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Social Media Ka Istemal Karne wali Deen dar Ladkiyaan (Girls) Jo Inbox me kisi Na Mehram se Bat nahi karti.

Waisi Ladkiyaan (Girls) jo Social Media par Non Mehram se bat nahi karti hai inbox me.

Kya Social Media Istemal Karne wali Sari ladkiyaan Be haya hi hoti hai?

Social Media ka sahi istemal kaise kare?

Social Media par Kisi ladke ke messages ko dekh kar kya karna chahiye?

Na Mehram se Social Media par Inbox me chat karna.

Social Media  Joine karne ka ek behan ka waqya.

Social Media Par ladke aur Ladkiyo ka Chat karne ke bare me Islam kya kahta hai?

میں نا محرم سے بات نہیں کرتی۔۔۔!!!

I don't talk to Non Mahram.

اگر ایک دین پر چلنے والی لڑکی یہ کہے کہ میں نامحرم سے ان باکس میں بات نہیں کرتی۔۔۔تو اسے یہ طعنہ دے دیا جاتا ہے کہ اگر تم ایسا سوچتی ہو تو سوشل میڈیا یوز کیوں کرتی ہو؟؟؟؟

پہلی بات سوشل میڈیا کا اچھا یا برا استعمال ہمارے اپنے ہاتھ میں ہے.

دوسری بات دین پر عمل کرنے والی لڑکی کو کیا سمجھ رکھا ہے آپ نے۔۔۔۔؟

کہ کیا وہ جنگلوں سے آئی ہوئی کوئی مخلوق ہے؟؟

اگر اللہ کے حکم پر عمل کرتی ہے تو بس اب جنگل میں جا کہ اپنی ایک دنیا بسا لے اس لڑکی کوئی حق نہیں کہ یہ دنیا میں گھومے یا لوگوں سے رابطے میں رہے۔۔۔۔
Seriously......????

اللہ کے حکم پر عمل کرنے والی زندگی کو بھرپور طریقے سے انجوائے کرتی ہے مگر اللہ سبحان وتعالی کی بتائی ہوئی حدود کے اندر رہ کر۔۔۔۔۔۔اسے اچھائی اور برائی کا فرق پتہ ہوتا ہے۔۔۔۔۔ان ایپس کے اچھے اور برے استعمال کا پتہ ہوتا ہے۔۔۔۔۔۔۔۔!!!!

آپ حق نہیں رکھتے کہ اللہ کے حکم پر چلنے والی لڑکی کو بڑے آرام سے اُٹھ کر یہ فتوی دے دیں کہ تم سوشل میڈیا یوز نہیں کر سکتی!!!

آپ سوشل میڈیا کا استمعال کر سکتی ہیں اسلام کی پیاری شہزادی!!!!

اسے استعمال کریں اپنے رب کا دین پھیلانے کے لیے

اسے استعمال کریں لوگوں کو اللہ کے قریب لانے کے لیے
اس کا استعمال ضرور کریں اپنے اللہ کی محبت کی آگاہی کے لیے۔

رب نے سود سے روکا ھم نی بینک بنالیۓ

رب نے زنا سے روکا ھم نے کلب بنالیۓ

رب نے پردے کا حکم دیا ھم نے ٹی وی اور ڈش خرید کر بے حیاۂی کو عام کر دیا ۔۔۔

رب نے کہا قرآن میں تمھاری کامیابی ہے اور ھم نی آکسفورڈ کی کتابوں کو کامیابی بنا لیا .

ذرا سوچئے آج مسلمان اس وجہ سے پریشان ہیں جس کو راضی کرنا تھا اس کو ناراض کر دیا  تو پھر رحمت کیسی ؟
نیکی کی دعوت عام کرو .

اللہ تعالیٰ عمل کی توفیق عطا فرمائے آمین ثم آمین

جزاکم اللہ خیرا کثیرا

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AI aur Fake IDs: Digital Duniya ka Naya Dhoka.

Khabar ya Conspiracy? Social media ki Andheri Duniya.

Social Media Web: Truth or Conspiracy?
AI and Fake IDs: The New Era of Digital Deception.
Trolling, Fake News & Lies: The Dark Side of Social Media.
The Rise of AI-Driven Fake News on Social Media.
Is It News or Just a Conspiracy? Social Media Exposed.
फेक आईडी, ट्रोलिंग और झूठी खबरें: सोशल मीडिया का नया अंधेरा सच.
AI के ज़रिए फैलती फेक न्यूज़: क्या हम डिजिटल धोखे में जी रहे हैं?.
ट्रोलिंग और फेक आईडी: डिजिटल धोखे की असली कहानी. 📱
सोशल मीडिया आज सिर्फ़ कनेक्शन का ज़रिया नहीं रहा, बल्कि गलत जानकारी, फेक आईडी और ट्रोलिंग का अड्डा बन चुका है। AI के नए दौर में झूठी खबरें और साजिशें पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से फैल रही हैं। जानिए कैसे डिजिटल दुनिया का यह मायाजाल हमारी सोच और समाज को प्रभावित कर रहा है।
सोशल मीडिया फेक न्यूज़, AI से झूठी खबरें, डिजिटल धोखा, ट्रोलिंग और फेक आईडी,
सोशल मीडिया की साजिश: खबरें असली हैं या सिर्फ़ झूठ का खेल?
📱 क्या आप भी सोशल मीडिया की हर खबर को सच मान लेते हैं? सावधान! एआई और फेक न्यूज़ के इस दौर में आपका एक 'शेयर' किसी की जिंदगी तबाह कर सकता है। जानिए कैसे बचें इस डिजिटल जाल से और बनें एक जिम्मेदार यूजर। 

 सोशल मीडिया का मायाजाल: खबर सच है या महज एक साजिश?

आज के डिजिटल युग में जानकारी की कमी नहीं है, बल्कि जानकारी का 'विस्फोट' हो गया है। हर हाथ में मौजूद स्मार्टफोन ने हमें सूचनाओं के सागर में तो धकेल दिया है, लेकिन क्या हम उस सागर में तैरना जानते हैं? अक्सर हम बिना सोचे-समझे बहती गंगा में हाथ धो लेते हैं और अनजाने में झूठ के प्रचारक बन जाते हैं।

 हर कोई पत्रकार, हर कोई न्यायाधीश

आज के दौर में हर व्यक्ति खुद को एक पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और जज समझने लगा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने हमें आजादी तो दी, लेकिन उसके साथ जो जिम्मेदारी आनी चाहिए थी, वह कहीं पीछे छूट गई है। जैसे ही स्क्रीन पर कोई सनसनीखेज हेडलाइन चमकती है, हमारे अंगूठे 'शेयर' बटन की ओर दौड़ने लगते हैं। हम यह भूल जाते हैं कि हमारे एक क्लिक का प्रभाव हजारों लोगों की सोच और समाज की शांति पर पड़ सकता है।

 एआई (AI) का खतरा: सच और झूठ का धुंध..

अब मसला सिर्फ मामुलि झूठ तक सीमित नहीं रही। 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' ने इस धुंध को और गहरा कर दिया है। आज डीप-फेक वीडियो, किसी की भी आवाज में फर्जी ऑडियो और हूबहू असली दिखने वाली एडिटेड तस्वीरें बनाना बच्चों का खेल हो गया है। एक आम आदमी के लिए यह पहचानना तकरिबन नामुमकिन हो गया है कि जो वह देख या सुन रहा है, वह हकीकत है या कंप्यूटर द्वारा तैयार किया गया एक फरेब।

 जल्दबाजी का अंजाम: जब जज्बात भारी पड़ जाएं.
हमारा सबसे बड़ा दोष 'त्वरित प्रतिक्रिया' (Instant Reaction) है। बिना खबर के स्रोत की जांच किए, बिना उसका पिछला संदर्भ जाने, हम तुरंत अपनी राय दे देते हैं। यह जज़बाति उबाल कभी किसी की व्यक्तिगत इज़्ज़त को ठेस पहुंचाता है, तो कभी दो समुदायों के बीच नफरत की दीवार खड़ी कर देता है। याद रखिए, सोशल मीडिया पर डाली गई गलत जानकारी एक ऐसी आग है जिसे बुझाना नामुमकिन नहीं तो मुश्किल जरूर है। बाद में दी गई सफाई उस ज़ख्म को नहीं भर सकती जो आपकी एक गलत पोस्ट ने दिया है।

हल क्या है? प्रतिक्रिया से पहले 'विराम' (Pause)
इस डिजिटल अराजकता और बदहालि  से बचने का एक हि रास्ता है—'सब्र'। अक़लमंदि इसी में है कि हर चमकती चीज को सच न माना जाए। 

स्रोत की पहचान: देखें कि खबर किसी प्रतिष्ठित संस्थान की है या किसी अज्ञात हैंडल की।
विविध सत्यापन: एक ही खबर को दो-तीन अलग-अलग विश्वसनीय स्रोतों पर क्रॉस-चेक करें।
परिणाम का विचार:खुद से पूछें, अगर यह खबर गलत निकली तो मेरे कमेंट या शेयर से क्या नुकसान हो सकता है?

खामोशी की ताकत.
हर मुद्दे पर बोलना अनिवार्य नहीं है। सोशल मीडिया के इस शोर-शराबे वाले दौर में चुप रहना कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता की निशानी है। जब तक आप किसी बात को लेकर 100% आश्वस्त न हों, तब तक अपनी जुबान या कीबोर्ड को आराम दें। सोच-समझकर बोलना और तथ्यों के साथ खड़े होना ही आपको एक जिम्मेदार नागरिक बनाता है।
 #DigitalAwareness #StopFakeNews #SocialMediaResponsibility #AIWorld

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Miya Biwi Ke Rishte Me Social Media Ban Raha Diwaar.

 जब सोशल मीडिया रिश्तों में दूरी पैदा कर दे.

Why Women Drift Away from Husbands Due to Social Media?
Digital Distractions and Emotional Distance in Marriage.
Women ignoring husband because of social media.
How Online Influence Weakens Marital Bonds.
Emotional distance in marriage social media.
Social media addiction and family life.
Wife distant due to social media.
औरत सोशल मीडिया से मुताशिर हो कर अपने शौहर से दूर हो रही है. क्या आपने कभी सोचा?
वक़्त की सबसे बड़ी हकीकत – सोशल मीडिया मोहब्बत को कमज़ोर कर रहा है…
#सोशल_मीडिया_की_हकीक़त #औरत_और_शौहर #शुक्रगुज़ारी_की_ताक़त #रिश्तों_की_इस्लाह #ख़ानदान_ज़िंदगी #मोहब्बत_की_हकीक़त #उर्दू_शायरी #ज़िंदगी_के_सबक #ट्रेंडिंग_उर्दू #फ़ैमिली_लाइफ #इस्लामी_इस्लाह
सोशल मीडिया का असर: औरत अपने शौहर से क्यों दूर हो रही है?
आज की खवातीन सोशल मीडिया की चमक-दमक से इतनी मुताशिर हो चुकी है कि उनका दिल अब अपने शौहर की मोहब्बत में पहले जैसा सुकून नहीं ढूंढता। लाइक्स और फॉलोअर्स की दुनिया ने रिश्तों की गर्माहट को ठंडा कर दिया है। ये हकीकत सिर्फ एक घर की नहीं, बल्कि आज के दौर का सबसे बड़ा इम्तिहान है – जब वर्चुअल दुनिया असली मोहब्बत पर भारी पड़ने लगे।

आज की दुनिया में औरत के पास हर चीज़ मौजूद है—घर की आसिश, शौहर की मोहब्बत, बच्चों की हंसी, और वो सहुलियते जो कल की नस्लों ने ख्वाब भी न देखे थे। फिर भी दिल में एक ख़ला क्यों महसूस होता है?
 क्यों वो ख़ुशी की तलाश में सोशल मीडिया की चमक दमक की तरफ़ लपकती है? 
ये सवाल हर घर की दीवारों में गूंज रहा है, और जवाब छुपा है स्क्रीन की रौशनियों के पीछे।  

 सोशल मीडिया के ख़्वाब: हकीक़त से दूर की कहानियां

सोशल मीडिया एक जादुई दुनिया है जहां हर तस्वीर कामिल लगती है। हर जोड़ा हंसता मुस्कुराता दिखाई देता है, लग्ज़री कारों में घूमता है, और तोहफ़ों का पहाड़ मिलता है। औरत देखती है तो सोचती है, "मेरा शौहर तो ऐसा क्यों नहीं?" वो भूल जाती है कि ये सब कैमरे का खेल है—एक लम्हे की चमक, जो असल ज़िंदगी की जद्दोजहद को छुपा लेता है।  

हकीक़त में मोहब्बत लाइक्स और कमेंट्स से नहीं, दिल के एहसासात से बनती है। आपका शौहर जो रोज़ सुबह उठता है, घर की ज़िम्मेदारी उठाता है, आपकी मुस्कुराहट के लिए मेहनत करता है—वो आपकी सबसे बड़ी नेमत है। लेकिन सोशल मीडिया के झूठे ख़्वाबों ने उसे इम्तिहान बना दिया है।  

 शुक्र छोड़ने का नतीजा: रिश्ते की कमज़ोरी

जब औरत शुक्र की जगह़ तक़ाबुल ले आती है, तो रिश्ता कमज़ोर पड़ने लगता है। हर दिन नई शिकायत—"ये तो ऐसा नहीं करता, वो तो ऐसा करता है!" मांगें बढ़ती जाती हैं, मोहब्बत बोझ बन जाती है। शौहर सोचता है, "मैं तो ख़ुशी के लिए जीता हूं, फिर ये इम्तिहान क्यों?"  

