Zadid Fitna Chaal Purane: Shikari Wahi Khel Naye.
The Deception Behind Liberalism: Unmasking a Modern Fitna.
Shaitan’s trap through liberalism.
Fitna in the name of freedom.
Islamic critique of Western liberalism.
Liberalism and moral decay.
Dangers of liberal thought in Islam.
Truth behind liberal propaganda.
लिबरलिज़्म की आड़ में शैतान की साज़िश – इस्लाम की हिफ़ाज़त का पैग़ाम.
शैतानी एजेंट्स का धोखा: Muslims for Progressive Values की हक़ीक़त.
उम्मत को जगाओ: अल्लाह की किताब और सुन्नत पर क़ायम रहो
लिबरलिज़्म, सेक्युलरिज़्म और मॉडर्निज़्म के नाम पर शैतान की साज़िश का पर्दाफ़ाश। क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में फ़ित्ने से बचाव का तरीक़ा जानें।
शैतान LGBTQ को इस्लाम में घुसेड़ रहा है? नऊज़ु बिल्लाह! Muslims for Progressive Values जैसे फ़ासिक़ उम्मत को गुमराह कर रहे। क़ुरआन की हिफ़ाज़त करो!
![]() |
| Liberalism vs Islamic values. |
लिबरलिज़्म की आड़ में शैतान की साज़िश – एक फ़ित्ने की हक़ीक़त
लिबरलिज़्म की चमकदार आड़ में छिपी शैतान की साज़िश! क़ुरआन और सुन्नत से हटकर "प्रोग्रेसिव वैल्यूज़" सिर्फ़ फ़ित्ना हैं। इस्लाम मुकम्मल है, इसे बदलने की ज़रूरत नहीं!
आज हम ऐसे फिक्र और नज़रिया के बारे मे बात करेंगे जो दुनिया मे रौशन ख्याल,ज़दिदियत और इंसानी हुकुक का नुमाइंदा बनता है, इसके मानने वाले खुद को सबसे ज्यादा तरक्की याफ्ता, तालीम याफ्ता और मुहज्जब समझते है। इनके एक हाथ मे साइंस और दूसरे मे इनका अपना नज़रिया होता है, यह अपने सोच और फिक्र को हर दफ्तर, सैलबस् और हुकुमती निज़ाम मे शामिल करना चाहते है, कर रहे है। यह इंसानी हुकुक के नुमाइंदे किसी भी मजहब, धर्म या बिरादरी के हो सकते है। इनके नामो से इनके धर्म का पता मत करे, इनके धर्म/मजहब सिर्फ अपना नज़रिया (विचारधारा) होता है नाकि खानदानी घराने मे पैदा होने वाले धर्म। इनको धर्म अफीम लगता है दूसरी तरफ यह सब धर्म को मानने वाले और सभी का आदर करने वाले कहते है। यह असल मे न हिंदू है, ना ईसाई, सिख या मुस्लिम कुछ भी नही, बल्कि ये किसी भी धर्म के मानने वाले घर मे पैदा हुए हो इससे उसके धर्म को नही पहचाने उसका नज़रिया क्या है इससे पहचाने। यह leftism, Socialism, Marxism वगैरह जितने भी नज़रिया है सब बातिल और फ़ितना बरपा करने वाले पुराने मगर ज़दीदीयत का लेबादा डाले इंसानियत के दुश्मन है। इसके बावजूद वह इंसानी हुकुक के पैरोकार है।
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
أعوذ بالله من الشيطان الرجيم
अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन, वस्सलातु वस्सलामु अला सय्यिदिना मुहम्मदिन व अला आलिही व अस्हाबिही अजमईन।
ऐ मुसलमानो! अल्लाह के बंदो! आज मैं तुम्हें एक ऐसे फ़ित्ने की तरफ़ मुतवज्जिह करता हूँ जो तुम्हारे ईमान की जड़ों को काटने का दरपेश है। ये फ़ित्ना "लिबरलिज़्म", "सेक्युलरिज़्म" और "मॉडर्निज़्म" के ख़ूबसूरत लिबास में लिपटा हुआ है, मगर इसकी हक़ीक़त तो शैतान की घुटन टोली है – एक ऐसी साज़िश जो तुम्हें अल्लाह की इताअत से दूर करके शैतान की ग़ुलामी में जकड़ देगी। सुनो! ये लोग जो ख़ुद को "मुस्लिम" कहकर तुम्हें धोखा देते हैं, जैसे "Muslims for Progressive Values", वो अपनी ज़बान में फ़रमाते हैं:
"At Muslims for Progressive Values, we are firm in our acceptance and our belief that Islam accepts LGBTQIA+ individuals within the Muslim and non-Muslim communities."
