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Tauba Nijat Ka rasta hai kaise? (Part 10)

Tauba Karne se Allah hamari Gunahon ko maaf kar deta hai.
*तौबा राहें नजात*
    *ख़ुतबाते हरम*
          *(10 )*
     अज़ीज़ भाईयों! यह ग़फ़लत और यह खुद फ़रामोशी कब तक? आखिर हम अपने मुकर्रम परवरदिगार की अज़मत व जलालत से कब तक बेख़बर रहेंगे? उसकी चौखट पर कब सर झुकाएँगे? आखिर कब तक फ़िस्क़ व फुजूर और दीन बेज़ारी में हम डुबे रहेंगे?
    *"क्या ईमान वालों के लिए अभी वक़्त नहीं आया कि उनके दिल ज़िक्रे इलाही से नरम पड़ें।"* ( अल् हदीदः 57/16 ) { कुरआन }
    बस अब राहें तौहीद से भटके हुए को राहें रास्त पर आ जाना चाहिए, ग़ाफ़िल लोगों को बेदार हो जाना चाहिए, अब फ़ौरी तौरपर सलात और ज़कात का एहतिमाम करें, शिर्क की आलूदगी से बचें, अख़लाकी बुराईयों से परहेज़ करें, मंशियात को हराम समझें, रोज़मर्रा ज़िन्दगी को लग़वियात से पाक रखें, मौत से पहले जल्द अज़ जल्द तौबा की फ़िक्र करें, जब वक़्त मौऊद आएगा हमें मनों मिट्टी के ढेर में दबा दिया जाएगा, दोस्त अहबाब, रिश्तेदारियाँ और दुनिया की इशरत सामानियाँ क़ब्र की तारीकी और तन्हाई मे काम नहीं आएँगी, वहाँ सिर्फ ईमान और आमाले सालेहा ही का सहारा होगा, फ़रमाने इलाही पर गौर कीजिए: *"कह दीजिये कि ऐ कि ऐ मेरे बन्दों! जिन्होंने अपनी जानों पर ज़्यादती की, तुम अल्लाह की रहमत से मायूस मत हो, यक़ीनन अल्लाह तुम्हारे सारे गुनाहों को बख़्श देगा, वाक़ई वह बड़ा बख़्शने वाला और मेहरबान है। तुम सब अपने रब की तरफ़ रुजूअ करो और उसकी फ़रमाँबरदारी करो इससे पहले कि तुम्हारे पास अज़ाब आ जाए, फिर तुम्हारी मदद न की जाए और पैरवी करो उस बेहतरीन चीज़ की जो तुम्हारी तरफ़ तुम्हारे रब की तरफ़ से नाज़िल की गई है, इससे पहले कि तुम्हारे पास अचानक अज़ाब आ पड़ेऔर तुम्हें ख़बर भी न हो। ऐसा न हो कि कोई शख़्स कहे कि हाए अफ़सोस इस  बात पर कि मैंने अल्लाह के हक़ में कोताही की बल्कि मैं मज़ाक़ मज़ाक़ उड़ाने वालों मे था या कहे कि अगर वाक़ई अल्लाह मुझे हिदायत देता तो मैं ज़रुर परहेज़गारों में से होता या जब वह अज़ाब देखे तो कहे कि काश! मेरे लिए एक बार ( दुनिया में ) लौटना हो तो मैं नेक अमल करने वालों में शामिल हो जाऊँ। क्यों नहीं, बेशक तेरे पास मेरी आयात आई तो तूने उन्हें झुटलाया और तकब्बूर किया और तु इंकार करने वालों में से था।"* ( अज़् ज़ुमरः 39/53--59 )
      अल्लाह हमें सच्ची तौबा की तौफ़ीक अता फ़रमाए, ग़फ़लत और मआसी से दूर रहने की हिम्मत दे। अल्लाह तआला हम सब की मग़फ़िरत फ़रमाए।

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