याद रखें, अल्लाह ने हमें शुक्रगुज़ारी सिखाई है। क़ुरान में है कि शुक्र करने वालों के लिए नेमतें बढ़ाई जाती हैं। सोशल मीडिया का जोड़ा शायद कैमरे के सामने खुश हो, मगर पीछे रो रहा हो। आपका घर, आपका शौहर—ये अल्लाह की दी हुई हकीक़त है, इसे शुक्र से संवारें।  

असली मोहब्बत का राज़: इज़्ज़त और नरमी.

इस्लाह की बात करें तो औरत जब अपने शौहर का इज़्ज़त करे,उसकी मेहनत को सराहे, तो घर जन्नत बन जाता है। सोशल मीडिया को देखें मगर उस पर न जिएं। अपनी ज़िंदगी को अपनी आंखों से देखें—वो छोटे लम्हे जहां शौहर थका घर आता है और आपकी एक मुस्कुराहट से सुकून पा लेता है।  

ज़िंदगी तब हसिन हो जाती है जब तक़ाबुल ख़त्म हो और शुक्र शुरू हो। शौहर से मोहब्बत करें, उसे अपना हीरो बनाएं। देखें कैसे वो और भी मेहनत करेगा, घर की फ़िज़ा बदल जाएगी, और रिश्ता मज़बूत हो जाएगा। औरत बदले तो सब बदल जाता है.
 आज से तबदीली का एहद: घर को जन्नत बनाएं

आइए, आज से शुक्र का अहद करें। सोशल मीडिया को वक़्त दें मगर हकीक़त को तरजीह दें। शौहर को बताएं कि वो आपकी दुनिया है। छोटी छोटी खुशिया मनाएं, नरमी से बात करें। फिर देखें अल्लाह कैसे बरकत देगा। ये न सिर्फ़ रिश्ता बचाएगा बल्कि आपका दिल भी सुकून पाएगा।  
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Na Mehram Se Baat Karna Modern Amal. Behyayi ka Khatma Muslim Muashare se.

Be-Hyayi ka Khatma Muslim Muashare Se.

Na-Mehram se Baat karna Zadid daur ka Sabse bada Fashion wala Amal.

Parda aur Hijab. Na Mehram se chating, Tiktok Social media par be pardagi, Islamic Parda aur Muslim Muashara.

           موضوع     نامحرم

تحریر محمد وقاص نقشبندی #الحیاء_من_الایمان____بےحیائی_کا خاتمہ

جب عورت کسی نامحرم کی محبت میں الجھ جاتی ہے ۔ تو وہ دو ٹکے کی ہو جاتی ہے —جو محبتیں اللہ کی حدود توڑ کر کی جاتی ہیں—وہ محبتیں نہیں ہے نفسیاتی خواہشات کی تسکین اور ہوس ہے —عورت بڑی قیمتی شے ہے یہ کوئی وقت گذاری کھیلونا نہیں جو مردوں کا دل بہلاتی رہے—جب عورت خود کو خود پیش کر دے وہ عورت نہیں رہتی —عورت کا نام ہی حیاء ہے ۔ جب حیاء ہی چھوڑ دے تو باقی بچا کیا-
اللہ نے تو عورت کو بہت ہی اونچا مقام دیا ہے—اج کی عورتوں نے خود ہی خود کو نیچا کر دیا ہے _!!
حدیں جو تم کو قید لگتی ہیں-

اے بنتِ حوا یہ تمہاری محافظ ہیں
کسی نامحرم کی محبت میں گمراہ ہو کر اللہ سے شکوہ مت کرو _!! جس چیز کی اسلام اجازت نہیں دیتا میری گڑیا تو وہ کیسے کر سکتی ہو کیا آپ جہنم کی آگ برداشت کر لوں گی ہم سے تو دنیا کی دوپ برداشت نہیں ہوتی تو جہنم کی آگ کیسے برداشت کریں گے اللہ تعالیٰ ہم سب کو بے حیائی جیسے بلا سے محفوظ فرمائے
جس رشتے میں اسلام کی گنجائش نہیں
اس میں برکت کیسے ہو سکتی ہے —!
امت محمدی کی ہر بیٹی کے نام پیغام .

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Facebook par Muslim khawateen ka Gair Mehram ko Mutashir karne wale Posts.

Muslim Ladkiyo ka Social Media par Gair Mehram ko mutashir karne wale paigamat.

Khawateen aaj kal Social Media par kaise kaise post kar rahi hai Deen ke nam par.
How Muslim girls should use social media wisely?
Islamic guidelines for social media use.
Smart Social Media Habits for Muslim Girls.
Digital Dignity: Social Media Tips for Muslim Women.
Social media par Blackmail ki sajish: Khawateen Hoshiyar rahe.
Risks Muslim Girls Face Online,Muslim Women,Islamic Lifestyle, Empowerment, Online Harassment, Balancing Faith and Technology
Faith & Filters: A Muslim Girl’s Guide to Social Media.

    پیاری بہنوں !! اس پہلو پر کئی صفحات سیاہ کرنا آسان ہے ، لیکن اس سیاہی سے میری بہنوں کے دل سیاہ نا ہوجائیں اس لیے اپنی تحریر کے اصل مقصد پر آتی ہوں ۔

میں جب جب نیوز فیڈ میں داخل ہوتی ہوں اپنی بہنوں کی بے فائدہ اور وقت گزاری پر مبنی ، بلکہ یوں کہیے کہ مجمع کو دعوتِ کمنٹ کا مقصد رکھتی پوسٹس دیکھتی ہوں تو غم و غصہ کے ملے جلے رجحان کا شکار ہوجاتی ہوں ۔

کیا آپ لوگ اپنی بیماریاں ، افسانوی باتیں ، عشقیہ یا بے مقصد شاعری ، طنز و مزح ، ذاتی معاملات اور باہمی نوک جھونک شئیر کر کے اپنا اور دوسرے لوگوں کا وقت ضائع نہیں کر رہیں ؟؟

کسی بہن کو کچھ نہیں سوجھتا تو وہ دعا کی اہمیت کے بارے میں چند الفاظ لکھ کر اسٹیٹس ڈالتی ہے کہ آج میرے لیے کوئی دعا کریں ، اور اس کی پکار پر ہمارے مسلمان بھائی فورًا لبیک کہہ کر توحید و سنت پر مبنی شئیرنگ کو پھلانگتے ہوئے کمنٹ باکس کی طرف دوڑ لگا دیتے ہیں ۔
کچھ بہنیں اپنی طبیعت کی ناسازی کو مخلوط فرینڈز کے سامنے رکھتے ہوئے ذرا نہیں جھجکتیں ،

عورت غیر مردوں کو اپنی طبیعت کی ناسازی کی اطلاع دے ، ایمانداری سے بتائیے کہ اس نوعیت کے اسٹیٹس عورت کی حساس حالتوں کی طرف نامحرم مردوں کو توجہ دلانے کی دعوت نہیں رہے ؟

- آپ لوگوں کو بخار ہوا تو بخار کی حالت میں آپ اسٹیٹس ڈال رہی ہیں کہ آج بخار ہے دعا کیجیے ، طبیعت خراب ہے دعا کریں ، آج کچھ طبیعت اچھی محسوس نہیں ہو رہی دعا کریں ، دو دن سے بخار ہے دعا کریں ۔

اللہ کی نیک بندیوں !! معاشرے میں عورت کی طبیعت کی ناسازی کا ایک مخصوص تصور عام ہوتا ہے ، ان مخصوص طبی معاملات کا ڈنڈورا پیٹنا شریف عورتوں کا کام نہیں ہوتا ۔

دعا کرانے کا اصول یہی ہوتا ہے کہ نیک متقی پرہیزگار شخص سے دعا کروائی جائے جس کی دعا نیکی اور تقوی کے باعث قبول ہونے کا امکان زیادہ ہوتا ہے ، لیکن اگر آپ خود نیک بنیں اور ہر طرح کے گناہوں سے توبہ کرکے تقویٰ کا پیکر بن جائیں ۔ پھر کسی سے دعا کی درخواست کرنے کی ضرورت نہیں پڑے گی ۔

ستم ظریفی یہ کہ آپ ہر ایرے غیرے نامحرموں کو دعا کے لیے جمع کر رہی ہیں ، کیا ہماری صحابیات کے یہی طور طریقے تھے ؟
- کوئی بہن اپنی ہر پوسٹ پر مجمع لگا کر بھی تشنہ لب ہے اور پوسٹ پر للکار رہی ہے کہ وہ لوگ سامنے آئیں جو میری پوسٹ پر نہیں آتے ۔ اور مرد حضرات کی اکثریت پر مبنی سب لوگ اس مقدس محفل میں حاضری لگوا کر شرفِ اجر و ثواب حاصل کر رہے ہیں ۔
- بہنیں ایک دوسرے کو یوذرز کی لسٹس میں ایڈ کروانے کے لیے اسٹیٹس دے رہی ہیں کہ فلاں بہن کو ایڈ کر لیں اور فلاں بہن کو ایڈ کر لیں ، جو عجیب بھی ہے اور غریب بھی اور سمجھ میں نا آنے والی بات ہے ، جبکہ ہم سب جانتے ہیں کہ فیس بک پر شہوت پرست مرد حضرات کی کثرت ہے ، کیا یہ اس بات کے مترادف نہیں کہ آپ کسی مجمع میں اپنی بہن کو پیش کریں کہ میری بہن سے دوستی کیجیے ؟؟؟

- کچھ بہنیں مخالف طبقہ فکر کو للکارنا ہی دین کی خدمت سمجھتی ہیں ، آگ لگاتے جملوں سے باطل کا رد نہیں کیا جاتا ، اس قسم کے طنزیہ نعروں اور اشتعال آمیز اسٹیٹس شئیر کرتے ہوئے بھول جاتی ہیں کہ فیس بک پر زبانیں کتنی دراز ، غلیظ اور نشتر ہوتی ہیں اور اس پلیٹ فارم پر مخالف فرقے کے مرد حضرات کس حد تک تعصبی ذہن رکھتے ہیں جو اہل حدیث عورت کے تقدس کو اچھالنے میں ذرا تامل نہیں کرتے ۔
باطل کا رد دینی تعلیمات سے ہوتا ہے پیاری بہنوں ، چھانٹ چھانٹ کر مرچ مصالحہ لگے جملوں سے للکارنے میں آپ دین کی خدمت نہیں بلکہ اپنے آپ کو تیس مار خان ثابت کرنے کی کوشش کر رہی ہیں ، نیک راستے سے غیر منظم اور جھولدار کام بالکل اس قول کے مترادف ہیں کہ " کلمۃ حق أرید بھا باطل’’ (یہ ) کلمہ حق ہے لیکن ان کا ارادہ اس سے باطل ہے ۔
سیاست اور دین پر چٹپٹے اور مخالفین کو دعوتِ بحث دیتے جملے للکارنا دین کی خدمت نہیں بلکہ فتنہ انگیزی ہے ۔

السَّلاَمُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللهِ وَبَرَكَاتُهُ
: مسز انصاری
عورت کا معاشرے میں نصف حصہ ہے یہ ایک حقیقت ہے ، بلکہ اگر مکمل حصہ کہا جائے تو بھی غلط نہیں ، وہ اس طرح کہ نصف معاشرہ عورت ہے اور بقیہ نصف معاشرہ عورت کی آغوشِ تربیت میں پروان چڑھتا ہے ۔پس یہ حقیقت اس بات کو ناگزیر بناتی ہے کہ عورت نیک و صالح ، باشعور ، خشیت اللہ سے معمور اور متقی و پرہیزگار ہو تاکہ پورا معاشرہ صالح ہو جائے ۔

سوشل میڈیا پر عورت کے دینی کام کے جواز میں کوئی شبہ نہیں ، عہد نبوی ﷺ میں ہمیں ابلاغِ دین کے میدان میں مردوں کے ساتھ خواتین کی شرکت برملا نظر آتی ہے ۔

سیدہ عائشہ رضی اللہ عنہا جیسی عظیم فقیہہ اور مثالی خاتون کون ہوسکتی ہیں جنہوں نے مذہب واخلاق اور تقدس کے ساتھ مذہبی، علمی، سیاسی، معاشرتی، غرض گوناگوں فرائض انجام دیے ہوں ۔ عہدِ نبویﷺ کے اس شاندار دور میں خواتین نے انتھک کاوشوں ، قابلیت اور اپنی قیمتی کاوشوں کے ذریعہ نا صرف دینِ اسلام کی خدمت کی بلکہ تحریک اسلامی کو قوت بخشی اور اس کے غلبے اور توسیع میں نمایاں کردار ادا کیا ، مسلم خواتین کی نشاۃ ثانیہ اور بیداری انہی عظیم صحابیات کی تاریخ سے وابستہ ہے ۔
دراصل اسلام عورت کے اس روپ کو پسند کرتا ہے کہ امت مسلمہ کی خواتین ایسی ہوں کہ ان کے سامنے موت، قبر، حشر، کتاب، میزان، پل صراط کا تذکرہ ہوتو اللہ تعالیٰ کے خوف سے لرز اٹھیں ۔