ये इंग्लिश में उनका इक़्तिबास है, जो उनकी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर वाज़ेह है। वो कहते हैं कि इस्लाम हमजिंसपरस्ती और दीगर फ़ुह्श को क़बूल करता है! नऊज़ु बिल्लाह! ये क्या बेशर्मी है, क्या झूट? ये लोग लिबरल नहीं, बल्कि शैतानी एजेंट्स हैं – मलऊन, फ़ासिक़ और फ़ाजिर, जो अल्लाह की वह्य को अपने गंदे हाथों से मस्ख़ करने की कोशिश कर रहे हैं। वो अब्दुल्लाह इब्न सबा की तरह हैं, उस मलऊन यहूदी का, जो नबी ﷺ के बाद सहाबा के दरमियान फ़ित्ना फैलाकर उम्मत को तोड़ना चाहता था; और क़ारून की तरह, फ़िरऔन के ज़माने के उस बख़ील, सरकश और काफ़िर का, जो अपनी दौलत और इल्म की ग़ुरूर में अल्लाह के अहकामात को हक़ीर समझता था और क़ौम को गुमराह करने की साज़िश रचता था। ऐ तुम इन शैतानी एजेंट्सो! तुम्हारी ये "प्रोग्रेसिव वैल्यूज़" तो शैतान की वैल्यूज़ हैं – तुम मलऊन हो, तुम्हारी ज़बान पर लानत हो, तुम्हारी साज़िशें अल्लाह की तरफ़ से मरदूद हैं! तुम जहन्नम के ईंधन बनोगे, जहाँ तुम्हारी फ़ुह्श की आग तुम्हें जला देगी। अल्लाह तुम्हें तबाह करे, तुम जैसे फ़ासिद अनासिर को जो दीन को अपनी बेहयाई की ख़ाद बनाना चाहते हो!
ऐ मुसलमानो! सुनो अल्लाह का कलाम, जो हर दौर के लिए मुकम्मल और अबदी है:
"الْيَوْمَ أَكْمَلْتُ لَكُمْ دِينَكُمْ وَأَتْمَمْتُ عَلَيْكُمْ نِعْمَتِي وَرَضِيتُ لَكُمُ الْإِسْلَامَ دِينًا" (सूरह अल-माइदा: ३)
यानी "आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मुकम्मल कर दिया और तुम पर अपनी नेअमत तमाम कर दी और तुम्हारे लिए इस्लाम को बतौर दीन पसंद कर लिया।"
ये आयत एलान करती है कि इस्लाम कोई नामुकम्मल चीज़ नहीं, बल्कि सबसे ज़्यादा लिबरल, सेक्युलर और मॉडर्न दीन है – वो दीन जो हर ज़माने के लिए फ़िट है, जिसे वक़्त-ब-वक़्त एडिट करने, कस्टम करने की कोई ज़रूरत नहीं। दूसरे मज़ाहिब तो इंसानी हाथों से मस्ख़ हो गए, उन्हें बार-बार तब्दील करना पड़ा – ईसाइयत को काउंसिल ऑफ़ नाइसीया में तब्दील किया गया, यहूदियत की तलमूद में इज़ाफ़े किए गए, हिंदू मत के वेदों को मुख़्तलिफ़ रिवायात में तोड़-मरोड़ा गया – मगर इस्लाम? अल्लाह का महफ़ूज़ कलाम: **"إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ"** (सूरह अल-हिज्र: ९) – "हमने ही इस ज़िक्र (क़ुरआन) को नाज़िल किया है और हम ही इसके हाफ़िज़ हैं।"
इस्लाम ही वो दीन है जो औरत को विरासत, तलाक़ और तालीम का हक़ देता है जब दूसरे मज़ाहिब उसे ग़ुलाम समझते थे; जो ग़ुलामों को आज़ादी का दर्स देता है; जो इंसाफ़ और मुसावात का एलान करता है बग़ैर किसी नस्लपरस्ती के। ये सबसे मॉडर्न है, क्योंकि ये अल्लाह का है – न इंसानी ग़लतियों का शिकार, न ज़माने की ग़ुलामी का।
