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Iran Protests and Europe’s Conspiracy: Geopolitics & Social Media War.

 Western Leaders’ Statements: USA, Europe, and Israel

 Europe’s Conspiracy Against Iran – Global Geopolitical Equations.
Starlink and the Information War in Iran.
ईरान में विरोध: क्या यह जन आक्रोश है या विदेशी साजिश.
स्टारलिंक और सोशल मीडिया: ईरान में सूचना युद्ध का नया अध्याय.
ईरान में जारी मौजूदा अशांति और इसके पीछे छिपे वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों पर आधारित विश्लेषण.
विरोध का वैश्विक असर, ईरान की अशांति, अंतरराष्ट्रीय नेताओं , यूरोप की साज़िश
ईरान की सड़कों से यूरोप की रणनीति तक – विरोध का वैश्विक असर.
ईरान में जारी मौजूदा अशांति और इसमें विदेशी शक्तियों की संलिप्तता को समझने के लिए जनवरी 2026 के शुरुआती दिनों की घटनाओं और बयानों का सिलसिला बेहद अहम है। यह टाइमलाइन स्पष्ट करती है कि कैसे अमेरिका और इसराइल के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम को एक सोची-समझी रणनीति के तहत आगे बढ़ाया है।

आज के दौर में किसी देश को अस्थिर करने के लिए केवल सेना की ज़रूरत नहीं होती, बल्कि एनजीओ (NGO),  ज़र खरिद बुद्धिजीवी और मीडिया विंग्स का एक पूरा तंत्र इस्तेमाल किया जाता है । जब कोई हुकूमत अमेरिका या पश्चिमी देशों की शर्तों पर नहीं चलती, तो ये संगठन अचानक सक्रिय होकर सड़कों पर उतर आते हैं । ईरान में मौजूदा तनाव इसी रणनीति का हिस्सा नज़र आता है, जहाँ जून 2025 में इसराइल के साथ हुए युद्ध और अमेरिका द्वारा परमाणु ठिकानों पर की गई बमबारी के बाद स्थिति को और भड़काया जा रहा है ।

 ईरान में अशांति: जन-आक्रोश या सुनियोजित वैश्विक साजिश?
ईरान की सड़कों पर जारी विरोध प्रदर्शनों ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है, लेकिन इस हलचल के पीछे सिर्फ स्थानीय मुद्दे नहीं, बल्कि एक जटिल अंतरराष्ट्रीय बिसात बिछी हुई नज़र आती है।
 तेहरान में एक अकेले प्रदर्शनकारी के वीडियो का तुरंत पुलिस द्वारा काउंटर-वीडियो जारी करना और यह दावा करना कि यह 'प्लांटेड' था, इस बात की ओर इशारा करता है कि सूचना युद्ध (Information War) अब चरम पर है। 
 जहाँ एक ओर प्रदर्शनकारी सड़क पर हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका, इसराइल और यूरोपीय देशों का इस आग में घी डालने का तरीका इसे एक खतरनाक मोड़ दे रहा है ।

 पश्चिमी फंडिंग और एनजीओ का सक्रिय नेटवर्क.
दुनियाभर में जब भी कोई सरकार अमेरिकी या पश्चिमी हितों के खिलाफ खड़ी होती है, तो वहां अक्सर यूरोपीय देशों और अमेरिका की फंडिंग पर पल रहे एनजीओ, मानवाधिकार कार्यकर्ता और मीडिया विंग्स सक्रिय हो जाते हैं। 
ये समूह 'लोकतंत्र' और 'आजादी' के नाम पर जनता को लामबंद करते हैं, जबकि इनका असली मकसद सत्ता परिवर्तन (Regime Change) होता है. ईरान में भी यही पैटर्न देखा जा रहा है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स और सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स के जरिए एक ही समय पर पूरी दुनिया में ईरान विरोधी नैरेटिव फैलाया जा रहा है, ताकि वहां की सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग किया जा सके।

 इसराइल का डर और परमाणु शक्ति का संघर्ष.
इसराइल के लिए एक मज़बूत और परमाणु संपन्न ईरान उसके क्षेत्रीय वर्चस्व के लिए सबसे बड़ा खतरा है। जून 2025 में हुए युद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर की गई बमबारी इसी रणनीति का हिस्सा थी कि ईरान को कभी भी निर्णायक रूप से शक्तिशाली न होने दिया जाए। 
   इसराइल की खुफिया एजेंसियां और मीडिया लगातार यह संदेश फैला रहे हैं कि ईरान की सैन्य ताकत को भीतर से ही तोड़ना ज़रूरी है. यही कारण है कि माइक पोम्पियो जैसे नेता खुलेआम प्रदर्शनकारियों के बीच 'मोसाद' की मौजूदगी की बात स्वीकार कर रहे हैं, जो ईरान की संप्रभुता पर सीधा हमला है।

 ट्रंप की चेतावनी और मनोवैज्ञानिक युद्ध.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 2 और 4 जनवरी 2026 को दी गई चेतावनियां महज कूटनीति नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा हैं.
 यह कहना कि अमेरिका 'पूरी तरह तैयार' (Locked and Loaded) है, सीधे तौर पर ईरानी सुरक्षा बलों को डराने और प्रदर्शनकारियों के भीतर हिंसक प्रवृत्तियों को बढ़ावा देने का प्रयास है। यह वही तरीका है जो अमेरिका ने पहले वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के साथ अपनाया था, जहाँ एक समानांतर सरकार को मान्यता देकर देश को गृहयुद्ध की कगार पर खड़ा कर दिया गया।