اے کاش تجھے عہد نبھانا آئے
زندگی حامل قرآن بنانا آئے
دیدہ و دل کو مسلمان بنانا آئے
اپنی اولاد کو انسان بنانا آئے
اپنے ایمان کے پھولوں سے سجادے گھر بار
پھر دکھا فاطمہ زہرہ کا مثالی کردار

درج بالا مختصر تمہید کے بعد پیاری بہنوں سے عرض ہے کہ میری نصیحت کو اپنی کسی ہم عمر کی نصیحت سمجھ کر ناگواری محسوس نہیں کرنا ، آپ لوگوں کی شئیرنگ کا معیار دیکھ دیکھ کر میں ایک بڑی بہن کی حیثیت سے آپ کو نصیحت کرنے پر مجبور ہوگئی ہوں۔

سب سے پہلے اس اہم حقیقت کو سمجھیے کہ آپ عورت ہیں جس کا اسلام میں بہت نازک لیکن خوبصورت مقام ہے ، عہدِ نبویﷺ کی عورت ہو یا الیکٹرانک وقت کی ، ہر صورت شریعتِ مطہرہ کے احکامات کا نفاذ سلفیت ہے ۔
یہ بھی حقیقت جان لیجیے ، جو کہ میری نظر میں انتہائی بدصورت ہے ، یہ کہ آپ کی والز پر معمولی جنبش بھی کمنٹ باکس میں ایک جم غفیر جمع کر دیتی ہے ، (معذرت کے ساتھ) مجھے یہ حقیقت کہنے میں کوئی مزاحمت حائل نہیں کہ آپ کی نسوانیت سوشل میڈیا کے مرد حضرات کے لیے ایک مقناطیسی کشش کی حیثیت رکھتی ہے ، اور یہ کہنے میں ، میں مزید معذرت خواہ ہوں کہ آپ کی مثلِ زنگ آلود لوہا شئیرنگ سوشل میڈیا پر تفریح کے متلاشی لوگوں کے لیے اس یوذر بھائی کی خالص دینی شئیرنگ سے کئی سو فیصد زیادہ قابلِ قدر ، قیمتی اور قابلِ ستائش ہے جو اللہ کی رضا اور دین کی سربلندی کے جذبات سے معمور اپنے اسلاف کی تعلیمات لوگوں تک پہنچاتا ہے ۔

- کچھ بہنیں اللہ تعالیٰ کے لیے سرخ دلوں کے اسٹیکرز کے ساتھ ایسے ایسے عامیانہ کلمات کا استعمال کرتی ہیں کہ واللہ آخر میں جا کر پتا چلتا ہے کہ مخاطب اللہ کی عظیم ذات ہے ، جیسے میری ایک اسٹیٹس پر نظر پڑی ، محترمہ کہتی ہیں :
- میرا دل چاہتا ہے آپ میرے سامنے کھڑے رہیں اور میں آپ کو دیکھتی رہوں ، میرے تصور میں بھی آپ رہتے ہیں اور خیالوں میں بھی ،،، اللہ جی 

ایک اور اسٹیٹس سنیے :
- میں آپ کے بغیر نہیں رہ سکتی ، میں آپ کے پاس آنا چاہتی ہوں مجھے اپنی محبت دیجیے مجھے اپنے پاس بلا لیجیے ،،، اللہ جی ۔۔۔۔

☝ معزز قارئین !! یہ بہت اختصار کے ساتھ لکھا گیا ہے ، یقین کیجیے وہ وہ انداز اپنائے جاتے ہیں کہ ایک سچا مسلمان جو اپنے رب کی بزرگی ، عظمت و وقار اور جاہ و جلال کا کسی حد تک ادراک رکھتا ہے وہ طیش میں آجائے ۔ لیکن ان عامیانہ کلام و کلمات پر بڑے شد و مد سے دلاسے دیے جاتے ہیں ۔۔۔۔۔

گڑگڑا رہی ہیں تو فیس بک پر ، گر یہ وزاری کر رہی ہیں تو فیس بک پر ، اللہ کی محبت کا اظہار کر رہی ہیں تو فیس بک پر ، یہاں تک کہ اللہ سے دعائیں بھی مانگ رہی ہیں تو فیس بک پر ۔۔۔۔ تمام جہانوں کے وحدہ لاشریک پاک پروردگار کی قسم ، اللہ کی محبت ، اللہ سے گریہ وزاری ، اللہ کو پکارنا اور اللہ سے دعائیں کرنا ، تنہائی کی متقاضی ہوتی ہیں ، پبلک میں افسانوی کلمات سے اللہ کی محبت کا دم بھرنے کے بجائے آپ اس بات کی زیادہ مستحق ہیں کہ آپ اپنے گھروں میں قیام اللیل کا اہتمام کیجیے ، فیس بک پر اللہ کو افسانوی انداز میں سرخ دلوں کے درمیان الفاظ سجا کر پکارنے کے بجائے تہجد میں اس عظیم ذات کو لرزتی آوازوں میں پکاریے ، آنسووں سے بھیگتے رخساروں کے ساتھ اپنے رب کو پکاریے ، سجدوں میں اپنے رب کی رحمت مانگیے ، تشہد میں اس کی پاکی بیان کیجیے اور اپنا مدعا پیش کیجیے ، قیام اللیل وہ وقت ہوتا ہے جب آپ کی پکار تیر بہ حدف ثابت ہونے کے امکان زیادہ ہوتے ہیں ، نیٹ پر اپنی دعائیں اللہ کی طرف روانہ کرنے اور کروانے کے بجائے تہجد کے ان پُرنور سکون بخش لمحات میں اللہ کی طرف اپنی گریہ وزاری روانہ کیجیے جب اللہ آسمانِ زمین پر بہ نفسِ نفیس خود جلوہ افروز ہوتا ہے ۔ امام اعظم محمد رسول اللہ ﷺ کا فرمان ہے:

"ہمارا پروردگار بلند برکت والا ہے ہر رات کو اس وقت آسمان دنیا پر آتا ہے جب رات کا آخری تہائی حصہ رہ جاتا ہے ۔ وہ کہتا ہے کوئی مجھ سے دعا کرنے والا ہے کہ میں اس کی دعا قبول کروں ، کوئی مجھ سے مانگنے والا ہے کہ میں اسے دوں کوئی مجھ سے بخشش طلب کرنے والا ہے کہ میں اس کو بخش دوں ۔" ​

(صحیح بخاری، كتاب التهجد ، بباب الدعاء والصلاة من آخِرِ الليل:1145)​

- پیاری بہنوں !! آپ آئے دن فیس بک پر محض شرک سے بیزاری اور اللہ کو مُشکل کشاء، حاجت روا، بگڑی بنانے والا، غوث، داتا، معبود اور غریب نوازی کے اسٹیٹس دیتی رہتی ہیں ، اچھی بات ہے ، لیکن یہ تو بتائیے کہ صرف اقرار و قبولیت کے دعووں کے بجائے اگر آپ لوگوں کو معرفتِ الہی اور اصولِ ثلاثہ کے دروس دیں تو کیا بہتر نہیں ہوگا ؟
آپ بہنوں کے آئے دن کے اسٹیٹس کا لبِ لباب یہی اقرار و قبول ہوتا ہے ، جبکہ ہونا یہ چاہیے کہ آپ اس اقرار کے تعلق سے قرآن و سنت پیش کیجیے ،
علماءکرام کے دروس پیش کیجیے ، زیادہ سے زیادہ علماءکرام کی تعلیمات پھیلائیے ، ایسا نا کیجیے کہ اپنی پسند ناپسند کے تذکروں پر ہجوم اکھٹا کریں ، آپ مسلمہ ہیں ، اسلام سے سرفراز ہونے والے ہر مسلمان پر تبلیغ کی ذمہ داری ہے چاہے وہ عورت ہو یا مرد ، محض اقرار اور دعووں کے بجائے ابلاغی انداز اپنائیے ۔
میں دل کی عمیق گہرائیوں سے دعا گو ہوں کہ اللہ تعالیٰ آج کے اس فتنہ اور آزادی نسواں کے عروج میں مسلمان عورتوں کو ہدایت عطا فرمائے ، بالخصوص سلفی طبقہ فکر کی بہنوں کو احساس دلائے کہ مسلمان معاشرے کو ان کی دینی خدمات کی کتنی اشد ضرورت ہے ، نیز انہیں ان کے فرائضِ منصبی ادا کرنے اور گناہوں سے دور رہنے کی توفیق عطا فرمائے ۔۔۔۔ آمین یا رب العالمین.
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Na Mehram se Social media pe chat karna. Khawateen Aur Social Media.

Na Mehram se social media pe chat karna.

Kya Auraten Social media use kar sakti hai?
Kya mangani (engagement) ke bad Ladka Larki social media pe bat chit kar sakte hai?
Kya Na Mehram se Facebook, Twitter, quora, instagram pe Chat kar sakte hai?

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   Author: MRS Arshad Ansari (مسز انصاری)
  Reference: Facebook (Gurupe)

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Na-Mehram Aur Social Media.

السلام علیکم رحمۃاللہ وبرکاتہ
نا محرم اور سوشل میڈیا :
غیر محرم مرد وزن کی بات چیت آمنے سامنے ہو, موبائل پیغامات (massaging) کے ذریعہ ہو, یا سوشل میڈیا چَیٹ ہو, سب کے لیے اللہ سبحانہ وتعالى نے ایک ہی اصول وضابطہ مقرر فرمایا ہے۔

اللہ تعالیٰ کافرمان ذی شان ہے:
وَإِذَا سَأَلْتُمُوهُنَّ مَتَاعاً فَاسْأَلُوهُنَّ مِن وَرَاء حِجَابٍ ذَلِكُمْ أَطْهَرُ لِقُلُوبِكُمْ وَقُلُوبِهِنَّ
اور جب تم ان سے کسی چیز کے بارہ میں پوچھو, تو پردے کی اوٹ میں بات کرو۔ یہ تمہارے دلوں اور انکے دلوں کے لیے زیادہ پاکیزہ ہے۔ [الأحزاب : 53]

اس سے معلوم ہوتاہے کہ غیر محرم مرد اور عورت آپس میں کام کی بات کر سکتے ہیں۔ اور بات کرنے کا طریقہ یہ ہونا چاہیے کہ عورت پردے کی اوٹ میں ہو۔
موبائل , یا میسنجرز پہ کال کرتے ہوئے, یا چیٹ کے دوران "پردہ کی اوٹ" تو موجود ہی ہوتی ہے۔ الا کہ کوئی ویڈیو کال کرکے اس "اوٹ" کو ختم کر دے۔ لیکن دوسرا اہم نقطہ جو اس آیت میں بیان ہوا ہے وہ ہے "کام کی بات" ! جسے عموما پس پشت پھینک دیا جاتا ہے, اور اسکا لحاظ رکھے بغیر بات چیت کی جاتی ہے۔ اس آیت کریمہ میں حجاب کا ذکر کرنے سے پہلے اس اہم نقطہ کو بیان کیا گیا ہے جس سے واضح ہوتا ہے کہ غیر محرم مرد وزن کی آپس میں بات چیت صرف "ضروری اور اہم کام" سے متعلق ہونی چاہیے۔ محض "گپ شپ" لگانے کی اجازت شریعت میں انکے لیے نہیں ہے!  خوب سمجھ لیں۔ اللہ تعالیٰ کا ارشاد ہے:
يَا نِسَاء النَّبِيِّ لَسْتُنَّ كَأَحَدٍ مِّنَ النِّسَاء إِنِ اتَّقَيْتُنَّ فَلَا تَخْضَعْنَ
بِالْقَوْلِ فَيَطْمَعَ الَّذِي فِي قَلْبِهِ مَرَضٌ وَقُلْنَ قَوْلاً مَّعْرُوفاً
اے نبی کی بیویو! بتم عام عورتوں جیسی نہیں ہو, اگر تم اللہ سے ڈرتی ہو, تو
پرکشش لہجہ میں گفتگو نہ کرو, وگرنہ جسکے دل میں مرض ہے وہ طمع لگا
بیٹھے گا۔ اور معروف بات کہو۔ [الأحزاب : 32]
اس آیت میں اللہ سبحانہ وتعالى نے غیر محرموں سے گفتگو کرنے کے لیے مزید دو ا صول بیان فرمائے ہیں:

۱۔ لہجہ پرکشش نہ ہو۔
۲۔ معروف بات ہو۔

 یعنی اگر کوئی عورت گفتگو کے دوران ایسے لہجہ میں بات کرے جس سے مردوں کے دل میں "عشق" کا مرض جنم لے سکتا ہو, تو وہ لہجہ شرعا حرام ہے۔
 تحریری گفتگو میں بھی اس بات کو ملحوظ رکھنا ضروری ہے کہ ایسے الفاظ سے اجتناب کیا جائے جو صنفی کشش کا باعث بنتے ہوں۔

