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Tawaqqul Ka Mana o Mafhoom in Hindi.

Tawaqqul Ka Mana o Mafhoom Quran-o-Hadees se.
सही इस्लामी अकीदा
*📕तवक्कुल का माना व मफ़हुम📕*

*सवाल 1:* तवक्कुल का लुघवी व इस्तेलाही मा'अना क्या है?
*जवाब 2: लुघवी मा'अना:* भरोसा करना।
*इस्तेलाही मा'अना:* तमाम दुनियावी व उखरवी ( आखिरत ) मसलीहतों को हासिल करने और नुकसानदाह चीजों के दूर होने मे सच्चे दिल से *अल्लाह* पर ऐतमाद करने और तमाम मामलात को उसके हवाले कर देने का नाम *तवक्कुल* है।"
*सवाल 2:* हमें कीस पर तवक्कुल करना चाहिए?
*जवाब 2:* हमें सिर्फ अल्लाह पर अल्लाह पर तवक्कुल करना चाहिए।
*अल्लाह का फरमान है: " अगर तुम इमान वाले हो तो अल्लाह पर भरोसा रखो।"*(कुरानःसुरह अल मायदाहः23)
*दुसरी जगह अल्लाह फरमाता हैः " जो अल्लाह पर ऐतमाद करेंगा , अल्लाह उसके लिए काफी है।"*
  ( कुरआनः सुरह अत् तलाक :3 )

*सवाल 3:* गैरुल्लाह पर तवक्कुल की कितनी किस्में है?
*जवाब 3:* गैरुल्लाह पर तवक्कुल करने की 2 दो किस्में है।
(1) ऐसे मामलात मे तवक्कुल करना जिस पर अल्लाह के सिवा कोई कादिर नही जैसे रोजी, मदद और शफा'अत जैसें मामलात मे माअबुदान ए बातिला (झुठे) पर भरोसा करना, ए शिर्क ए अकबर है। क्योंकि ए सारी चीजें सिर्फ अल्लाह के साथ खास है।

(2) जाहिरी असबाब मे तवक्कुल करना जैसे किसी मखलुक पर ऐसी चीज के मुताल्लिक तवक्कुल करना जिस को अल्लाह ने उसके हाथ मे दे रखा है। रोजी देना या तकलीफदाह चीजों को दूर करना वगैरा और ए शिर्क ए अजगर है। हाँ, जिस काम की ताकत रखता हो उस मे उसको सबब बना सकते है लेकिन भरोसा अल्लाह पर करे।
*सवाल 4:* असबाब इख़्तियार करने के मामले मे लोगों की कितनी किस्में है?
*जवाब 4:* असबाब इख़्तियार करने के मामले मे लोगों की 3 किस्में है।
( 1 ) कुछ लोग असबाब इख़्तियार करने का इन्कार करते है और कहते है के ए तवक्कुल के मुनाफी है, ए बहुत बडी जहालत है।
( 2 ) कुछ लोग असबाब इख़्तियार करते है और सिर्फ उसी पर ऐतमाद करते है, ए शिर्क है।
( 3 ) कुछ लोग असबाब इख़्तियार करते है लेकिन अल्लाह पर तवक्कुल करते है, यही दुरुस्त है।
*सवाल 5:* तवक्कुल के फायदे क्या है?
*जवाब 5:* तवक्कुल के चंद फायदे है।
*(1)* अल्लाह पर ऐतमाद और इमान मे इजाफा होता है।
*(2)* अल्लाह से एक जिंदा ताअ'ल्लुक पैदा होता है।
*(3)* आखिरत मे दरजात मे बुलंदी होती है।
*(4)* तवक्कुल करने वाला शरई हुदूद मे रहता है और हराम से बच जाता है।
*(5)* अल्लाह और उसके रसूल सलल्लाहु अलैहि व सल्लम की इत्तेबा'अ साबित होती है।
*(6)* जल्दबाजी से निजात पाता है।
*(7)* शैतानी वसवसों से महफूज रहता है।

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