Parda aur Haya Ko Jab Gulami Kahkar Khawateen Ko Aazadi Ka Jhutha Khawab Dikahaya Gaya.
पर्दा और हया: औरत का वक़ार, ईमान की ढाल
आज़ादी का धोखा या रब की रज़ा?
मेरी बहन, तेरी हया ही तेरी पहचान है
पर्दा: क़ैद नहीं, आपकी इज़्ज़त और ईमान का मुहाफ़िज़.
आज़ादी का फ़रेब: जब हया को क़ैद कहा गया.
वालदैन की ज़िम्मेदारी: नस्लों की पासबानी आपके हाथ.
मीडिया का हमला: ज़हन और ईमान पर एक नज़रियाती जंग.
अब फ़ैसला आपका है: दुनिया की चमक या आख़िरत की कामयाबी?
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| आज़ादी का धोखा या रब की रज़ा? |
असली आज़ादी दुनिया के ट्रेंड्स की ग़ुलामी में नहीं, बल्कि अपने रब की बंदगी में है। पर्दा तुम्हारी क़ैद नहीं, तुम्हारी इज़्ज़त का ताज है और हया तुम्हारा सबसे क़ीमती ज़ेवर। इस ताज को फ़ैशन की आँधी में गिरने न देना, क्योंकि यही दुनिया और आख़िरत में तुम्हारी कामयाबी की ज़मानत है।
क्या हया के बिना आज़ादी मुमकिन है? एक गहरी सोच.
मेरी मोहतरम बहनों, आज का दौर एक अजीब धोखे में जी रहा है। आज़ादी के नाम पर आपसे आपकी सबसे क़ीमती चीज़, यानी "आपकी हया और आपका वक़ार" छीना जा रहा है। वो लोग जिनकी नज़रें गंदी और सोच खबीस है, आपको यह समझाते हैं कि पर्दा एक क़ैद है, एक बोझ है। लेकिन हक़ीक़त इसके बिल्कुल उलट है। पर्दा क़ैद नहीं, बल्कि आपकी पाकीज़गी का तहफ़्फ़ुज़ है। यह आपकी इज़्ज़त का वो मज़बूत क़िला है जिसे कोई बुरी नज़र भेद नहीं सकती।
यह दुनियावी चमक-दमक और फ़ैशन के ट्रेंड्स एक मीठा ज़हर हैं, जो आपको अपने रब से दूर करने के लिए बनाए गए हैं। फ़ह्हाशी फैलाने वाले चाहते हैं कि औरत एक नुमाइशी चीज़ बन जाए, ताकि उनकी गंदी आँखों को सुकून मिले और वो अपनी तिजारत चमका सकें। वो औरत को आज़ादी का लालच देकर उसकी रूहानी पहचान छीन लेना चाहते हैं। याद रखिए, जब एक क़ौम से हया रुख़सत हो जाती है, तो उसकी बर्बादी यक़ीनी हो जाती है।
वालदैन और उम्मत की माओं की अज़ीम ज़िम्मेदारी.