 جو گفتگو مرد و عورت کر رہے ہیں وہ معروف یعنی اچھائی اور بھلائی اور نیکی کی گفتگو ہو جسے شریعت اسلامیہ منع نہیں کرتی۔

درج بالا قواعد وضوابط کو ملحوظ رکھ کر غیر محرم مرد و عورت آپس میں بات چیت کر سکتے ہیں ۔ اس امت کی سب سے پاکیزہ خواتین یعنی امام الانبیاء جناب محمد مصطفى ﷺ کی ازواج مطہرات بھی غیر محرم مردوں سے انہی اصولوں کو مد نظر رکھ کر گفتگو کرتیں اور اسی طرح رسول اللہ ﷺ کی براہ راست شاگردات یعنی صحابیات بھی انہی ضابطوں کی پابند رہ کر بات چیت کیا کرتی تھیں۔ سو آج بھی اگر کوئی ان ضابطوں کی پابندی کرے تو انکی گفتگو میں کوئی حرج نہیں ہے۔
یعنی بات ایسی ہو جو کہ مرد کو اس عورت سے یا عورت کو اس مرد سے "خود" کرنا ضروری ہو, گفتگو کا انداز پرکشش نہ ہو, معروف بات ہو, اور حجاب کے احکامات ملحوظ خاطر ہوں, تو کوئی حرج نہیں ہے۔
شادی سے قبل منگیتر بھی "نامحرم" ہی شمار ہوتے ہیں۔ لہذا ان سے بھی گفتگو انہی ضوابط کی پابند ہے۔
یہاں ایک ہم بات سمجھنا بہت ضروری ہے , خصوصا خواتین کے لیے کہ * انکی سوشل میڈیا آئی ڈی انکے ولی امر (محرم مرد رشتہ دار جو عورت کا سرپرست ہے) کے علم میں ہونی چاہیے۔ اور اگر خواتین سوشل میڈیا مثلا فیس بک , ٹویٹر, واٹس ایپ , ٹیلی گرام وغیرہ کا استعمال کرتی ہیں تو انہیں بہت زیادہ محتاط رہنا ہوگا۔ اور درج ذیل غلطیوں سے مکمل اجتناب کرنا ہوگا:

1- لڑکوں کو ایڈ کرنا: کسی بھی ایسی آئی ڈی جو مردوں یا لڑکوں کے ناموں سے ہوں ان کو ایڈ نہ کریں اور اگر اپ کو لڑکی کے نام سے فرینڈ ریکویسٹ آئی ہے تو آپ کو معلوم ہونا چاہیے کہ یہ واقعی کسی بہن کی آئی ڈی ہے ، کہیں ایسا تو نہیں کہ لڑکی کے نام سے فیک آئی ڈی بناکر لڑکے آپ کو فرینڈ ریکویسٹ بھیج رہے ہیں ۔ جن پر لڑکیوں کی تصاویر لگی ہوتی ہیں تاکہ ایسے لڑکیوں کی پروفائل میں گھسا جا سکے۔ الغرض آپ صرف اور صرف لڑکیوں کو ہی اپنی فرینڈ لسٹ میں ایڈ کریں اور وہ بھی ایسی لڑکیاں جنہیں آپ جانتی ہوں کہ واقعی یہ لڑکیاں ہی ہیں اور پابند شریعت بھی! اگر آپکو دینی معلومات درکار ہیں, تو آپ فیس بک پر ایسے پیجز کو لائک کر لیں جو اسلامی معلومات فراہم کرتے ہیں۔ ان سے ہی آپکی علمی ضرورت پوری ہو جائے گی۔

2- لڑکوں سے چَیٹ: لڑکوں سے چیٹ کرنے کی قطعا کوئی ضرورت نہیں, جیسا کہ اوپر دلائل سے یہ بات واضح کی گئی ہے کہ "گپ شپ "لگانے یا پھر محض "سلام دعاء, حال احوال" کی غرض سے نامحرموں سے چَیٹ یا گفتگو کرنے کی شریعت میں ہرگز اجازت نہیں ہے۔ ہاں بوقت ضرورت بقدر ضرورت جتنی شریعت نے اجازت دی ہے اسکے مطابق کوئی بات کی جاسکتی ہے, لیکن یہ ذہن میں رہے کہ یہ اجازت محض رخصت ہے, لہذا اسکا کم ازکم استعمال کریں۔

3- ضرورت اور بلا وجہ کی گفتگو کے باریک فرق کو سمجھیں: اگر آپ کو کسی عالم دین سے معلومات درکار ہیں تو تین سے چار سطروں میں اپنا سوال لکھ کر سینڈ کریں، ورنہ گفتگو طول پکڑے گی اور کہیں جا کر بھی نہیں رکے گی جس سے فتنے کا اندیشہ ہے۔ خواتین عموما مرد کو دیندار, متقی, عالم دین, یا مجاہد سمجھ کر "گپ شپ" کرنا شروع کر دیتی ہیں جو کہ شریعت میں حرام ہے۔ اس سے اجتناب کریں۔ ٹو دی پوائنٹ یعنی جامع ومانع بات کریں۔ یہاں یہ بات بھی یاد رہے کہ آپ جب بھی کسی غیر محرم مرد سے چیٹ کریں تو اپنے کسی محرم کی موجودگی میں کریں, فتنہ سے محفوظ رہنے کا یہ بہت مؤثر ذریعہ ہے۔

4- دوسروں کی پوسٹوں پہ کمنٹ کرنا: کسی بھی دینی یا فلاحی تنظیم یا جماعت کے پیج پہ موجود پوسٹوں پر اپنی آئی ڈی سے کمنٹ نہ کریں, وگرنہ اسکے نتیجہ میں آپکی آئی ڈی ہزاروں بلکہ لاکھوں مردوں تک پہنچ جائے گی اور یہ فتنہ کا سبب بن جائے گی!

5- پروفائل پکچر: اپنی پروفائل پہ اپنی تصویر نہ لگائیں , خواہ نقاب والی ہی ہو۔ کچھ لڑکیاں اپنے ہاتھوں, پاؤں,آدھے جسم اور لباس وغیرہ کی تصاویر کو اپنی پروفائل پہ لگا دیتی ہیں جبکہ شریعت نےان سب کو چھپانے کا حکم دیا ہے۔

6- پوسٹ کرنے میں احتیاط برتیں: اپنے دکھ اور غم مثلا : میں پریشان ہوں ڈپریشن میں ہوں میں بہت مصیبت میں ہوں وغیرہ انٹر نیٹ پہ اجنبیوں سے ہر گز نہ شئیر کریں, اور نہ ہی اپنی جاننے والی لڑکیوں سے۔ یہ وہ غلطی ہے جو ہر لڑکی انٹر نیٹ پہ کرتی ہے اور بعد ازاں نقصان اٹھاتی ہے۔ اسی طرح اپنے رویے اور پسند ناپسند ، رنگ کیسا پسند ہے ، کھانے میں کیا پسند ہے ، جوتے کون سے پسند ہیں ، یہ معلومات اگر آپ انٹر نیٹ پہ ڈالیں گی تو وہ کسی نہ کسی تک تو پہنچیں گی جس سے نقصان کا اندیشہ ہے ۔

أبو عبد الرحمن محمد رفیق طاہر عفا اللہ عنہ
 نامحرم کا ایک دوسرے سے گفتگو کرنا :
اگر فتنے کا ڈر نہ ہو تو بامر مجبوری پردے میں غیر محرم عورت کے ساتھ گفتگو کی جا سکتی ہے۔ صحابہ کرام سیدہ عائشہ سے پردے میں مسائل پوچھ لیا کرتے تھے۔ لیکن شرط یہ ہے کہ اس گفتگو میں کوئی غیر شرعی معاملہ نہ ہو اور نہ ہی لہجے میں نرمی ہو۔ کیونکہ نرم لہجے میں گفتگو سے اللہ نے منع فرمایا ہے۔
ارشاد باری تعالی ہے:
اے نبیﷺ کی بیویو! تم عام عورتوں کی طرح نہیں ہو، اگر تم پرہیزگاری اختیار کرو تو نرم لہجے میں بات نہ کرو کہ جس کے دل میں روگ ہو وہ کوئی برا خیال کرے اور ہاں قاعدے کے مطابق کلام کرو۔ الاحزاب:32
اللہ تعالٰی قرآن مجید میں ارشاد فرماتا ہے :
“واذا سالتموهن متاعا فاسئلوهن من وراء حجاب“
اور جب تم کسی ضرورت اور حاجت کی وجہ سے عورتوں سے کوئی چیز مانگو تو پردے کے پیچھے سے مانگو۔ سنو پھر عورت کا غیر محرم مرد سے گفتگو کرنا صرف ضرورت کی حد تک جائز ہوگا
اللہ تعالی نے جس طرح عورت کے وجود کے اندر مرد کے لیے جنسی کشش رکھی ہے (جس کی حفاظت کے لیے بھی خصوصی ہدایات دی گئی ہیں تاکہ عورت مرد کے لیے فتنے کا باعث نہ بنے) اسی طرح اللہ تعالی نے عورتوں کی آواز میں بھی فطری طور پر دلکشی، نرمی اور نزاکت رکھی ہے جو مرد کو اپنی طرف کھینچتی ہے۔ بنابریں اس آواز کے لیے بھی یہ ہدایت دی گئی ہے کہ مردوں سے گفتگو کرتے وقت قصدا ایسا لب و لہجہ اختیار کرو کہ نرمی اور لطافت کی جگہ قدرے سختی اور روکھاپن ہو- تاکہ کوئی بدباطن لہجے کی نرمی سے تمہاری طرف مائل نہ ہو اور اس کے دل میں برا خیال پیدا نہ ہو-
یہ روکھا پن ، صرف لہجے کی حد تک ہی ہو، زبان سے ایسا لفظ نہ نکالنا جو معروف قاعدے اور اخلاق کے منافی ہو- ان اتقیتن کہہ کر اشارہ کر دیا کہ یا بات اور دیگر ہدایات قرآن و حدیث میں ہیں وہ متقی عورتوں کے لیے ہیں، کیونکہ انہیں ہی یہ فکر ہوتی ہے کہ ان کی آخرت برباد نہ ہو جائے- جن کے دل خوف الہی سے عاری ہیں، انہیں ان ہدایات سے کیا تعلق؟ اور وہ کب ان ہدایات کی پرواہ کرتی ہیں؟
فتاویٰ علمائے حدیث/کتاب الصلاۃ/جلد 1
ھذا, واللہ تعالى أعلم, وعلمہ أکمل وأتم ورد العلم إلیہ أسلم والشکر والدعاء لمن نبہ وأرشد وقوم , وصلى اللہ على نبینا محمد وآلہ وسلم وکتبہ:
وٙالسَّـــــــلاَمُ عَلَيــْــكُم وَرَحْمَةُ اللهِ وَبَرَكـَـاتُه :

تحریر۔ Mrs A Ansari

Four Stages of Womens: Bachpan se Maa Banane Tak.
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Kya Aurate Socia Media Par Apni Parde (Hijab) Wali Tasweer Dal (Post/Upload) Sakti hai?

Kya Ek Musalman Aurat Social media par Apni Parde wali Tasweer post kar sakti hai?

Muslim Women's Identity: Hijab is Crown.
Hijab’s Purpose Forgotten in the Rush for Acceptance"
Stylish Burqas: A Modern Mask Over Modesty.

Sawal: Kya EK Musalman Khatoon Social Media Sites aur Apps par Apni Tasweer online post kar sakti hai, aeisa karne ki ijazat hai? Jabki Tasweer puri tarah Parde (Hijab) Me ho?


