया हंसती है,  औरतें मजाक बनाती है, कुछ नाम निहाद सेकुलर लिबरल मुनफीक जो मुस्लिम मुआशरे मे दीमक के मानिंद काम कर रहे है उन्हे उलेमा के फतवे से बहुत चिढ़ होती है, मीडिया कुत्ते और भेड़ियों के जैसे शिकार के लिए टूट पड़ते है और मगरीबि पसंद लोग यूरोप परस्त कैम्पेन चलाने लगते है। उलेमा जब खुतबा मे समझाते है तो उसे कट्टरपंथी, चरमपंथी और दकियानुसी का टैग लगा दिया जाता है।

लेकिन क्या यहां उस लड़की की गलती नहीं है ?

लेकिन क्या वो गैर मुस्लिम लड़का जबर्दस्ती आपके मोबाइल से आपकी तस्वीर और नंबर ले गया था ?

जूस कार्नर पर भी क्या वो भेड़िया जबरदस्ती ले गया था गन प्वाइंट पर ?

क्या वो दरिंदा
होटल के कमरे तक भी जबर्दस्ती आपके घर से ले गया था??
तो क्या सिर्फ इसमे उस लड़के की गलती है?

क्या आप कोई चार साल की बच्ची थी ?

क्या आप को अपने रब का हुक्म याद नही?

ये सोशल मीडिया पर आए दिन ज़्यादती की बढ़ती हुई घटना आपको कुछ नहीं बताती ?

ये नहीं पता था कि एक होटल के कमरे में या चारदीवारी में जिस्मों की प्यास बुझाई जाती है.

सब पता था आपको, सबकुछ मालूम है आपको...

होटल के कमरे में मुहब्बत के अफसाने नहीं लिखे जाते, वहां कोई इबादत नही होती है, दिनी तालीम नही दिये जाते, बल्कि जिस्मो से जिस्मो कि आग बुझाई जाती है।

फिर शिकायत होती है के चार लड़कों ने ग्रुप रेप कर दिया...

क्या लगता है वो जो आपकी इज्ज़त का ख्याल रखे जो खुद आपको इसी मकसद के लिए लेकर जा रहा है ?

अगर लड़कियां अपनी इज्जत व अस्मत की हीफाजत खुद करेगी तो उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता...

जिस्मो के भूखों से दूर ही रहें ... लड़का हो या लड़की
मुहब्बत जैसे पाकीजा लफ्ज की तौहीन नही करे, फिरंगियों की यह तहजीब है, हमारे दिन मे  यह सब हराम है और इसकी सज़ा सर कलम करना है।
मुहब्बत की मंजिल निकाह है कोई सड़क, पार्क, होटल, कॉलेज और सिनेमा वगैरह नही।

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Saudi Arab, UAE, Kuwait aur Dusre Mulko ne Natflix ko kyu ban kiya, Muslim Society par Iske asraat.

Saudi Hukumat ne Disney , Hotstar, Netflix jaise Chanel ko kyu Ban kiya hai?

Netflix ka hamare Muashare par ashraat.

Ye Channels Muslim Society me Western Culture ko firog de raha hai,  Jiski Wajah se Musalman Ladke ladkiyaa Angrejo ke taur tarike Apna rahe hai.

Sare Musalman Bhaiyo se Gujarish hai ke Yah Tahrir jarur padhe aur uspe Amal kare.

Disney, MBC3, CN Children, Hot Star, Netflix,

ان تمام چینلوں کا بائیکاٹ کریں، انہیں اپنے گھر سے ختم کریں.

یہ تمام چینلز آپکی اولاد کی فطرت اور دین میں فساد برپا کر رہے ہیں!
.
یہ کام آپ اللہ تعالیٰ أولا وآخراً کے لیے کریں،
اللّٰہَ تعالیٰ کی خاطر اس فحاشی پر غیض و غضب کا اظہار کریں، اور اسکے محرمات پر غیرت کھائیے!

اپنی اولاد کے ساتھ بیٹھا کریں،
ان سے مسلمانوں کی عزت و وقار پر گفتگو کیا کریں،
انہیں بتائیے کہ اس قسم کے چینلز کتنے بڑے فساد کا موجب ہیں،

اور انہیں بتائیے کہ ہمیں اللّٰہَ تعالیٰ کی قربت کے حصول کے لیے کیسے اپنی شھوات کے خلاف جدوجہد کرنا ہے،

اور انہیں اصل مسئلہ کی وضاحت کیجئے کہ یہ چند دنوں کی بات ہے، جو ان چینلز میں بیت گئے تو یہ دن اللہ تعالیٰ واپس نہیں لوٹائیں گے،

اور جب آپ یہ غلاظت چھوڑ دیں گے تو اللّٰہَ تعالیٰ اسکے بدلے آپکو پاک طیب بدلے سے نوازے گا، ان شاء اللہ

اور عملی نصیحت کے طور پر :
اس طرح گفت و شنید کے بعد،
اپنی اولاد کے لیے معیاری وقت کا تعین کریں،
اور انکی تفریح کے سامان کے لیے ایک شیڈول مختص کریں،

انکے ضد کرنے، رونے دھونے اور اپنی بے بسی پر صبر کا مظاہرہ کریں اور اللّٰہَ تعالیٰ سے استقامت طلب کریں.

ہمیں عظیم وحی کو دلیل کے طور پر یاد کرنا چاہیے :
قال صلى الله عليه وسلم: "ما مِنْ عبدٍ يسترْعيه اللهُ رعيَّةً ، يموتُ يومَ يموتُ ، وهوَ غاشٌّ لرعِيَّتِهِ ، إلَّا حرّمَ اللهُ عليْهِ الجنَّةَ." (صححه الألباني).

رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا: ”کوئی بھی بندہ جسے اللہ تعالیٰ کسی رعیت کا حاکم بنا دے اسے جس دن موت آئے وہ اس حال میں مرے کہ اپنی رعیت کو دھوکا دینے والا ہو تو اللہ اس پر جنت کو حرام کر دیتا ہے۔“

قال صلى الله عليه وسلم: "من تركَ شيئًا للهِ ، عوَّضهُ اللهُ خيرًا منه." إسناده صحيح
رسول اللہ ﷺ نے فرمایا؛

"جو اللہ تعالیٰ کی خاطر کوئی چیز چھوڑے گا، اللّٰہَ تعالیٰ اسکے عوض بہتر سے نوازے گا. "

دیر مت کریں،
تاخیر مت کریں ،
سستی مت کریں،
نہ خود کو کمزور سمجھیں،.
نہ خوفزدہ ہوں،
اللہ سے مدد طلب کریں
اور خود کو بے بس مت سمجھیں.

محمد عزالدين حسونة (عربی سے ترجمہ)

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Angrejo ke Aane se Hindustan ke Musalmano ki halat kaisi ho gayi, aaj yah Qaum kis Halat me hai?

Ek Behan ka Musalmano ko Paigham.
Aaj Muslim Muashare Me itni burai kyu faili hui hai?
Angrejo ki Gulami karte rahne se Musalamn ki Qadar Firangiyo ke Gulam bane hue hai?
Angrejo ke Aane se Musalamaano ke Tahjib pe kaisa asar hua?

ईरान मे 90 - 95 फीसद औरतें हिजाब समर्थक है फिर #हिजाब के खिलाफ क्यु प्रदर्शन हो रहा है?

برصغیر میں جب انگریز نے قدم رکھا تھا، اہل علم و عقل و دانش نے خوب جھنجھوڑ جھنجھوڑ کر لوگوں کو بتایا کہ یہ چور قوم تمہیں وھاں تک لے جائے گی جہاں تباہی کے علاوہ کوئی اختتام نہیں.

1857 کی جنگ میں اپنے ہی لوگ شکست کا باعث بنے. پھر وہ کچھ ہوا جس کے نتائج ہم بھگت رہے ہیں.

یہ غلیظ ترین تحریک صرف اسلام کے خلاف نہیں فطرت کے خلاف جنگ ہے. انسانیت کے خلاف جنگ ہے.

ابھی تو چند باشعور عوام اسکے خلاف آواز بلند کر رہے ہیں لیکن چھ ماہ ایک سال میں یہ آوازیں بھی بیٹھ جائیں گی. تاریخ شاہد ہے.

پیدائشی خواجہ سرا جو، مرد یا عورت کی مشابہت میں مسلمان معاشرے میں بے حیائی پھیلائے، اس آبادی سے دور بھیج دینے کا حکم ہے.
تو فحاشیت کا مجموعہ کیسے قابلِ قبول ہو سکتا ہے؟

میں شیوخ سے یہ بات چیت کرنے کی کوشش میں ہوں کہ جب عوام نے ہی سب کچھ کرنا ہے تو ایسے خود ساختہ خواجہ سراؤں کو سرعام پتھر مار کر قتل کرنے کا شرعی حکم کیا ہو گا؟
اگرچہ یہ بھی فتنہ ہی ہے.

لاہور کے کوئین میری کالج اور سکول والے روڈ پر جوس کارنر اور کھانے پینے کی دکانوں پر کھلم کھلا بے حیائی ہونے لگ گئی تھی. دکانوں کے پچھلے حصے غسل خانے اور کمرے بنائے ہوئے تھے. حکومت کو شکایت درج کروانے کے باوجود کچھ نہ ہوا.

پھر ایک مجاہد نے درمیانے درجے کی بم بلاسٹ کارروائی کر دی. اسکے بعد سے اب تک وھاں فی الحال امن ہے. فحاشی کی صورتحال ویسی نہیں رہی.

میں جو بات سمجھانا چاہ رہی ہوں. یقیناً فراست والوں کو سمجھ آ رہی ہو گی.

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Maulana Jarjis Ansari ko Rape ke Jhoote iljam me 10 saal ki Sza hui.

Maulana Jarjis Chturvedi ko 10 Saal ki sza kyu sunayi gayi?


मौलाना ज़र्ज़ीस् साहब को 10 साल की सजा और 10 हजार रुपये का ज़ुर्माना।

मुझे तो अपनो ने लूटा गैरो मे कहा दम था
मेरी कश्ती थी वहाँ डूबी जहाँ पानी कम था। 

मौलाना ज़र्ज़ीस् साहब की गिरफ्तारी एक साजिश है।

मौलाना की गिरफ्तारी के पीछे राजीनीतिक कारण है, इसमे गैरो से ज्यादा अपने शामिल है। 2018 मे मौलाना ज़र्ज़ीस् हफिजुल्ला एक जलसे मे बताये थे के कैसे बिद्दती उनके खिलाफ दिन रात साजिश रच रहे है। उस वक़्त भी यही लोगो का हाथ था।

उस लड़की ने उस समय खुद यह कुबूल की थी पुलिस के सामने की उसे बहला फुसला कर, पैसे की लालच देकर और धमकी देकर उस ऐसे बयान दिलवाये गए मौलाना को जेल भेजने के लिए।

इटावा के रहने वाले मशहूर मौलाना जरजिस सिराजी चतुर्वेदी  साहब को झूठे रेप केस  मे वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने  10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही उन पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है. हालांकि, मौलाना ने कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करने की बात कही है.

वाराणसी के जैतपुरा इलाके की एक औरत ने मौलाना पर साल 2016 में रेप करने का आरोप लगाया था.

महिला के इल्जाम के मुताबिक, मौलाना जरजिस चतुर्वेदी बनारस मे तकरीर करने आते थे, इस दौरान साल 2013 में उसकी   मौलाना से पहचान हुई थी.