इस सूरतेहाल में सबसे पहली और सबसे अहम ज़िम्मेदारी माँ-बाप पर आती है। आपकी गोद आपकी औलाद की पहली दर्सगाह (पाठशाला) है। अगर आप अपनी बेटियों को बचपन से ही हया और पर्दे की अहमियत नहीं सिखाएंगे, तो कल दुनिया के भेड़िये उन्हें अपनी हवस का निशाना बना लेंगे। अपनी बेटियों को बताएं कि असली ख़ूबसूरती जिस्म की नुमाइश में नहीं, बल्कि किरदार की पाकीज़गी और अल्लाह के हुक्म की पैरवी में है।
और ऐ उम्मत की माओ! आप उम्माहातुल मोमिनीन (नबी ﷺ की पाक बीवियों) और सहाबियात (रज़ि.) की वारिस हैं। उन्होंने पर्दे में रहकर इल्म, हिकमत और बहादुरी के वो कारनामे अंजाम दिए, जिनकी मिसाल आज तक नहीं मिलती। उनकी ज़िंदगियाँ हमारे लिए मशअले राह हैं। उन्होंने साबित किया कि औरत पर्दे में रहकर भी एक मज़बूत और बा-असर किरदार अदा कर सकती है।
मीडिया का हमला: मगरिबी नज़रिये और बेहयाई का फ़रोग़
आज बेहयाई को सबसे ज़्यादा फ़रोग़ मगरिबी (पश्चिमी) मीडिया दे रहा है। टीवी, फ़िल्में और सोशल मीडिया एक सोची-समझी साज़िश के तहत आपके घरों में दाख़िल हो चुके हैं। ये आपको दिखाते हैं कि तरक़्क़ी और आज़ादी का रास्ता छोटे कपड़ों, ग़ैर-महरमों से दोस्ती और दुनियावी नुमाइश से होकर गुज़रता है। यह एक नज़रियाती हमला (वैचारिक आक्रमण) है जिसका मक़सद इस्लामी तहज़ीब और ख़ानदानी निज़ाम को तबाह करना है।
वो आपको यक़ीन दिलाते हैं कि जो औरत जितनी बेबाक और बेपर्दा है, वो उतनी ही 'मॉडर्न' और 'आज़ाद' है, जबकि हक़ीक़त में वो नफ़्स और फ़ैशन की ग़ुलाम बन चुकी होती है।
अब फ़ैसला आपके हाथ में है.
अल्लाह तआला ने क़ुरान में मोमिन औरतों को अपनी चादरें अपने ऊपर डाल लेने का हुक्म इसलिए दिया ताकि उनकी पहचान एक शरीफ़, पाकीज़ा और इज़्ज़तदार औरत के तौर पर हो और कोई उन्हें सताने की जुर्रत न करे। इसी तरह, नबी-ए-करीम ﷺ ने फ़रमाया कि हया और ईमान एक दूसरे से जुड़े हुए हैं; अगर एक चला जाए तो दूसरा भी नहीं रहता।
असली आज़ादी कपड़ों को छोटा करने में नहीं, बल्कि दुनिया की ग़ुलामी से निकलकर सिर्फ़ एक अल्लाह की बंदगी करने में है। पर्दा आपको गुमनाम नहीं करता, बल्कि आपको ख़ास और क़ीमती बनाता है, जैसे एक कीमती मोती सीप के अंदर महफ़ूज़ होता है।
अब फ़ैसला आपके हाथ में है। क्या आप उन लोगों को ख़ुश करना चाहती हैं जो आपको सिर्फ़ एक जिस्म समझते हैं, या उस रब को राज़ी करना चाहती हैं जिसने आपको इज़्ज़त बख़्शी और आपके लिए जन्नत का वादा किया?
उन लोगों के नाम जो बेहयाई के सौदागर हैं
ऐ समाज में गंदगी और फ़हाशी (अश्लीलता) फैलाने वालो!
कभी तन्हाई में सोचना, तुम जो ज़हर बेच रहे हो, उसकी क़ीमत कौन चुका रहा है? तुम्हारी फैलाई हुई बेहयाई जब किसी की बेटी की इज़्ज़त को तार-तार करती है, किसी के बेटे को गुमराह करती है और किसी घर का सुकून बर्बाद करती है, तो क्या तुम्हें एक पल के लिए भी ख़ौफ़ नहीं आता? याद रखो! यह एक ऐसा गुनाह-ए-जारिया (निरंतर पाप) है जिसका अज़ाब तुम्हारी मौत के बाद भी तुम्हारी क़ब्र में पहुँचता रहेगा। जब तक तुम्हारी वजह से एक भी इंसान गुनाह में मुब्तिला होगा, उसका बोझ तुम्हारे खाते में लिखा जाएगा। दूसरों की नस्लों को तबाह करके तुम जो चंद टकों की कमाई या झूठी शोहरत हासिल करते हो, वो तुम्हें अल्लाह की पकड़ से नहीं बचा पाएगी। तौबा का दरवाज़ा बंद होने से पहले लौट आओ, वरना तुम्हारी ये तिजारत दुनिया और आख़िरत, दोनों में घाटे का सौदा है।







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