Muslimah Pic, Hijabi Pic, Muslim Girls Dp, Womens pictures

سوال:
"السلام و علیکم!
کیا ایک مسلمان خاتون کو سوشل میڈیا سائٹس اور ایپس پر اپنی تصاویر آن لائن پوسٹ کرنے کی اجازت ہے؟ حالانکہ اس نے اپنے پورے جسم (حجاب) کو ڈھانپ رکھا ہے؟"
جواب:
وعلیکم السلام ورحمۃ اللہ وبرکاتہ!
الحمدللہ
سوال یہ ہے کہ ایک مسلمان بہن جو اللہ اور یوم آخرت پر ایمان رکھتی ہو، جو اللہ سے ڈرتی ہو اور آخرت کے دن اللہ کے سامنے کھڑے ہونے سے ڈرتی ہو وہ یہ سب جانتے ہوئے کیوں کرے گی؟
ہماری مسلمان بہنوں کو اس حوالے سے سنجیدگی سے خبردار کرنا چاہیے۔
ایک باشعور بہن جو حجاب کی اہمیت اور مقصد کو سمجھتی ہے وہ ایسا کچھ بھی کرنے کا نہیں سوچے گی۔  لیکن آج ہمارے پاس سوشل میڈیا پلیٹ فارمز پر ہر جگہ مسلمان بہنوں کی مسکراتی اور پوز والی اور اپنے جسم کی خوبصورتی دکھاتی تصویریں موجود ہیں۔ ایسی خواتین خود بھی فتنہ کا شکار ہو رہیں اور دوسروں کو بھی کر رہی ہیں۔
ایسے کام سے آپ کو کیا فائدہ ہوتا ہے؟ کیا آپ اپنی خوبصورتی دیکھا کر دوسروں کو نشانہ بنا رہی ہیں؟ کیا آپ اپنے لیے مزید دشمن حاصل کرنے کا ارادہ کر رہی ہیں؟ کیا آپ کا مقصد مردوں کو اپنی طرف راغب کرنا ہے؟ اگر آپ دین کی دعوت دینا چاہتی ہیں تو کیا یہ ضروری ہے کہ آپ سب کو دکھائیں کہ آپکی ہائیٹ کتنی اور قد کاٹھ کیا ہے؟  کیا یہ سب ضروری ہے؟؟؟
!اللہ سے ڈرو!
حجاب کا جوہر آپ کی خوبصورتی کو چھپانا اور آپ کی عفت و عصمت کو گہرا کرنا ہے۔ اس کے برعکس سوشل میڈیا پر اپنی تصویریں پوسٹ کرنے سے آپکی عفت و عصمت تحلیل ہو جاتی ہیں۔ یہ حرام ہے۔
حجاب کا مقصد معاشرے میں فتنہ کو کم کرنا ہے۔ اس کے برعکس یہ اس بات کو یقینی بناتا ہے کہ معاشرے میں فتنہ وسیع ہے۔ یہ حرام ہے۔
مسلمان سے کہا جاتا ہے کہ وہ اپنے آپ کو غیر ضروری حسد اور نظر بد سے بچائے۔ اس کے برعکس یہ آپ کے لیے نقصان دہ ہے جہاں آپکے مخالف بھی آپکو بآسانی دیکھ سکتے ہیں۔
اللہ سے ڈرو بہنوں۔ اللہ سے ڈرو اور قیامت کے دن اس کے سامنے کھڑے ہونے کو یاد کرو۔
معاشرے کو ایک بہتر جگہ بنانے میں مدد کریں جہاں ایمان بڑھتا ہے، اس کے برعکس نہیں جہاں مسلمان بیٹیوں کی تصاویر سوشل میڈیا پر جگہ جگہ موجود ہوں۔
عفت کو قائم رکھو، اپنی حیا کو قائم رکھو، اپنی شرم و حیا کو برقرار رکھو، اپنی خوبصورتی اپنے گھر تک محدود رکھو، اپنے حجاب کو اسی طرح رکھو جس طرح اس کا حکم دیا گیا تھا۔
ہم اللہ سے اپنے لیے اور تمام مسلمان بہنوں کی ہدایت کے لیے دعا گو ہیں۔
بارک اللہ فیکم
جزاکم اللہ خیران
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Liberal Shakhs Ka Sawal: Islam Auraton ko Parde Me Qaid Kyu Rakhta hai? Hijab aur Parda.

Aap Mujhe Bataye ke Islam Auraton Ko Parde me Qaid kyu rakhta hai?

Kya Islam Auraton ko Parde me Qaid karke, Talim se Mahrum rakhta hai?

Islamic PArda, Sharai PArda, Hijab aur Muslimah, Hijabi Queen, Beuty of Hijab,

       باپردہ  خاتون نے لبرل کو کیا لاجواب

ایک فلائٹ پر پاس بیٹھی با پردہ لڑکی سے ایک لبرل اور گناہ پسند خیالات کا حامل شخص بولا!
آئیں کیوں نہ کچھ بات چیت کرلیں سنا ہے اس طرح سفر با آسانی کٹ جاتا ہے
لڑکی نے کتاب سے نظر اٹھا کر اسکی طرف دیکھا اور کہا کہ ضرورمگر آپ کس موضوع پر بات کرنا چاہیں گے؟
اس شخص نے کہا کہ ہم بات کرسکتے ہیں کہ اسلام عورت کو پردے میں کیوں قید کرتا ہے؟
یا اسلام عورت کو مرد کے جتنا وراثت کا حقدار کیوں نہیں مانتا؟
لڑکی نے دلچسپی سے کہا کہ ضرور لیکن پہلے آپ میرے ایک سوال کا جواب دیجئے۔
اس شخص نے پوچھا کیا؟

لڑکی نے کہا کہ گائے‘ گھوڑا اور بکری ایک سا چارہ یعنی گھاس کھاتے ہیں لیکن گائے گوبر کرتی ہے‘ گھوڑا لید کرتا ہے اور بکری مینگنی کرتی ہے‘ اسکی وجہ کیا ہے؟
وہ شخص اس سوال سے چکرا گیا اور کھسیا کر بولا کہ مجھے اسکا پتہ نہیں-

اس پر لڑکی بولی کہ کیا آپ سمجھتے ہیں کہ آپ خدا کے بنائے قوانین‘پردہ‘وراثت اور حلال و حرام پر بات کے اہل ہیں جبکہ خبر آپ کو جانوروں کی غلاظت کی بھی نہیں؟

یہ کہہ کر لڑکی اپنی کتاب کی طرف متوجہ ہو گٸی ..
منقول
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Haram Talluqat me Rahne se Sabse Pahle Haya Khatam Ho jati hai. Na-mehram se Dosti.

Shadi se Pahle Na-Mehram se Mulaqat, Talluqat aur Jismani Jarurate.

Haram Talluqat me Rahne se Sabse Pahle Haya Khatam Ho jati Hai. Na-mehram se Dosti. 

Haram Dosti, Modern Behyayi Aur Islamic Parda, Sharai Parda, Islam aur Liberlas ki theory, Na Mehram se muhabbat Social media par

اسلام و علیکم ورحمتہ اللّٰه وبرکاتہ

#حرام تعلقات

از قلم #زرش

#الحیاء_تحریری_مقابلہ

آجکل نامحرم تعلق ،شادی سے پہلے محبت کے نام پہ باتیں ،ملاقاتیں ،جسمانی تعلقات ،دوستیاں ان سب کاموں کو اکثریت گناہ سمجھتی ہی نہیں ہے ۔جبکہ یہی سے تباہی و بربادی کا آغاز ہوتا ہے ۔
ان سب حرام کاموں کی اسلام میں کوئی گنجائش نہیں ہے ۔

جب سمجھایا جاتا ہے تو لوگ کہتے ہیں کہ یہ سب تو عام ہے سب کر رہے ہیں ہم نے کر لیا تو کیا ۔
جب کہ سوچنے کی بات ہے سب گناہ کر رہے ہیں تو آپ کو تو انکی اصلاح کرنے والا بننا چاہیئے ۔خود بھی حرام تعلقات سے بچنا چاہیئے اور دوسروں کو بھی بچانا چاہیۓ ۔
جب حرام تعلقات میں انسان الجھ جاتا ہے تو جائز ،ناجائز کا فرق بھول جاتا ہے ،انسان کی شرم و حیا ختم ہو جاتی ہے ،عبادت کا سکون اور لزت نہیں ملتی ، انسان بےباک ہو جاتا ہے ،وقتی لزت کے لیے گناہ کرتا چلا جاتا ہے ،بے حیائی کی باتیں اور ہر حد پار کی جاتی ہے ،حرام لزت کے لیے اللّٰه کو ناراض کیا جاتا ہے ۔
جب کہ قرآن میں واضح فرمایا گیا ہے

وَ لَا تَقۡرَبُوا الۡفَوَاحِشَ مَا ظَہَرَ مِنۡہَا وَ مَا بَطَنَ "
اور بے حیائی کے جتنے طریقے ہیں ان کے پاس بھی مت جاؤ خواہ وہ اعلانیہ ہوں یا پوشیدہ ۔(سورہ انعام آیت 151)
جب انسان حرام تعلقات میں پڑتا ہے تو سب سے پہلے حیا ہی ختم ہوتی ہے ۔
یاد رکھیں حرام تعلقات اور شادی سے پہلے محبت کے نام پہ بے حیائی اور فحاشی کی اسلام میں کوئی گنجائش نہیں ۔خود بھی حرام تعلقات سے بچیں اور دوسروں کو بھی بچائیں ۔اپنی ذندگی اسلام کی تعلیمات کے مطابق گزاریں ۔
#بےحیائی_کا_خاتمہ   Copied

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Ghar baithe Biwi dikhar kar Reels jaise Short videos Se paise kaise kamate hai? घर बैठे पैसे कमाये.

Ghar baithe Biwi dikha kar paise kaise kamaye?

Aaj apni roji roti ka Zariya Ki talash me social media Par reels banane me Pure family lage hue hai?

Share Islamic reminders, Quranic verses, and motivational Reels that uplift hearts and spread positivity across social media platforms.

Create Viral Islamic Posts: Faith-Filled Content That Inspires and Engages.

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پیسہ کمانے کے جتنے ناجائز طریقے ہیں ان میں سے سب سے گندہ طریقہ اپنی سگی بیوی نچوا کر اور بہن کے ٹھمکے دکھا کر لونڈے لپاڑوں کے منورنجن سے پیسہ بنانا ہے -

ٹک ٹاک اور یوٹیوب پر ایسے دیوث مسلمان ٹک ٹاکرز پائے جاتے ہیں جو اپنی بیوی کے ایک ایک لمحے اور نزاکت و نسوانیت کو مارکیٹ میں سیل کر رہے ہوتے ہیں، بیوی کچن میں کیا کرتی ہے ،بیوی بیڈروم میں کیا کرتی ہے یہاں تک کہ بیوی کے واش روم کی مصروفیات بھی یہ ریکارڈ کرکے قوم کو دکھا رہے ہوتے ہیں-

بیوی کب ہنستی ہے کب روتی ہے کب سیڑھیاں چڑھتی ہے کب اترتی ہے، کب جاگتی سوتی ہے، کس پہلو سوتی ہے،کب رومینس کے موڑ میں ہوتی ہے، کب حاملہ ہوتی ہے کب بچہ دیتی ہے،ان سب اہم “قومی مسائل “سے یہ قوم کو باخبر رکھ رہے ہوتے ہیں -

اس سب کے باوجود بھی اگر وویورشب میں اضافہ نہ ہوا تو یہ رات سونے سے پہلے بیوی کا ایک آدھ ٹوٹا لیک کرتے ہیں صبح فجر پڑھ کر مومنین کا جم غفیر لنک کے لئے لائن میں کھڑا ہوتا ہے اس طرح یوٹیوب کی دکانوں پر نیا مال پہنچ جاتا ہے -

یہ کل دس سے پندرہ جوڑے ہیں جو نئی نسل کو بے شرمی اور بے غیرتی کے راستے دکھا رہے ہیں -

حکومتی سطح پر سائبر کرائم کو چاہئے کہ ان کے تمام اکاؤنٹس کو بینڈ کیا جائے،
ورنہ ان بے شرموں سے متاثر نئی نسل گھر بیٹھے بیوی دکھا کر پیسہ کمانے کے شارٹ راستے پر چل پڑیگی -

بقلم فردوس جمال !!!

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Short Videos aur Muslim Muashara: Kothe ke Mujra se Digital Mujra tak ka Safar.

Digital Mujra aur Muslim Muashera. Shikari Wahi Chaal naye.