मीडिया और सोशल मीडिया पर मौलाना के खिलाफ तरह तरह के प्रोपगंडे चलाये जा रहे है, जबकि यह मामला 2016 का है। उस वक़्त लड़की खुद यह स्वीकार की थी के उसे पैसे देकर जबरदस्ती झूठे केस करवाये गए है।

उस लड़की ने उन लोगो के बारे मे भी बताई थी जिन्होंने पैसे देकर उसे ऐसा करने के लिए कहा था। इन सबके पीछे वैसे लोग है जिन्हे मौलाना की तकरिर् से परेशानी थी, उनके आवाज़ को दबाने के लिए यह सब साजिश की गयी।

यह मामला उसी वक़्त झूठा साबित हो चुका था जब लड़की, उसके बाप और मौलाना को पुलिस बुलाकर पूछताछ की थी, मगर मौलाना को फंसाने के लिए उनपर फिर से बलात्कार का इल्जाम लगाया गया ताकि मौलाना की लोकप्रियता को कम किया जा सके और लोग उनसे नफरत करने लगे।

तीर लगा जब सीने मे ज़ख़्म का इतना न हुआ एहसास

दर्द की इंतेहा तो तब हुई जब कमान देखी अपनो के हाथ मे।

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Ek Bahadur aur Izzatdaar Aurat ki kahani jisne Apni Izzat lootane wale Daku ko mar dala fir use Gao ki Dusri Auraton ne Mar dala.

Aeisi Auratein Jo apni Zillat chhupane ke Apni Izzat Ka Qatal kar di.
Ek Gao ki Auraton ki kahani Jisne Izzat lootne wale darindo ko Mar dala.

‏ایک گاؤں میں ڈاکو داخل ہوئے اور وہاں کی تمام عورتوں کی عصمت دری کر دی.....

مگر ایک خاتون ایسی تھی جب اس کے گھر میں ڈاکو داخل ہوا تو اس نے اس ڈاکو کو قتل کر دیا اور سر کاٹ دیا... واردات کے بعد جب تمام ڈاکو اس گاؤں سے چلے گئے تو تمام عورتیں اپنے پھٹے ہوئے کپڑوں سمیت گھروں سے نکل ‏آئیں اور روتے ہوئے ایک دوسرے کو روداد بیان کرنے لگیں....

اتنے میں وہ بہادر خاتون اپنے گھر سے باہر نکلی, عورتوں نے دیکھا کہ اس کے گھر میں داخل ہونے والے ڈاکو کا سر اس نے ہاتھوں میں اٹھا رکھا ہے اور نہایت غیرت و خودداری کے ساتھ وہ ان کی طرف آنے لگی... اس خاتون نے بلند آواز سے ‏کہا کہ کیا تم نے سوچ لیا تھا کہ وہ مجھے مارے بغیر میری عزت تار تار کر سکتا تھا..؟

گاؤں کی عورتوں نے ایک دوسرے کی طرف دیکھا اور فیصلہ کیا کہ اسے قتل کر دیا جائے تاکہ ان کی عزت بچی رہے اور ان کے شوہر کام سے واپس آنے پر ان سے یہ نہ پوچھیں کہ تم نے اس کی طرح مزاحمت کیوں نہیں کی؟؟

‏پھر انہوں نے اس بہادر خاتون پر حملہ کر کے اسے قتل کر دیا ۔

"انہوں نے ذلت کو زندہ رکھنے کے لئے عزت کا قتل کر دیا"

یہی حال آج ہمارے معاشرے کے چور، حرام خور، جھوٹے اور کرپٹ لوگوں کا ہے.

وہ ہر عزت دار, خوددار شخص کو مارتے ہیں, غریب اور سفید پوش کو حقیر جانتے ہیں اور استحصال ‏کرتے ہیں تاکہ وہ ان کی کرپشن, جھوٹ, چوری اور حرام خوری کے خلاف بات نہ کر سکیں.

"اصل میں یہ لوگ اپنی عزتیں گنوا چکے ہیں اور عزت داروں کا جینا حرام کر رکھا ہے"

ایماندار سرکاری ملازم ہو تو کھڈے لائن, تاجر ہو تو دیوالیہ,عزت دارہو تو کردار کشی.... آپ جب کہیں ‏ایسے لوگ دیکھیں جو چور، جھوٹے، حرام خور، کرپٹ کا ساتھ دے رہے ہیں تو سمجھ جائیں کہ یہ انہیں عورتوں کی اولاد سے ہیں جنہوں نے اپنی ذلت چھپانے کے لئے عزت کو قتل کر دیا تھا..

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The Lion of Desert Umar Mukhtar: Itally (Rom) Faujo ko Shikashat dene wala Umar Mukhtar ko Musalmano ne Bhula diya. Musalman apna Tarikha bhul gaya.

Umar Mukhtar Jinhone itally Faujo se Muqabla Kiya aur Kuffar ko Shikashat di.

Rom ke Faujo ko zaleel karne wale Umar Mukhtar ko Musalmano ne bhula diya.

عمر مختار تاریخ اسلام کی ان ہستیوں میں سے ہیں جنہوں نے عالم اسلام سخت ترین دور  میں داستانِ شجاعت رقم کی۔

ان کی ولادت 20 اگست 1858 میں خلافتِ عثمانیہ کے "ولایت طرابلس غرب" میں ہوئی۔ بچپن میں ہی والدین ہی وفات کے بعد والد دوست نے وصیت کے مطابق مدرسہ زاویہ میں داخل کروایا۔ ‏

دینی علوم میں فقہ، حدیث اور تفسیر کی تعلیم حاصل کی اور جوانی میں صحرا کے کئی سفر کرے جن کے ذریعے صحرائی راستوں سے واقفیت حاصل ہوئی۔ 

اللہ نے ان کی جوانی ان کاموں میں بسر کروائی جو اللہ کی خوشنودی کا سبب تھیں اور جو بعد میں ان کے جہاد میں کارآمد ثابت ہوئے۔
‏بقول ڈاکٹر توفیق الواعی:

"عمر نے ایسے ماحول میں پرورش پائی جس نے دین میں سوچ و بچار اور اس کی طرف دعوت دینا سکھایا۔

ان کی نظر میں جہاد کی فضیلت بہت بڑی ہوگئی اور اس کی سب سے بڑی دلیل یہ ہے کہ انہوں نے اپنی پوری عمر اسلام کے دشمنوں سے لڑنے اور ان کےطاقتوروں کو پچھاڑنے میں گزاری" ‏1909 میں خلیفہ عبد الحمید دوئم کو قوم پرست نے معزول اور ان کے بھائی کو کٹھ پتلی سلطان بنایا۔