 नैरेटिव वॉर: मीडिया और सोशल मीडिया का हथियार.
 ईरानी अधिकारियों ने देशव्यापी इंटरनेट पाबंदी नहीं लगाई है, जिससे एक दिलचस्प स्थिति पैदा हो गई है। अमेरिका और इसराइल के सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट्स, विशेष रूप से फ़ारसी भाषा में, प्रदर्शनों के समर्थन में दिन-रात सामग्री साझा कर रहे हैं। यह डिजिटल दखलंदाजी कुछ प्रदर्शनकारियों का हौसला तो बढ़ाती है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर देती है कि इस आंदोलन की डोर कहीं न कहीं विदेशी हाथों में है।
 ईरानी सेना का अलर्ट पर होना और बाहरी हस्तक्षेप के प्रति सख्त रुख अपनाना यह दर्शाता है कि यह लड़ाई अब केवल सड़कों पर नहीं, बल्कि वैश्विक मंचों पर अपनी पहचान और अस्तित्व बचाने की है.

जनवरी 2026: ईरान विरोधी बयानों और हस्तक्षेप की टाइमलाइन.

1 जनवरी 2026: इसराइली मीडिया और रक्षा विश्लेषकों ने रिपोर्ट करना शुरू किया कि ईरान के भीतर "बदलाव का समय" आ गया है। इसी दिन इसराइली अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर फ़ारसी भाषा में ईरानी जनता को संबोधित करते हुए सीधे संदेश भेजने शुरू किए, जो मनोवैज्ञानिक युद्ध की शुरुआत थी.

2 जनवरी 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पहली बड़ी चेतावनी जारी की। 
उन्होंने सोशल मीडिया और आधिकारिक ब्रीफिंग में कहा कि यदि ईरानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया, तो अमेरिका "मदद के लिए दखल" देने को पूरी तरह तैयार है। उन्होंने ईरान को आगाह किया कि पूरी दुनिया देख रही है।

2 जनवरी 2026 (शाम): अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने एक बेहद विवादित बयान दिया। उन्होंने सड़कों पर उतरे ईरानियों को नए साल की बधाई देते हुए ट्वीट किया कि "उनके साथ हर मोसाद एजेंट भी चल रहा है"। यह बयान सीधे तौर पर ईरान के भीतर इसराइली खुफिया एजेंसी की सक्रिय मौजूदगी की पुष्टि करने जैसा था.

4 जनवरी 2026: राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी चेतावनी को और कड़ा करते हुए दोहराया कि अमेरिका 'पूरी तरह तैयार' (Locked and Loaded) है। इसी दिन यूरोपीय संघ (EU) के कुछ प्रमुख नेताओं ने भी बयान जारी कर ईरान पर प्रतिबंधों की धमकी दी, जिससे एक साथ वैश्विक दबाव बनाने की कोशिश की गई।

7-8 जनवरी 2026: इसराइली (Occupied Palestine) प्रधानमंत्री कार्यालय और मीडिया विंग्स ने ईरान के भीतर हो रही झड़पों के वीडियो को वैश्विक स्तर पर वायरल करना शुरू किया.
 अमेरिकी विदेश विभाग के फ़ारसी अकाउंट्स ने प्रदर्शनकारियों को संगठित होने के तरीके और "विदेशी समर्थन" का भरोसा दिलाना जारी रखा।

9 जनवरी 2026: ईरान के सर्वोच्च नेता और शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर आरोप लगाया कि यह अशांति अमेरिका और इसराइल द्वारा प्रायोजित है और देश की सेना किसी भी बाहरी उकसावे का जवाब देने के लिए हाई अलर्ट पर है। एलन मस्क ने ईरान के ऊपर स्टारलिंक सक्रिय करने का संकेत दिया, यह कदम न केवल तकनीकी बल्कि राजनीतिक हस्तक्षेप भी है.

ट्विटर (अब X), इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म विदेशि नर्रेटिव की आवाज़ को वैश्विक स्तर पर पहुंचा रहे हैं। इससे ईरान की आंतरिक समस्या एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन गई है। स्टारलिंक और सोशल मीडिया ने इस संघर्ष को सूचना युद्ध का नया आयाम दिया है, जिससे यह लड़ाई सड़कों से निकलकर डिजिटल स्पेस तक फैल गई है।
इसराइल और अमेरिका का साझा उद्देश्य.
यह टाइमलाइन दर्शाती है कि जून 2025 में ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी बमबारी के बाद से ही इसराइल और अमेरिका का एक ही लक्ष्य रहा है—ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमता को भीतर से अस्थिर करके खत्म करना।
 माइक पोम्पियो का मोसाद वाला बयान और ट्रंप की लगातार धमकियां यह साबित करती हैं कि ये प्रदर्शन महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि इसराइल द्वारा समर्थित एक गहरी भू-राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं। 
पश्चिमी मीडिया और यूरोपीय नेताओं का एक सुर में बोलना इस 'नैरेटिव वॉर' को और मजबूती देता है, जिसका अंतिम उद्देश्य क्षेत्र में ईरान के प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करना है।

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