Digital Mujra Aur Muslim Muashra: Ek Tahqiqi Jayeza.
TikTok Aur Reels: Naye Zamane Ki Nayi Fitnayein?
Short Videos Ka Asar Musalman Ki Soch Par.
Digital Fame Ya Deeni Fikar: Musalman Nojawan Ka Dilemma?
Social Media Par Aurat Ki Tasveer: Haya Ya Hawa?
Mujra Se Reels Tak: Ek Tehzeebi Inhitaat?
Digital Mujra: Muslim Muashray Ka Naya Imtihaan.
TikTok Aur Muslim Nojawan: Viral Culture Ya Virasat Ka Taqraar?
Reels Ki Duniya Mein Musalman Ki Pehchaan Kahan?
Short Videos Aur Muslim Values: Ek Sochne Wala Sawal.
Digital Glamour vs Islamic Modesty: Kya Musalman Taiyyar Hai?
Digital Mujra kya hai aur iska asar Muslim muashare par?
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Muslim girls on TikTok: samaji tanqeedi nazar, Gender & society, Value conflict, Youth behavior, Deeni Awareness.
Digital Mujra Aur Muslim Muashara: Ek Tahqiqi Jayeza.
     ﻧﺌﮯ ﺷﮑﺎﺭﯼ ﭘﺮﺍﻧﮯ ﺟﺎﻝ- Snapchat & Tik Tok
⁦⁩ ﺗﻮﺟﮧ ﮐﯿﺠﺌﮯ ﺍﻭﺭ ﺍﺻﻼﺡ ﮐﯿﺠﺌﮯ !
ﺍﭘﻨﮯ ﺩﺷﻤﻦ ﮐﻮ ﭘﮩﭽﺎﻧﯿﮟ !
ﺍﻭﻝ ﺭﻭﺯ ﺟﺐ ﷲ ﻧﮯ ﺍﺑﻠﯿﺲ ﮐﻮ ﺭﺍﻧﺪﮦ ﺩﺭﮔﺎﮦ ﮐﯿﺎ ﺍﺱ ﭘﺮ ﺭﻭﺯ ﻗﯿﺎﻣﺖ ﺗﮏ ﮐﮧ ﻟﺌﮯ ﻟﻌﻨﺖ ﮐﺮ ﺩﯼ۔ ﺍﺱ ﻧﮯ ﷲ ﮐﯽ ﺑﺎﺭﮔﺎﮦ ﻣﯿﮟ ﺑﺮﻣﻼ ﮐﮩﺎ۔ ﺍﺱ ﮐﮯ ﺍﻟﻔﺎﻅ ﮐﺎ ﺫﮐﺮ ﷲ ﻧﮯ ﺳﻮﺭﺕ ﺍﻟﻨﺴﺎﺀ ﮐﯽ ﺁﯾﺖ ﻧﻤﺒﺮ 119 ﻣﯿﮟ ﮐﯿﺎ ﻭﮦ ﮐﮩﻨﮯ ﻟﮕﺎ ...
ﻭَﻟَﺄُﺿِﻠَّﻨَّﻪﻡُ
ﺍﻭﺭ ﺍﻧﮩﯿﮟ ‏( ﺍﻭﻻﺩ ﺁﺩﻡ ﮐﻮ ‏) ﺭﺍﻩ ﺳﮯ ﺑﮩﮑﺎﺗﺎ ﺭﮨﻮﮞ ﮔﺎ
ﻭَﻟَﺄُﻣَﻨِّﻴَﻦّْﻢُﻫَ
ﺍﻭﺭ ﺑﺎﻃﻞ ﺍﻣﯿﺪﯾﮟ ﺩﻻﺗﺎ ﺭﮨﻮﮞ ﮔﺎ
ﻭَﻟَﺂﻣُﺮَﻧَّﻬُﻢْ
ﺍﻭﺭ ﺍﻧﮩﯿﮟ ﺳﮑﮭﺎﺅﮞ ﮔﺎ
ﻓَﻠَﻴُﺒَﺘِّﻜُﻦَّ ﺁﺫَﺍﻥَ ﺍﻟْﺄَﻧْﻌَﺎﻡِ
ﮐﮧ ﺟﺎﻧﻮﺭﻭﮞ ﮐﯽ ﮐﺎﻥ ﭼﯿﺮ ﺩﯾﮟ،
ﻭَﻟَﺂﻣُﺮَﻧَّﻬُﻢْ ﻓَﻠَﻴُﻐَﻴِّﺮُﻥَّ ﺧَﻠْﻖَ ﺍﻟﻠَّﻪِ ۚ
ﺍﻭﺭ ﺍﻥ ﺳﮯ ﮐﮩﻮﮞ ﮔﺎ ﮐﮧ ﺍﻟﻠﮧ ﺗﻌﺎﻟﯽٰ ﮐﯽ ﺑﻨﺎﺋﯽ ﮨﻮﺋﯽ ﺻﻮﺭﺕ ﮐﻮ ﺑﮕﺎﮌ ﺩﯾﮟ،
ﻭَﻣَﻦْ ﻳَﺘَّﺨِﺬِ ﺍﻟﺸَّﻴْﻄَﺎﻥَ ﻭَﻟِﻴًّﺎ ﻣِﻦْ ﺩُﻭﻥِ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﻓَﻘَﺪْ ﺧَﺴِﺮَ ﺧُﺴْﺮَﺍﻧًﺎ ﻣُﺒِﻴﻨًﺎ
ﺳﻨﻮ ! ﺟﻮ ﺷﺨﺺ ﺍﻟﻠﮧ ﮐﻮ ﭼﮭﻮﮌ ﮐﺮﺷﯿﻄﺎﻥ ﮐﻮ ﺍﭘﻨﺎ ﺭﻓﯿﻖ ﺑﻨﺎﺋﮯ ﮔﺎ ﻭﻩ ﺻﺮﯾﺢ ﻧﻘﺼﺎﻥ ﻣﯿﮟ ﮈﻭﺑﮯ ﮔﺎ.
ﺍﻟﻨﺴﺎﺀ 119-
ﺁﭖ ﯾﮧ ﺩﯾﮑﮭﯿﮟ ﮐﮧ ﺍﺑﻠﯿﺲ ﮐﮯ ﺍﺱ ﻗﻮﻝ ﮐﻮ ﮐﮧ " ﺍﻟﻠﮧ ﺗﻌﺎﻟﯽٰ ﮐﯽ ﺑﻨﺎﺋﯽ ﮨﻮﺋﯽ ﺻﻮﺭﺕ ﮐﻮ ﺑﮕﺎﮌ ﺩﯾﮟ " ﺁﺝ ﮐﯿﺴﮯ ﻟﻮﮒ ﺍﺳﮯ ﭘﻮﺭﺍ ﮐﺮ ﺭﮨﮯ ﮨﯿﮟ Snapchat ﮐﻮ ﺍﭘﻨﮯ ﻣﻮﺑﺎﺋﻞ ﻣﯿﮟ ﺍﻧﺴﭩﺎﻝ ﮐﯿﺎ ﺟﺎﺭﮨﺎ ﮨﮯ ﺍﻭﺭ ﺍﺱ ﺳﺎﻓﭧ ﻭﺋﯿﺮ ﺳﮯ ﺗﺼﻮﯾﺮ ﻟﯽ ﺟﺎﺗﯽ ﮨﮯ ﺍﻭﺭ ﺍﺱ ﻣﯿﮟ ﺍﻧﺴﺎﻧﯽ ﺷﮑﻞ ﭘﺮ ﺑﻠﯽ ﺍﻭﺭ ﮐﺘﮯ ﮐﮯ ﮐﺎﻥ ﺍﻭﺭ ﺯﺑﺎﻥ ﺍﯾﮉﭦ ﮐﺌﮯ ﺟﺎ ﺭﮨﮯ ﮨﯿﮟ۔
⁦ ⁩ ﺗﺼﻮﯾﺮ ﺳﺎﺯﯼ ﮐﺎ ﺟﺮﻡ ﺗﻮ ﺍﭘﻨﯽ ﺟﮕﮧ ﺭﮦ ﮔﯿﺎ ﻟﮕﺎﺗﺎﺭ ﺩﻭﮨﺮﺍ ﺟﺮﻡ ﯾﮧ ﮐﯿﺎ ﺟﺎﺭﮨﮯ ﮐﮧ ﺍﻟﻠﮧ ﮐﯽ ﺑﻨﺎﺋﯽ ﮨﻮﺋﯽ ﺷﮑﻞ ﻭ ﺻﻮﺭﺕ ﮐﻮ ﺑﮕﺎﺭ ﮐﺮ ﭘﯿﺶ ﮐﯿﺎ ﺟﺎﺭﮨﺎ ﮨﮯ۔
⁦ ⁩ ﺍﺑﻠﯿﺲ ﮐﮯ ﺭﺍﺳﺘﮯ ﭘﺮ ﮔﺎﻣﺰﻥ ﺍﺱ ﺍﻣﺖ ﻧﮯ ﺻﻮﺭﺕ ﮐﻮ ﺑﮕﺎﮌ ﮐﺮ ﭘﯿﺶ ﮐﺮﻧﮯ ﻭﺍﻟﯽ ﺍﺱ ﺍﻣﺖ ﻧﮯ ﺍﺗﻨﺎ ﺑﮭﯽ ﺧﯿﺎﻝ ﻧﮧ ﮐﯿﺎ ﮐﮧ ﺯﻣﯿﻦ ﻭ ﺁﺳﻤﺎﻥ ﮐﻮ ﺳﻮﺭﺝ ‛ ﭼﺎﻧﺪ ‛ ﺗﺎﺭﻭﮞ ﮐﻮ ﺍﻭﺭ ﭘﻮﺭﯼ ﮐﺎﺋﻨﺎﺕ ﮐﻮ ﷲ ﻧﮯ ﺑﻨﺎﯾﺎ ﺗﻮ ﻟﻔﻆ " ﮐُﻦ " ﮐﮩﮧ ﮐﺮ ﺑﻨﺎﯾﺎ .... ﺟﺐ ﺍﻧﺴﺎﻥ ﮐﯽ ﺗﺨﻠﯿﻖ ﮐﯽ ﺑﺎﺭﯼ ﺁﺋﯽ ﺗﻮ ﻓﺮﻣﺎﯾﺎ " ﺧَﻠَﻘۡﺖُ ﺑِﯿَﺪَﯼَّ " ‏( ﺹ 75- ‏) ﺟﺴﮯ ﷲ ﻧﮯ ﺍﭘﻨﮯ ﮨﺎﺗﮭﻮﮞ ﺳﮯ ﺑﻨﺎﯾﺎ ﺍﻭﺭ ﺑﻨﺎ ﮐﺮ ﻓﺮﻣﺎﯾﺎ
⁦ ⁩ ﻟَﻘَﺪۡ ﺧَﻠَﻘۡﻨَﺎ ﺍﻟۡﺎِﻧۡﺴَﺎﻥَ ﻓِﯽۡۤ ﺍَﺣۡﺴَﻦِ ﺗَﻘۡﻮِﯾۡﻢٍ ﴿۫۴﴾
ﯾﻘﯿﻨﺎً ﮨﻢ ﻧﮯ ﺍﻧﺴﺎﻥ ﮐﻮ ﺑﮩﺘﺮﯾﻦ ﺻﻮﺭﺕ ﻣﯿﮟ ﭘﯿﺪﺍ ﮐﯿﺎ ۔
ﺍﻟﺘﯿﻦ 4-
⁦ ⁩ ﻭَ ﺍِﺫَﺍ ﻗِﯿۡﻞَ ﻟَﮧُ ﺍﺗَّﻖِ ﺍﻟﻠّٰﮧَ ﺍَﺧَﺬَﺗۡﮧُ ﺍﻟۡﻌِﺰَّۃُ ﺑِﺎﻟۡﺎِﺛۡﻢِ ﻓَﺤَﺴۡﺒُﮧٗ ﺟَﮩَﻨَّﻢُ ؕ ﻭَ ﻟَﺒِﺌۡﺲَ ﺍﻟۡﻤِﮩَﺎﺩُ ﴿۲۰۶﴾
ﺍﻭﺭ ﺟﺐ ﺍِﺱ ﺳﮯ ﮐﮩﺎ ﺟﺎﺋﮯ ﮐﮧ ﺍﻟﻠﮧ ﺳﮯ ﮈﺭ ﺗﻮ ﺗﮑﺒﺮ ﺍﻭﺭ ﺗﻌﺼﺐ ﺍﺳﮯ ﮔﻨﺎﮦ ﭘﺮ ﺁﻣﺎﺩﮦ ﮐﺮ ﺩﯾﺘﺎ ﮨﮯ ﺍﯾﺴﮯ ﮐﮯ ﻟﺌﮯ ﺑﺲ ﺟﮩﻨﻢ ﮨﯽ ﮨﮯ ﺍﻭﺭ ﯾﻘﯿﻨًﺎ ﻭﮦ ﺑﺪﺗﺮﯾﻦ ﺟﮕﮧ ﮨﮯ ۔
ﺳﻮﺭﺓ ﺍﻟﺒﻘﺮﺓ 206
⁦ ⁩ ﻣﺰﯾﺪ ﯾﮧ ﮐﮧ ﭨِﮏ ﭨـﺎﮎ ﭘـﺮ ﺧـﻮﺍﺗﯿﻦ ﮐﯽ ﺑـﮍﮬﺘـﯽ ﺑﮯﺣﯿـﺎﺋـﯽ ﺩﯾﮑـﮫ ﮐـﺮ ﺑﮯﺳﺎﺧﺘــﮧ ﯾﮧ ﺣـﺪﯾﺚ ﯾﺎﺩ ﺁﺟﺎﺗﯽ ﮨﮯ ـــ
⁦ ⁩ ﻭٙﺍﻃَّﻠَﻌْﺖُ ﻓِﻲ ﺍﻟﻨَّﺎﺭِ ﻓَﺮَﺃَﻳْﺖُ ﺃَﻛْﺜَﺮَ ﺃَﻫْﻠِﻬَﺎ ﺍﻟﻨِّﺴَﺎﺀ
ﺟﮩـﻨّﻢ ﻣﯿـﮟ ﺟﮭﺎﻧﮏ ﮐـﺮ ﺩﯾﮑﮭـﺎ ﺗـﻮ ﺍﮐﺜـﺮﯾﺖ ﻋـﻮﺭﺗـﻮﮞ ﮐـﯽ ﺩﯾﮑﮭـﯽ
‏[ ﺻﺤﯿﺢ ﻣﺴﻠـﻢ : ٢٧٣٧ ‏]
ﺗﺒﮭـﯽ ﺗـﻮ !
ﺇﻥَّ ﺃﻗﻞ ﺳﺎﻛﻨﻲ ﺍﻟﺠﻨﺔِ ﺍﻟﻨﺴﺎﺀُ
ﺟﻨّﺖ ﻣﯿـﮟ ﺭﮨﻨﮯ ﻭﺍﻟـﻮﮞ ﻣﯿـﮟ ﺳﺐ ﺳﮯ ﮐـﻢ ﺗﻌﺪﺍﺩ ﻋـﻮﺭﺗﻮﮞ ﮐـﯽ ﮨﮯ۔
‏[ ﺻﺤﯿﺢ ﻣﺴﻠـﻢ : ٢٧٣٨ ‏]
ﷲ ﻧﮯ ﺑﮭﯽ ﻓﺮﻣﺎﯾﺎ ﮐﮧ
⁦ ⁩ ﻗَﺎﻝَ ﺍﺧۡﺮُﺝۡ ﻣِﻨۡﮩَﺎ ﻣَﺬۡﺀُﻭۡﻣًﺎ ﻣَّﺪۡﺣُﻮۡﺭًﺍ ؕ ﻟَﻤَﻦۡ ﺗَﺒِﻌَﮏَ ﻣِﻨۡﮩُﻢۡ ﻟَﺎَﻣۡﻠَﺌَﻦَّ ﺟَﮩَﻨَّﻢَ ﻣِﻨۡﮑُﻢۡ ﺍَﺟۡﻤَﻌِﯿۡﻦَ ﴿۱۸﴾ﺍ
ﺍﻟﻠﮩﻨﮯ ‏( ﺷﯿﻄﺎﻥ ﺳﮯ ‏) ﻓﺮﻣﺎﯾﺎ ﮐﮧ ﯾﮩﺎﮞ ﺳﮯ ﺫﻟﯿﻞ ﻭ ﺧﻮﺍﺭ ﮨﻮ ﮐﺮ ﻧﮑﻞ ﺟﺎ ﺟﻮ ﺷﺨﺺ ﺍﻥ ﻣﯿﮟ ﺳﮯ ﺗﯿﺮﺍ ﮐﮩﻨﺎ ﻣﺎﻧﮯ ﮔﺎ ﻣﯿﮟ ﺿﺮﻭﺭ ﺗﻢ ﺳﺐ ﺳﮯ ﺟﮩﻨﻢ ﮐﻮ ﺑﮭﺮ ﺩﻭﮞ ﮔﺎ ۔ ﺱ
ﺳﻮﺭﺓﺍﻷﻋﺮﺍﻑ 18
⁦ ⁩ ﻭَ ﻟَﻘَﺪۡ ﺻَﺪَّﻕَ ﻋَﻠَﯿۡﮩِﻢۡ ﺍِﺑۡﻠِﯿۡﺲُ ﻇَﻨَّﮧٗ ﻓَﺎﺗَّﺒَﻌُﻮۡﮦُ ﺍِﻟَّﺎ ﻓَﺮِﯾۡﻘًﺎ ﻣِّﻦَ ﺍﻟۡﻤُﻮٔۡﻣِﻨِﯿۡﻦَ ﴿۲۰﴾
ﺍﻭﺭ ﺷﯿﻄﺎﻥ ﻧﮯ ﺍﻥ ﮐﮯ ﺑﺎﺭﮮ ﻣﯿﮟ ﺍﭘﻨﺎ ﮔﻤﺎﻥ ﺳﭽﺎ ﮐﺮ ﺩﮐﮭﺎﯾﺎ ﯾﮧ ﻟﻮﮒ ﺳﺐ ﮐﮯ ﺳﺐ ﺍﺱ ﮐﮯ ﺗﺎﺑﻌﺪﺍﺭ ﺑﻦ ﮔﺌﮯ ﺳﻮﺍﺋﮯ ﻣﻮﻣﻨﻮﮞ ﮐﯽ ﺍﯾﮏ ﺟﻤﺎﻋﺖ ﮐﮯ۔
ﺻﺒﺎ 20-
⁦ ⁩ ﺍِﻟَّﺎ ﻣَﻦۡ ﺭَّﺣِﻢَ ﺭَﺑُّﮏَ ؕ ﻭَ ﻟِﺬٰﻟِﮏَ ﺧَﻠَﻘَﮩُﻢۡ ؕ ﻭَ ﺗَﻤَّﺖۡ ﮐَﻠِﻤَۃُ ﺭَﺑِّﮏَ ﻟَﺎَﻣۡﻠَﺌَﻦَّ ﺟَﮩَﻨَّﻢَ ﻣِﻦَ ﺍﻟۡﺠِﻨَّۃِ ﻭَ ﺍﻟﻨَّﺎﺱِ ﺍَﺟۡﻤَﻌِﯿۡﻦَ ﴿۱۱۹﴾
ﺑﺠﺰ ﺍﻥ ﮐﮯ ﺟﻦ ﭘﺮ ﺁﭖ ﮐﺎ ﺭﺏ ﺭﺣﻢ ﻓﺮﻣﺎﺋﮯ ، ﺍﻧﮩﯿﮟ ﺗﻮ ﺍﺳﯽ ﻟﺌﮯ ﭘﯿﺪﺍ ﮐﯿﺎ ﮨﮯ ﺍﻭﺭ ﺁﭖ ﮐﮯ ﺭﺏ ﮐﯽ ﯾﮧ ﺑﺎﺕ ﭘﻮﺭﯼ ﮨﮯ ﮐﮧ ﻣﯿﮟ ﺟﮩﻨﻢ ﮐﻮ ﺟﻨﻮﮞ ﺍﻭﺭ ﺍﻧﺴﺎﻧﻮﮞ ﺳﺐ ﺳﮯ ﭘﺮ ﮐﺮﻭﮞ ﮔﺎ ۔ 
ﺳﻮﺭﺓ ﻫﻮﺩ 119.
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Islamic post pe Apna Naam Likhna ( Tahreer karne wale ka Nam)