خلیفہ کی برطرفی کفار کے لیے ناگزیر تھی کیونکہ خلیفہ عبدالحمید مسلمانوں کی ڈھال تھی اور بقول رسول اللہ ص "امام ہی وہ  ڈھال ہے جس کے پیچھے ہوکر تم لڑتے ہو اور خود کی حفاظت کرتے ہو" (مسلم)

‏ڈھال سے محروم ہو جانے کے بعد  1911 میں اٹلی نے ولایت طرابلس پر حملہ کیا اور مسلمانوں کو شکست دے کر طرابلس پر قبضہ کر لیا۔
کمزور خلافت عثمانیہ (جس پر ترک قوم پرستوں کا غلبہ تھا) نے شکست قبول کرلی۔ یہ حالات تھے جن میں عمر مختار کی کی بیس سالہ طویل جدو جہد کا آغاز ہوا۔

‏جنگ شروع ہونے کی اطلاع ملتے ہی انہوں نے "زاویہ القصور" کا رخ کیا اور جہاد کی منادی  دی جس پر لوگوں نے لبیک کہا اور اسلحہ چلانے کے قابل مردوں کی فہرست تیار ہوئی۔
عید الاضحی سے تین روز قبل عمر مختار اپنے 1000 ساتھیوں کے ساتھ روانہ ہوئے اور قربانی کا فریضہ دوران سفر  سر انجام دیا۔ ‏

قابض افواج کے پاس جدید اسلحہ تھا چنانچہ دشمن کو زک پہنچانے کے لیے گوریلا  جنگ کا انداز اپنا کر کبھی دفاعی حکمتِ عملی اختیار کرتے اور کبھی دشمن کے قافلوں پر حملہ آور ہو جاتے۔ انہوں نے فوج کی انتظامی تقسیم قبائل کی بنیاد پر کی تھی اور سپاہیوں کی درجہ بندی عثمانی فوج کی طرز پر۔

‏اطالوی ایجنٹس  نے جب انہیں خریدنا چاہا تو ان کا جواب تھا: جو کوئی میرا عقیدہ بدلنا چاہے گا اللہ اسے مایوس کرے گا۔میں دھوکے باز نہیں کہ مسلمانوں کو ہتھیار ڈالنے کا کہوں۔ میں اللہ کی پناہ مانگتا ہوں کہ مجھ پر ایسا دن آئے کہ میں کفار کا ایجنٹ بن کر مسلمانوں کو جہاد ترک کرنے کا کہوں۔

‏بیس سال کے جہاد کے بعد ستمبر 1931 میں وہ چالیس سواروں کے ہمراہ جبل الاخضر کا دریا عبور کر رہے تھے کہ اطالوی فوج نے آ گھیرا۔

یکے بعد دیگرے مجاہدین شہید ہوتے گئے اور عمر مختار زخمی حالت میں گرفتار ہوگئے۔

اللہ نے ان کے لیے شہادت کی سعادت چن لی تھی۔

‏عمر مختار کو بن غازی کے قید خانے میں منتقل کیا گیا اور 15 ستمبر 1931 کو ان کو اطالوی کورٹ میں پیش کر کے سزائے موت کا حکم سنا دیا گیا۔

فیصلہ سن کر عمر مختار نے اطالوی جج سے کہا "اصل عدالت اللہ کی ہے نا کہ تمہاری جعلی عدالت۔ ہم اللہ کے ہیں اور اللہ کی طرف ہی لوٹیں گے"۔

‏16 ستمبر 1931 کو صبح نو بجے 73 سالہ عمر مختار کو بن غازی شہر میں سرِعام پھانسی دے دی گئی۔ اللہ تعالیٰ مومن کی موت کی کیفیت قرآن کریم میں یوں بیان فرماتے ہیں: "اے اطمینان والی جان! اپنے رب کی طرف اس حال میں واپس آ کہ تو اس سے راضی ہو وہ تجھ سے راضی ہو" (الفجر)۔

منقول

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Dark of Western: Europe wahi hai Jaha Suraj (Sun) bhi jakar Guroob ho jata hai.

Suraj bhi Mashrik se nikal kar Magrib me Guroob ho jata hai.

Aaj ki Musalman Nasl Europe ki andhi Taqleed kar rahi hai?
European Gulam apne Gulami ko Modern Bata rahe hai.

कीमती चीजो को छुपाया जाता है न के बाजारों मे उसका प्रदर्शन किया जाता है।*

इंग्लैंड की महारानी के ताज मे मुसलमान बादशाहो के हीरे चोरी करके लगाए गए थे।

अप्पी मै मुकम्मल #शरई #पर्दा करना चाहती हूँ मगर मेरे घरवाले इससे मना करते है, मै कैसे मैनेज करू?

Tasneem Nazim Ghazi
( डार्क ऑफ वेस्टर्न ..... यूनिवर्सल ट्रुथ पर एक नज़र ✍ ).....

वह मशरिक से उभरता है , और मग़रिब में डूब कर गर्क हो जाता है ,
यह #सूरज  सुबह शाम यह सबक देता हैं कि सीखो , कहाँ से उभरना है और कहाँ गए तो डूब कर अपना वजूद खो दोगे ।।

पश्चिम में जा कर सूरज डूब जाता है तो यह नई नस्लों की क्या बिसात की वेस्टर्न से उभर सकें .... आखिर उन्हें डूब ही जाना है ....