मगर ये शैतानी एजेंट्स क्या चाहते हैं? लिबरलिज़्म, सेक्युलरिज़्म, मॉडर्निज़्म का नाम लेकर वो फ़ुह्श चाहते हैं – बेहयाई, बेशर्मी, हमजिंसपरस्ती की तरवीज, ख़ानदान के निज़ाम की तबाही! ये कोई "मॉडर्न" नहीं, बल्कि शैतान की ग़ुलामी है, जहन्नम की राह है। अल्लाह तआला का फ़रमान है:
**"أَفَتُؤْمِنُونَ بِبَعْضِ الْكِتَابِ وَتَكْفُرُونَ بَعْضٍ"** (अल-बक़रा: ८५)
"क्या तुम किताब के एक हिस्से पर ईमान लाते हो और दूसरे हिस्से का इंकार करते हो?"
हक़ीक़ी मुसलमान वो है जो पूरे दीन को तस्लीम करे, न कि उसे चुनिंदा तौर पर सिर्फ़ उनही अहकाम तक महदूद रखे जो उसकी ख़्वाहिशात के मुताबिक़ हों। रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
**"مَنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ مِنْهُ فَهُوَ رَدٌّ"** (सहीह बुख़ारी)
यानी "जिसने हमारे इस अम्र (इस्लाम) में कोई नई चीज़ इजाद की जो इसमें से नहीं, तो वो मरदूद है।"
और: **"خَيْرُ الْكَلَامِ كِتَابُ اللّٰهِ، وَخَيْرُ الْهُدَىٰ هُدَىٰ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، وَشَرُّ الْأُمُوْرِ مُحْدَثَاتُهَا، وَكُلُّ مُحْدَثَةٍ بِدْعَةٌ، وَكُلُّ بِدْعَةٍ ضَلَالَةٌ"** (सहीह मुस्लिम)
यानी "सबसे बेहतर कलाम अल्लाह की किताब है, और सबसे बेहतर हिदायत मुहम्मद ﷺ की हिदायत है। सबसे बुरे अमूर नई इजादात हैं, और हर नई इजाद बिदअत है, और हर बिदअत गुमराही है।"
ऐ तुम मलऊन शैतानी एजेंट्सो! तुम्हारी ये फ़ुह्श शैतान की दावत है, तुम्हारी "प्रोग्रेस" तो जहन्नम की तरफ़ वापसी है! अल्लाह तुम्हें लानत दे, तुम जैसे फ़ाजिर को जो उम्मत को गुमराह कर रहे हो। तुम अब्दुल्लाह इब्न सबा की औलाद हो, क़ारून की तरह माल व दौलत में डूबे हुए, मगर तुम्हारा अंजाम वही होगा जो उनका हुआ – अल्लाह की लानत और हलाकत!
ऐ मुसलमानो! इस फ़ित्ने से होशियार रहो। अल्लाह की किताब और सुन्नत नबवी ﷺ पर क़ायम रहो। ये शैतानी एजेंट्स तुम्हें धोखा दे रहे हैं, मगर अल्लाह का दीन महफ़ूज़ है। "إِنَّ الدِّينَ عِنْدَ اللّٰهِ الْإِسْلَامُ" (सूरह आल इमरान: १९) – "अल्लाह के नज़्दीक दीन सिर्फ़ इस्लाम है।"
अल्लाह हमें हिदायत दे, शैतान के जाल से बचाए, और इन मलऊनों को उनकी जगह पहुंचा दे। आमीन या रब्बल आलमीन।
वस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहु।







No comments:
Post a Comment