Islami Post Par Apna Naam Likhna
= = = = = = = = = = = = = = =
Tehreer: Shaikh Maqbool Ahmed Salafi Hafizahullah*
Romanized By: Umar Asari*
Social Media Itna Powerful Ho Gaya Hai Ke Us Ki Taaqat Se Har Koi Mutassir Ho Gaya Aur Har Qism Ke Log Is Se Jud Gaye.
Logon Ki Bheed Bhaad Aur Mukhtalif Qism Ki Ashya (Cheezein) Idhar Se Udhar Honay Ki Wajah Se Bohat Qism Ke Masail Bhi Paida Ho Gaye.
Un Mein Se Aik Masla Yeh Hai Ke Whatsapp Aur Facebook Waghera (Etc) Ki Post Par Jab Us Ke Likhnay Walay Ka Naam Hota Hai To Kuch Log Yeh Sawal Kartey Hain Key Is Par Naam Kiyun Likha Jata Hai?
Kuch Is Qism Ke Khayalat Ka Bhi Izhaar Kartey Hain Jo Mere Aik Qareebi Habib Ko Kisi Ne Mashwaratan (Advice Key Taur Par) Ya Tanzan (Satirize Key Taur Par) Kaha Hai. 
"Aik Shakhs Mujhe Kehta Hai Ke Quran o Hadees Tumhari Jageer Nahi Hai Is Liye Jab Mazmoon (Koi Topic) Likho To Us Par Apna Naam Likhna Zaroori Nahi Aur Woh Mera Naam Mere Mazmoon (Topic) Se Hata Deta Hai. Kehta Hai Key Tum Shohrat (Famous) Ke Liye Tableegh Kar Rahay Ho Ya Allah Ki Riza (Khushi) Ke Liye? ".
Yeh Jumla (Sentence) Tanz (Satirize) Ke Sath Apne Andar Sahib e Mazmoon (Artical Likhney Waley) Se Bugz o Adawat Bhi Rakhta Hai.
Yeh Sawal Social Media Ke Aaney Se Pehlay Nahi Tha. Aap Dekhtey Hongey, Akhbaarat (News Papers) Hon, Rasail Hon, Mazaameen (Articles) Hon, Kitaabein Hon Ya Kitabche  Koi Bhi Baghair Moharrir (Likhney Wale) Ke Naam Ke Nahi Hota, Yeh Sawal Yahan Nahi Kiya Jata Hai, Sirf Whatsapp Ya Facebook Waghera Jaisay Samaji (Social) Media Pay Kiya Jata Hai.
Is Silsilay Mein Kehna Chahta Hun Ke Koi Bhi Post Ya Mazmoon H Us Ke Likhnay Walay Ka Naam Khusoosan (Khaas Taur Se) Is Waqt Behad (Bohot) Zaroori Hai.
*Is Ki Kayi Wujohaat (Reasons) Hain Un Mein Do Sab Sey Zada Ahem (Important) Hain.*
1⃣ Koi Bhi Article, Article Likhney Waley Ki Haisiyat Se Jana Jayega Jo Kay Riwayet Aur Haq Hai.
2⃣ Bid’aat o Khurafaat Ke Daur Mein Mazmoon Nigaar (Artical Likhne Wale) Ke Naam Se Hi Mazmoon (Article) Ki Haisiyat Wazeh Ho Jayegi Jab Kay Us Ne Naam Ke Sath Izafi Sifat Laga Rakhi Ho.
Isi Wajah Sey Hum Dekhtey Hain Ke Jab Kisi Baat Ko Bawazan Karni Ho (Means Kisi Baat Mein Zor Paida Karna Ho) To Kisi Mo’tabar Aalim Ka Un Key Naam Key Saath Qaul Zikr Kiya Jata Hai.
 Social Media Mein Kisi Bhi Mazmoon Pay Naam Likhnay Ke Asraat:
▪Mazmoon (Article) Ka Maqsad Tableegh or Islaah Hota Hai, Is Liye Kuch Log Mazmoon (Article) Mein Us Ke Likhnay Walay Ka Naam Ho Ya Na Ho Woh Mazmoon (Article) Ko Waisay Hi Dosray Samaji (Social) Media Par Share Kartey Hain. Haqeeqat Mein Aisa Hi Hona Chahiye.
▪Mazmoon (Article) Kitna Achcha Hi Kiyun Na Ho, Kuch Log Mazmoon (Article) Likhney Waley Ka Naam Dekh Kar Jal Bhun Jatay Hain. Aisay Log Do (2) Qism Ke Hotay Hain. Aik To Woh Hain Jo Woh Mazmoon Kahin Share Hi Nahi Kartey, Aur Aik Woh Hain Jo Foran Naam Kaat Detey Hain Phir Usay Share Kartey Hain.
▪Kuch Aisay Bhi Miley Jo Dosron Ke Mazameen (Articles) Se Un Ka Naam Uda Kar Apna Ism e Giraami (Means Apna Name) Laga Detey Hain. Yeh Badtareen Qism Ka Jurm Hai.
▪Logon Ki Aksariyyat Aisi Hai (Means Aksar Log Aisey Hain) Jo Aisay Mazameen (Articles) Aur Posts Share Karti Hai Jin Pay Kisi Ka Naam Na Ho.
✅ Mein Aakhir Mein Sawal Karney Walay Aur Share Karney Walon Se Arz Karta Hun Ke Kaam Karney Walon Ko Kaam Karney Den, Un Ki Raah Mein Rukawat Paida Na Karen Aur Agar Kisi Post Par Mazmoon Nigaar (Article Likhney Waley) Ka Naam Hai Aur Aap Is Wajah Se Usay Share Nahi Karna Chahtay To Aap Khud Hi Mehnat Karkay Mazmoon (Article) Tayyar Karen Aur Apna Naam Likh Kar Share Karen Ya Na Likhein Jisa Ki Aap Ka Sawaal Hai.
✅Aur Isi Tarah Mazmoon (Article) Likhnay Walon Se Bhi Guzarish Karta Hun Ke Kisi Ka Mazmoon (Article) Leker Do (2) Char (4) Jumlay (Sentence) Idhar Se Udhar Karkay Apna Naam Na Likhein Balkay Apni Mehnat Se Khud Ki Kawish (Means Koi Mazmoon) Tayyar Karen Phir Apna Naam Likhein, Tarjuma Hai To Tarjumah Likhein.
Aur Yeh Dhiyaan Mein Rahay Ke Kisi Post Pay Naam Likhna Hi Hai Aisi Baat Nahi Hai. Balki Baghair Naam Ke Bhi Kaam Chal Sakta Hai Aur Chal Raha Hai, Lekin Mazmoon Par Moharrir (Likhney Waley) Ka Naam Ho Yeh Haq Bhi Hai Aur Behtar Bhi.
Pl
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Jitne chhote kapre (Libas) utna hi Jyada Fashion Wale Modern. Aurat ka Mard aur Mard ka Aurat ka Nakal Karna. Haya o Iman

Kya Chhote Kapre Pahanne aur Jism dikhane se khud ko Ham jyada Khubsurat hote hai? Mardo ka Aurato jaisa aur Khawateen ka Mard jaisa Musabihat ikhtiyar karke Aazadi aur Haque ka nara lagana fir yah kahna ke Ab Ham Aazad hai, kisi ke Gulam Nahi. 