डूब जाना है आज की रात जश्न में ,,
जश्न , उन्माद , जवानी और शराब , रक्स और मौशिकी

सिर्फ इतना ही नही रहता .... उसके बाद का जो दौर शुरू होता है वह भयावह है ।

मौका भी है दस्तूर भी है ,
जाम भी है सुरुर भी है ,
जवां जिस्म बाहों में रँजूर भी है ।।

हैरत होती है जब बिन्ते हव्वा किसी गैर मर्द को यह हक़ देती है कि आज की रात वह उसके जिस्म के जिस हिस्से को छूना चाहे छू सकता है ।।

और लाखों लाख बलात्कार बिन्ते हव्वा और इब्ने आदम की सहमति से मुकम्मल होते हैं ।।

जिस्मो की हवस मिट जाने के बाद इस जश्न का अंत होता है ,

सुबह की विश करते हुए घर जाने के लिए तैयार दोनों लोग एक दूसरे को सुबह की मुबारकबाद देते हैं ?

सूरज हमेशा की मानिंद फिर मशरिक से नमूदार होता है ,
और जिस वक्त सूरज मशरिक से नमूदार
होता है , ठीक उसी वक़्त पूरी एक वेस्टर्न ( मग़रिबी ) गुलाम पीढ़ी पष्तियों की गहराइयों में गर्क हो कर घर लौट रही होती है ।।

अहले हुक़ूक़ इसको आज़ादी कहते हैं ।

"बिन फेरे हम तेरे
और फिर
त्याग त्याग त्याग तो कुबूल है "

पर पूरे मुआशरे के सामने निकाह होकर आए कपल्स अगर मिस अंडर स्टैंडिंग के चलते #शरई तरीके से अलग होना चाहते हैं तो यह अहले सियासत और अहले हुक़ूक़ की नज़र में यौन शोषण है "...?

अल्लामा इकबाल ने सही कहा था कि। हर मग़रिबी तहज़ीब अपने ख़ंजर से खुद ही खुदकशी करेगी "

समझ नही आता कि जिस बात को हम अपने छोटे भाइयों के लिए गवारा नही कर सकते , उस बात को लोग अपनी बेटियों , बहनो और बीबियों के लिए कैसे गवारा कर लेते हैं ?....

एक गैरत मन्द शायर लिखता है कि
" तेरी बाहों में देखो , मैं औरों की बाहें
कहाँ से लाऊंगा मैं , सनम ऐसी निगाहें ?
यह कोई रस्म होगी , कोई दस्तूर होगा ।
मगर दस्तूर यह क्यों मुझे मंजूर होगा ?
.
सूरज तो दरस देता है , अब हम सुनिश्चित करें कि हमारी पीढ़ियों को हम गर्क होने देंगे या उन्हें मग़रिब के उफ़क़ पर नमूदार करके औजे सुरैया के लिए रास्ता हमवार करेंगे ।।।

"मैं कौन ............ ?
सूरज हूँ ज़िन्दगी की रमक छोड़ जाऊंगा
मैं डूब भी गया तो चमक छोड़ जाऊंगा..
मैं ग़ाज़ी ✍

औरत से इलम छीन लिया जाए तो जहालत फैल जायेगी, मगर इल्म के नाम पर पर्दा खतम कर दिया जाए तो बे हयायी फैल जायेगी।

जब #मिस्र की #शहज़ादी ने #इंग्लैंड से पढाई पूरी करने के बाद अपने #देश वापस आकर एक #फंक्शन मे अपने #बुर्क़े को कदमो तले रौंद डाली और आगे के हवाले कर दी।  #इतिहास

कैसे कोई #ट्रांसजेंडर पैदा होता है, पाकिस्तान मे #ट्रांसजेंडर कानून क्यों बनाया गया, इससे #समाज पर क्या प्रभाव होगा?

अमेरीका के #हॉस्पिटल मे एक अजीब वाक्या पेश आया जिसके बाद #अस्पताल के #ईसाई डॉक्टर #मुसलमान बन गए।

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Ek Ladki ka Sawal: Mai Parda karna chahati hoo magar Samajh nahi aata manage kaise karoo?

Waisi ladkiyaa Jo Parda karna chahati hai magar Uske ghar wale use mana karte hai.

Ek Ladki ka Sawal: Mai Parda karna chahati hoo magar Samajh nahi aata ke kaise manage karoo?
Modern Jamane me Ladkiyo ke jism par ko becha ja raha hai kaise?

Parde ke khilaf jab Europe Ka Cultural drone Musalmano par giraya gaya.

Jab Ek American Doctor Quran ki tilawat sunkar Musalman ban gaye.

آسیہ عمران#

**پردہ کیسے مینیج کروں۔۔۔۔*

وہ ابوظہبی سے اپنے جیٹھ کی وفات کی خبر سن کر آ رہی تھیں۔ افسردگی سے ماضی کے کچھ ورق پلٹتے گویا تھیں ۔ میرا گھرانہ پردے کے معاملے میں کوئی خاص اہتمام کرنے والا نہ تھا ۔

جب شادی ہو کر سسرال آئی تو دیکھا سب دیور جیٹھ نگاہیں جھکائے داخل ہوتے ہیں۔اور ہر ایسی جگہ جہاں ہمارے ہونے کا گمان ہو نہیں جاتے خود کو گھر کے کچھ حصوں تک محدود رکھتے ہیں کچن میں بھی بے دھڑک نہیں آتے کہ ہم دیورانیوں جیٹھانیوں وغیرہ سے سامنا نہ ہو جائے۔

بہت اچھا سا احساس تھا جو گھر بھر میں چھایا تھا۔ شادی کے شروع میں ہی بڑی نند نے بڑے مان سے سمجھایا ۔ بھابھی جب باہر آئیں تو بڑی چادر لے لیا کریں کہ آپ کے لمبے ،خوبصورے بال چھوٹے دوپٹے میں نظر آتے ہیں۔کمرے میں جو جی چاہے کر لیا کریں کہ گھر کا مجموعی ماحول امی جی نے بڑی محنت سے بنایا ہے۔

کہنے لگیں مجھے یہ سب دلچسپ اور اچھا لگا تھا ہم نے جلد ہی اس گھر کے پیارے سے طور طریقے اپنا لئے۔ ہماری مشترکہ فیملی میں سبھی ایک دوسرے کا حد درجہ احترام کرنے والے تھے۔
بھائیوں میں سے جو بھائی کام سے باہر ہوتے گھر میں موجود بھائی بغیر احساس دلائے ان کی ذمہ داریا ں پوری کرنے لگتے۔

آہستہ آہستہ سب اپنے اپنے گھروں میں الگ ہوگئے اور کچھ باہر چلے گئے مگر اب بھی جب اکٹھے ہوتے ہیں تو وہی وقت گویا لوٹ آتا ہے۔ یہ سب میری ساس کی اعلیٰ تربیت کا نتیجہ ہے۔

وہ ایک جذب کے عالم میں بتاتی چلی جا رہی تھیں۔
آج ایک بچی نے واٹس ایپ پر سوال کہا آپی میں پردہ کرنا چاہتی ہوں سمجھ نہیں آتا کیسے مینیج کروں؟

تو مجھے ان کا خیال آیا۔ بچی کہہ رہی تھی میں شریعت پر عمل کرنے کی مسلسل کوشش کر رہی ہوں۔پردہ مینیج کرنے میں رہنمائی درکار ہے۔

میں نے اسے بتایا آج سے انیس سال پہلے اس رہنمائی کی میری ایک کزن کو بھی شدت سے ضرورت تھی۔

جب میٹرک کے بعد اس نے فیصلہ کیا کہ بس اب اللہ کے حکم سے انحراف نہیں کرنا فیصلہ تو کر لیا ، عملی لحاظ سے مسائل کے پہاڑ تھے ۔

خاندان میں اس طرح کے پردے کا تصور تک نہ تھا۔

سوچوں نے ذہن پر گھیرا ڈال دیا۔ گرمیوں کی چھٹیوں میں جب وہ آبائی گاؤں ملنے گئی تو انتہائی سخت مرحلہ تھا اس نےرب کی خاص مدد مانگی اور ڈٹ گئی۔

اس نے کوشش کی کہ بڑوں کو سلام کرے۔

کچھ نے اسے بھی انا کا مسئلہ بنا لیا۔ ایک صاحب نے اعلان کیا کہ ہم آئندہ اس گھر میں نہیں آئیں گے اور نہ ہی اپنے گھر کسی مرد کو آنے دیں گے۔

حالات کچھ ایسے ہوئے کہ گھر والوں نے بھی باتیں سنائیں۔ اس نے سمجھانے کی کوشش کی کہ میں کونسا سب رشتوں سے کٹ رہی ہوں سلام بھی کرتی ہوں ۔بس اللہ کی بتائی حدود میں رہنے کی تو کوشش کر رہی ہوں۔

دادی جان کف افسوس ملنے لگیں یہ کیسا پردہ ہے جو ایک برتن میں کھانا کھانے والوں سے بھی ہونے لگا ہے۔

واحد اس کے ابو جی تھے جو ان کےمعاون بنے دادی جان سے کہا آپ ہی ان بچیوں کے لئے حضرت فاطمتہ الزہرا رضی اللہ عنھا جیسا پردہ مانگا کرتی تھیں اب جب اللہ نے توفیق دی تو مخالفت کیوں کرنے لگیں۔

وہ وقتی طور پر خاموش ہو گئیں۔متفکر تھیں کہ ایسی بچی سے رشتہ کون کرے گا؟

یہ مرحلہ تو جیسے تیسے طے ہوا اس مبارک فیصلہ میں اللہ ربی نے ایسی برکت ڈالی کہ خاندان کی اسی فیصد قریبی رشتہ دار لڑکیاں اسی راستے پر چل پڑیں ۔

اب تقریباً سبھی گھروں میں پردہ کا خیال رکھا جاتا ہے کزن گھر میں آئیں بھی تو نگاہیں جھکائے کھنگارتے داخل ہوتے ہیں ۔

اس سے رسوم و رواج پر بھی گہرا اثر پڑا ہے۔
بچی کے لئے پیغام ہے۔

پہلا مرحلہ لوگوں کے ذہنوں میں یہ ڈالنا ہے کہ یہ احکام الٰہی کی پابندی میں نا محرم کے سامنے نہیں آتیں اور پھر ڈٹ جانا ہے۔ آہستہ آہستہ سب آسان ہو جاتا ہے۔

خود کو غیر ضروری تکلیف میں بھی نہ ڈالیں کہ لوگوں کو کوفت ہونے لگے اور کوئی آپ جیسا بننے سے ڈرنے لگے۔ معاملات میں محدود اور حسب ضرورت معاملہ کریں جہاں فتنہ کا اندیشہ نہ ہو اور مخلوط محافل نہ ہوں تروتازہ ،زندہ دل اور باوقار نظر آئیں کہ لوگ آپ کے قریب ہوں رویے سے متاثر ہوں، فالو کرنا چاہیں۔

یاد رکھیے یہ فیصلہ عام فیصلہ نہیں۔ آپ کی زندگی کے رخ کو یکسر بدل دینے والا فیصلہ ہے۔ اس وقت کا غالب نظام سرمایہ دارانہ نظام بے۔ جو بے حیائ ،لذت پرستی کی بنیاد پر کھڑا ہے۔ خواتین حجاب لے لیں تو ان کی ملین ڈالرز کی کاسمیٹک انڈسٹری بیٹھ نہ جائے۔

عورت پروڈکٹ کے بجائے جب گھر کا مرکز ہوگی انھی حدود میں موثر سرگرمیوں میں مصروف عمل ہوگی تو اس نظام کے لئے قیامت ہی تو ہوگی۔

پیاری بیٹی آپ کو قدم قدم پر مخالفت سے سابقہ ضرور پیش آ ئے گا کہ اس وقت کا معاشرہ ایک مغرب زدہ معاشرہ ہے۔ جس نے کھرے ،کھوٹے کی پہچان کھو دی ہے۔

لیکن یاد رکھیں تمام جہانوں کی سپر پاور آپ کے ساتھ ہے۔ بہت جلد آپ اس فیصلے کے بہترین ثمرات کا مشاہدہ کریں گی۔ انشاء اللہ

علامہ اقبال نے دیار مغرب میں رہنے والوں کو مخاطب کرتے کیا خوب کہا تھا۔

دیار مغرب کے رہنے والو خدا کی بستی دکاں نہیں ہے
کھرا جسے تم سمجھ رہے ہو وہ اب زر کم عیار ہوگا
تمھاری تہذیب اپنے خنجر سے آپ ہی خود کشی کرے گی۔۔

جو شاخ نازک پہ آشیانہ بنے گا ناپائیدار ہوگا

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Aaj kal Ladke ladkiyaan Romantic aur Adult Novel kyu padh rahe hai, iske nukasanat aur Bachne ke tarike.

Aksar log Romantic Novel Kyu Padhna Chahate hai?
Waise Writer jo Sirf Jazbati aur Nafsiyati Novel likhte hai.
Naw jawan Ladke Ladkiyo Ko Galat raste pe lane ke liye Gande Video Air Stories likhe jate hai.

میں ہمیشہ سوچتا تھا کہ یہ ہر کوئی "رومانٹک ناول" کی ڈیمانڈ کیوں کر رہا ہوتا ہے؟
اب مجھے سمجھ میں آیا کہ وجہ یہ موضوع نہیں، بلکہ.............!

کیا آپ کو پتہ ہے کہ جب آپ کچھ مزاحیہ پڑھتے ہیں، دیکھتے ہیں یا سنتے ہیں تو آپکو ہنسی کیوں آتی ہے؟

کیونکہ اس وقت وہ مزاحیہ بات سننے یا پڑھنے سے آپ کے جسم میں ایک ہارمون پیدا ہوتا ہے، یا یہ کہنا زیادہ درست ہوگا کہ حرکت میں آتا ہے۔

بالکل اسی طرح جب ہم کچھ دکھی پڑھتے، دیکھتے یا سنتے ہیں تو ہمیں افسردہ ہوکر رونا آتا ہے۔

اس بات میں کوئی شک نہیں کہ انسانی جسم کی ہر حرکت ہارمونز پر منحصر ہے پھر چاہے وہ جذباتی ہو یا جسمانی۔

ہم سب ہی جانتے ہیں کہ مختلف قسم کے ہارمونز مختلف اوقات میں پیدا ہوتے ہیں، انہی میں سے 15 سے 25 سال کی عمر کے بیچ ایک ہارمون ہمارے جسم میں پیدا ہوتا ہے جو ہمارے اندر جنسی خواہشات (Sexual Desires) بیدار کرنے لگتا، اور اس وقت رومانوی ناول، فلمیں، ڈرامیں یہ چیزیں جلتی پر آگ کا کام کرتی ہیں۔

آپ خود سوچیں کہ ایک جگہ آگ لگی ہوئی ہے، اسکو بجھانے کیلئے آپ اس پر پانی ڈالیں گے یا مٹی کا تیل؟

ظاہر سی بات ہے پانی ہی ڈالیں گے، بالکل ایسے ہی آپکے جنسی جذبات بھی ہیں، ایک تو وہ پہلے ہی آپ میں بیدار ہونا شروع ہوگئے ہیں، پھر اوپر سے آپ رومانوی چیزیں پڑھ، دیکھ اور سن کر ان پر مٹی کا تیل ڈالنے والا کام کرتے ہوئے انہیں مزید بھڑکا رہے ہیں۔

اور جب یہ جذبات بھڑک جائیں گے تو ظاہر سی بات ہے کہ آپ انکی تسکین کیلئے بے چین ہوجائیں گے، اور کوئی حلال راستہ پاس نہ ہونے کی صورت میں خدانخواستہ آپ حرام شے کی جانب بھی راغب ہوسکتے ہیں، جو کہ آپکی صحت برباد کرکے آپکو گناہگار کرنے کے علاوہ اور کچھ نہیں کرے گا۔ لہٰذا رک جائیں، سمبھل جائیں، آگ پر مٹی کا تیل ڈال کر اسے بھڑکائیں مت۔

میں نے پہلے بھی کہا تھا اور اب پھر کہوں گا کہ فیس بک پر ناولز پڑھنے والوں کی اکثریت 15 سے 25 سال کے درمیان ہے، پندرہ سال یا اس کے آس پاس کی عمر وہ ہے جس کو میڈیکل سائینس کی زبان میں پیوبرٹی یا بلوغت کہا جاتا ہے۔

اس عمر میں لڑکے اور لڑکیوں دونوں میں جنسی ہارمونز کی پیدائش بہت زیادہ ہوتی ہے۔ اور انہی ہارمونز کے زیرِ اثر انسانوں میں جسمانی اور نفسیاتی تبدیلیاں آتی ہیں۔ انہی تبدیلیوں میں سے ایک جنس مخالف کی طرف کشش اور جنسی ملاپ کی خواہش بھی ہے۔

اسی لئے پلیز اپنی خواہشات کو ایسا مواد دیکھ اور پڑھ کر ہوا دینے کے بجائے، ان سے دور رہ کر خود کو لگام دیں۔

اور صرف قاری ہی نہیں، میں ان تمام رائیٹرز سے بھی بہت ہی عاجزانہ طریقے سے یہ گزارش کرتا ہوں کہ پلیز، اپنے قلم کو لوگوں کی اصلاح کا سبب بنائیں، نہ کہ اس سے کسی کے جذبات کو ہوا دیں۔

کیونکہ اللّه پاک نے قرآن پاک میں فرمایا ہے۔

شیطان تمھیں تنگدستی سے ڈراتا ہے اور بے حیائی کا حکم دیتا ہے۔
جبکہ خدا بے حیائی سے روکتا ہے۔

میں بالکل مانتا ہوں کہ ہارر، کامیڈی، ڈرامہ اور سسپنس کی طرح رومانس بھی آداب کا حصہ ہے، لیکن پلیز ذرا غور کریں کہ "رومانس بھی" نا کہ صرف "رومانس ہی"۔

رومانس اور بے حیائی کے بیچ ایک باریک سی لکیر ہوتی ہے، اور مجھے بہت شرمندگی کے ساتھ یہ کہنا پڑ رہا ہے کہ کچھ لوگ دھڑا دھڑ اس لکیر کو پار کیے جا رہے ہیں، اب جو تحریروں کا حصہ بننے لگا ہے وہ رومانس نہیں بے حیائی ہے۔

کچھ لوگ اس کے دفاع میں کہتے ہیں کہ
"یہ رومانس تو میاں بیوی کے درمیان دکھایا جاتا ہے، کوئی نامحرم کے بیچ تھوڑی ہے۔"

تو انکو نہایت ہی ادب سے میں بس یہ کہنا چاہوں گا کہ میاں بیوی کے یہ ذاتی معملات صرف ان دونوں کے بیچ چار دیواری میں ہی اچھے لگتے ہیں، آپ انھیں تفریح کا سامان نہ بنائیں، اس پاکیزہ رشتے کے پاکیزہ لمحوں کو ادب کے نام پر دوسروں کے سامنے پیش نہ کریں۔

اگر بہت ہی زیادہ ضروری ہوگیا ہے دونوں کے بیچ قربت دیکھنا تو بس چند مناسب لفظوں میں سرسری سے بتا کر سین ختم کردیں، آگے قاری خود سمجھدار ہے، لیکن کچھ ناولز میں تو اتنی زیادہ تفصیل سے ہر بات بتائی گئی ہوتی ہے کہ ہیرو کا ہاتھ کہاں کہاں ٹچ کر رہا ہے؟
ہیروئن کو کیسا محسوس ہورہا ہے، اور بھی بہت کچھ کہ تف ہے!

پھر دوسری بات کہ جب ایک لڑکی یہ سب پڑھتی ہے تو لاشعوری طور پر وہ اپنی شادی شدہ زندگی کا بھی ایسا ہی تصور قائم کر لیتی ہے کہ شادی کے بعد میرے ساتھ بھی ایسا ہی ہوگا، اللّه پاک سب بہنوں کا نصیب بہت بہت اچھا کرے، لیکن خدانخواستہ اگر انکو حقیقی زندگی میں ایسا کوئی تجربہ نہ ملا تو معملات بگڑ بھی سکتے ہیں۔

یہ تحریریں ایک طرح سے قاری کی تربیت بھی کر رہی ہوتی ہیں، لہٰذا خیال رکھیں کہ آپ ان تک کیا پہنچا رہے ہیں۔

پہلے تمام رائٹرز سے میری گزارش ہے کہ پلیز چند لائکس اور کمینٹ کے چکر میں اپنے قلم کی طاقت کو غلط استمعال نہ کریں، کل کو آپ سے، مجھ سے ہمارے لکھے ایک ایک لفظ کا حساب ہوگا۔

اور پھر تمام ریڈرز سے میرا التماس ہے کہ آپ لوگ بھی ایسا لکھنے والوں کا حوصلہ نہ بڑھائیں، بلکہ اچھا مواد پڑھیں جو آپکے کام آئے۔

اللّه پاک ہم سب کو نیک ہدایت دے، آمین

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Ladkiyo ko Paise banane ki Machine Samajhane wali Soch ne Musalamaanon ko nanga kar diya hai.

Aaj kal Hamlog Ladkiyo ko Paise ki Machine samajh chuke hai.

Umar hone par Ladkiyo ki Shadi nahi karna use Job ke liye Bhej dene wali soch se Muslim Muashare ko nanga kar diya hai.

۔۔۔توجہ طلب........

لڑکی نےابھی جوانی کی دہلیز پر قدم رکھا ہی نہیں ہوتا کہ ہر طرف سے استادیاں شروع ہوجاتی ہیں .

کہ تم ایک لڑکی ہو
تم خاندان کی عزت ہو
اپنی عصمت پاکیزگی ایمان کو بچا کر رکھنا

جبکہ پاکیزہ رکھنے والے یہ استاد، پارسا مرد ،کزن ،حتی کہ مامے ،چاچے یہ نہین سوچتے
کہ پاکیزہ تو وہ رہ لے گی لیکن کب تک ؟

14سال،17سال،25سال۔۔۔؟

کیا آپ اسے رابعہ بصری سمجھتے ہیں ۔۔؟؟

کیا اس کی منہ زور جوانی اسے اس کی عصمت کی حفاظت کرنے دے گی ؟

تو پھر کیوں نہ اسے پڑھانے لکھانے کے بعد اسے کماؤ مشین بنانے کی بجاے اس کا نکاح کرکے اس کی عصمت و پاکیزگی اور ایمان کو محفوظ کرلیا جائے
ادھورا ہی سہی کم از کم سوچیے تو سہی!!

پاکستان میں ہر وہ بندہ عورت کی آزادی چاہتا ہے جو عورت کو اپنے بستر پر آجانے کو علم و شعور و آگہی مانتا ہے۔

جس ب چ کی اپنی بچیاں دارارقم میں پڑھ رہی ہوتی ہیں وہ اکثر خواتین کو فری سیکس پر لیکچر دیتے پائے جاتے ہیں۔۔۔

بخدا مجھے بڑے بڑے فیمنسٹ لبرلز اکثر اوقات کالج ،یونیورسٹیز اور مدارس کی لڑکیوں ،استانیوں کی ننگی تصاویر دکھاتے رہے ہیں، میرا انبکس اس کا گواہ ہے باقاعدہ بتاتے تھے کہ فلاں موبائل لینے کیلے آگے ننگی لیٹ جاتی ہے ۔۔۔

، فلاں استانی فیمنسٹ کی آڑ میں بچیاں سپلایئ کرتی ہے اور فلاں پانچ ہزار کیلے گروپ سیکس تک مان جاتی ہے۔ مجھ سے پوچھ رہے ہوتے تھےکہ کپل سوئپ کے بارے میں آپکی کیا راے ہے، میرا منہ نہ کھلوایئں۔

ہم بحیثیت قوم بہت ح ر ا م ی ہیں، پھر چاہے مرد ہو یا عورت، سب ہی اس حمام میں اجتماعی طور پر ننگے ہیں۔۔ Copied

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