अल्लाह ताला ने औरत को पर्दा करने का हुक्म दिया है जो के औरत के लिए अल्लाह की तरफ से बहुत बड़ा इनाम है। इसी पर्दे मे औरत की इज़्ज़त है, यही औरत की हया की हीफाजत का जरिया है। जो औरत पर्दा करती है अल्लाह उसको दुनिया व आखि़रत की बेशुमार नेमतें अता करता है, जिनमे से सबसे बड़ी नेमत यह है के अल्लाह ऐसी औरत से राजी हो जाता है, एक मोमिना औरत के लिए इससे बढ़ कर और खुशी की बात क्या हो सकती है के उसका रब उससे राजी हो जाए?

Hijab beauty, Hijabi queen, Islamic Parda, Behyayi, Modern fahashi, Modern begairat, Islamic Parda, Parda aur Imaan, Imaan o hya, Hya o Sharm,
Modern Be-Gairat Aur Islamic Parda
اسلامی *لباس التقوی* کا *مقصد*؟ 
ستر* اور *مقاماتء شرم* کا *پردہ*  عورتوں کو لائق احترام اور قابل عزت بنانا ۔ اور   شیاطین_ کی _نظر بازییوں_ سے حفاظت۔۔  اور غیر اسلامی لباس_ ؟؟
  نمود و نمائش_ کی نیت کیساتھ _انداز کافرانا_ گریبان چاک_ قمیضیں ۔۔تنگ اور چھوٹی گھٹنوں سے بھی اوپر
 ۔۔دامن تار تاراوڑھنی کا _غائب ہوجانا_۔۔ _شلوار کے بناء_ اعضاء جسمانی کی نمائش کیساتھ ۔۔ بےعزت _ماڈلوں_ _اداکاروں_ کی _نقل_ کو_فیشن_رواج کے نام سے خوب اپنایا جارہا ہے، 
جیسے رب العزت نے کوئی ھدایت نازل نہیں کی اورکھلی آزادی دے دی ہے ۔۔؟؟
افسوس افسوس افسوس مسلمان عورتوں کی حالت پر کہ  سب کچھ ختم کردیا ۔۔ !۔خواہشات کی پیروی میں ۔۔ توحید خالص* چھوڑ کر _شرک_ کا راستہ چن لیا ہے اپنی _مرضی_اور پسند سے ۔۔! مگر جو *عقل والے* ہیں وہی راست باز ہیں اور *کامیاب* ہونگے ۔۔  ان شاءاللہ
بے شک بھائی
اسلام کی نظر میں عورت قابل احترام ہے، وہ عورت جو دورِ جاہلیت میں بے وقعت تھی، نہ شوہر کی نگاہ میں اس کی کوئی حیثیت تھی، نہ سماج و معاشرہ میں اس کی کوئی عزت و وقار تھا، وہ سجا سنوار کر بازاروں میں دکھائی جاتی تھی اور فروخت کی جاتی تھی،نہ اس کی عزت کا کوئی محافظ تھا نہ اس کی عصمت کا کوئی پاسدار۔ 
اسلام آیا اس کے لئے ضابطہ ¿ حیات لایا حقوق دیئے اور معاشرے میں عزت کا مقام دیا اور گھر کی زینت قرار دیا۔ دورِ جاہلیت کی تمام ظالمانہ رسموں کا خاتمہ کیا اور شرعی اصول ضوابط کی روشنی دے کر زندگی گزارنے کا سلیقہ دیا، انھیں اصولوں میں سے ایک اصول اسلامی پردہ ہے جو عورت کی عزت و آبرو کا محافظ کو نگہبان ہے۔اگر عورتیں ان قانون پر عمل کرلیں تو ذلت و پستی اور رسوائی سے نکل کر عزت و احترام کی مالکہ بن جائیں۔ اللّٰه سب مائوں بہنوں اور بیٹیوں پر رحم فرمائے اور اپنے دین اسلام پرمکمل عمل کی تو فیق عطا فرمائے آمین-   جزاک اللّٰه خیرًا
بیوٹی پارلر کا  حرام کاروبار  اور اسکے اشتہار بند  ہونے چاہیے، جو شریف  کو بےحیائی پر اکساتے اور امتحان میں ڈالتے ہیں..
افسوس گناہوں کے مواقع کھلے چھوڑ کر  تبلیغ میں چلے جانا کونسی عقلمندی ہے..؟ 
سوچیں کہاں غلطی ہوئی ہے اب کیا کرنا ہے..؟
تجارت بےحیائی کے تمام سامان فراہم کر رہی ہے..! 
جو سب اہل اسلام سے تعلق رکھنے والے افراد پر مشتمل لوگوں کا کاروبار ہے..! 
جو جہیز کے لیئے تمام سامان فراہم کر کے  اسے لعنت اور مصیبت  قرار دیتے ہوئے نظر آتے ہیں.  مگر
اپنی تجارت کے انداز نہیں بدلتے نہ ہی شرماتے ہیں..  باجا ھالوں(شادی) کی تمام  تماش بینی کے ذمے دار ہیں.. 
استغفراللہ استغفراللہ , استغفراللہ.
کب توبہ کریں اور تبدیلی لائیں  لیکن, میں اور آپ  بدل جائیں.. اہمیت مومن کے لیئے  انعام ﷲ کی رحمتوں کا.. منتظر ہمارے پلٹنے کا..
وما توفیقی الہ باللہ والسلام 
بےحیائی عام ہو چکی ہے
اللہ تعالی کے حکموں کا انکار ہو رہا ہے غیر محرم کے لئے بناو سنگھار تصویریں دیکھانا ہاتھ دیکھانا چہرہ دیکھانا پاؤں دیکھانا (ڈی پی)یہ سب بے حیائی کے کام ہے ان لڑکیوں سے گزارش ہے جو بے حیائی پیھلا رہی ہیں اپنا نہیں تو اپنے ماں باپ کی عزت کا خیال کر لیں اللہ کی بارگاہ میں ہر ہر عمل لکھا جا رہا ہے.
اللہ تعالی کا فرمان ہے !!!
33 : سورة الأحزاب 59
اے نبی! اپنی بیویوں سے اور اپنی صاحبزادیوں سے اور مسلمانوں کی عورتوں سے کہہ دو کہ وہ اپنے اوپر اپنی چادریں لٹکا لیا کریں ۔ اس سے بہت جلد ان کی شناخت ہو جایا کرے گی پھر نہ ستائی جائیں گی اور اللہ تعالٰی بخشنے والا مہربان ہے ۔   24 : سورة النور 31

مسلمان عورتوں سے کہو کہ وہ بھی اپنی نگاہیں نیچی رکھیں اور اپنی عصمت میں فرق نہ آنے دیں اور اپنی زینت کو ظاہر نہ کریں سوائے اس کے جو ظاہر ہے اور اپنے گریبانوں پر اپنی اوڑھنیاں ڈالے رہیں اور اپنی آرائش کو کسی کے سامنے ظاہر نہ کریں سوائے 
اپنے خاوندوں کے یا اپنے والد یا اپنے خسر کے یا اپنے لڑکوں کے یا اپنے خاوند کے لڑکوں کے یا اپنے بھائیوں کے یا اپنے بھتیجوں کے یا اپنے بھانجوں کے یا اپنے میل جول کی عورتوں کے یا غلاموں کے یا ایسے نوکر چاکر مردوں کے جو شہوت والے نہ ہوں یا ایسے بچوں کے جو عورتوں کے پردے کی باتوں سے مطلع نہیں اور اس طرح زور زور سے پاؤں مار کر نہ چلیں کہ ان کی پوشیدہ زینت معلوم ہو جائے ، اے مسلمانوں! تم سب کے سب اللہ کی جناب میں توبہ کرو تاکہ تم نجات پاؤ ۔

जितना छोटे कपड़े हो इतना ही ज्यादा मॉडर्न और फैशन।

कल तक छोटे कपड़े रैंप पर कैटवाक करती मॉडल्स अपने डिजाइनर्स के कलेक्शन को पेश करने के लिए पहनती थीं, लेकिन आजकल ऐसे कपड़े आम शहरी लड़कियाँ भी पहन रही हैं।

' जो दिखता है, वही बिकता है' 
इसी की तर्ज पर अब लड़कियाँ भी 'बिंदास बाला' की छवि में खुद को ढालती जा रही हैं और बेझिझक अपने मांसल सौंदर्य का प्रदर्शन कर लोगों की वाहवाही बटोर रही हैं।
छोटे कपड़े पहनकर अपने बदन की सुंदरता का प्रदर्शन करना युवा लड़कियों के लिए अब एक फैशन बन गया है। जिसका जिस्म जितना अधिक आएगा उसे लोग उतना ही खूबसूरत व सेक्सी कहेंगे। अब लड़कियों के लिए 'सेक्सी' संबोधन एक अपशब्द नहीं बल्कि खूबसूरती का पैमाना बन गया है।

 ग्लैमर का प्रभाव.
फैशन शो, फिल्मी अभिनेत्रियों के कपड़े आदि सभी युवा लड़कियों को ग्लैमर के रंग में ढाल रहे हैं। कल तक मल्लिका शेरावत व राखी सावंत के छोटे कपड़े दर्शकों को आँखे मूँदने पर मजबूर करते थे लेकिनु आज सबसे ज्यादा माँग इन्हीं बिंदास अदाकाराओं की है।

मुंबई की मायानगरी से निकलकर ग्लैमरस कपड़ों का फैशन बड़े-बड़े महानगरों तक पहुँचता जा रहा है, जहाँ शोरूम में सजने के बाद सर्वाधिक बिक्री उन्हीं कपड़ों की होती है जिनकी लंबाई कम व लुक ट्रेंडी होता है।

यही नहीं महानगरों के नामी स्कूलों, कॉलेजों, एयर होस्टेस एकेडमी आदि का ड्रेस कोड ही मिनी स्कर्ट-टॉप व फ्रॉक बन गए हैं।
कल तक घर-गृहस्थी संभालने वाली लड़कियाँ भी अब फैशन शो व सौंदर्य प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं और नए फैशनेबल वस्त्रों के अनुरूप अपने बदन को ढाल रही हैं।
 मैं बड़ी हो गई हूँ :-
अब जब माँ अपनी बेटी को सलवार-कमीज पहनने का कहती है तो बेटी शान से कहती है कि 'माँ, अब तुम भी बदल जाओ। आज तो स्कर्ट व कैप्री का दौर है। सलवार-कमीज तो गाँव की लड़कियाँ पहनती हैं।'
बुद्धि से बच्चे भले ही बड़े न हों, पर पहनावे से आजकल की लड़कियां अपनी उम्र से बहुत अधिक बड़ी हो गई हैं। यह सब बदलते दौर की '**फैशन' **का असर है जिसने भारतीय संस्कृति की छाप को मिटाकर सिर से आँचल व पैरों से पायल को लुप्त कर दिया है।
 यही तो फैशन है :-
आजकल का फैशन ही शार्ट स्कर्ट, शार्ट फ्रॉक्स आदि हैं। जो फैशन बाजार में दिखता है, वही बिकता है। इसी तर्ज पर आज छोटे कपड़े युवतियों की पहली पसंद बन गए हैं।
भला जिस आने वाली नसल की रहनुमाई  रिया सेन, किम शर्मा व राखी सावंत जैसी अभिनेत्रियाँ करें उस दौर की लड़कियां पूरे जिस्म को ढँकने वाले लंबे कपड़े कैसे पहन सकती हैं?
कुछ नादान हव्वा की बेटीया आग मे जल गई जिम्मेदार कौन ?
चश्मदीद वाक्या जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएगे, कलेजा फट जाएगा, आंखो से चिंगारीया उडने लगेगी, 10 नवम्बर सुबह का वक्त जब एक शख्स मेरे पास आया और उसकी जुबान से सलाम के अलफाज अदा हुए,
     उसके बाद उसकी आंखे अश्कबार हो गई, वो लडखडाती जुबान से हजार कोशिश के बावजूद अपनी बात कहने से कासिर हो रहा था, मेने तसल्ली दी और पुछा के क्या मुसीबत आ गई है?
 
तो उसने कहा के मेरी बच्ची स्कूल गई थी वही से गायब हो गई है वो कल से गायब है, इस वक्त तकरीबन चौबीस घंटे हो गए है अभी तक वापिस नही आई।

उस लडकी की उम्र तकरीबन 14 से 15 साल के बीच मे है, लडकी खुबसूरत है, मोहल्ले वालो के कहने के मुताबिक उस लडकी के साथ फरेब किया गया, ये लडकी शरीफ थी, कभी इसके अंदर हम लोगो ने बदतमीजी, गलत हरकत वाली, बुरे चाल चलन की कोई बात नही देखी, बडे अफसोस की बात है, ये लडकी हिन्दू लडके के साथ फरार हो गई, इस लडकी को अपने मुस्तकबिल के बारे मे कुछ भी इल्म नही है, के मेरे साथ किस तरह का सुलूक किया जाएगा, पुलिस चौकी मे केस दर्ज हो गया है, पुलिस तलाश मे मसरूफ है लेकिन लापरवाही के साथ।
इसलिए आज 14 तारीख हो गई, लेकिन अभी तक लडकी का कोई सुराग नही मिला है। अभी इस बुरी खबर से दिल उदास था ही केस एक साहब ने कहा के एक हफ्ता पहले एक नेक शख्स की 17 साल की लडकी जो स्कूल जाती थी वो भी हिन्दू लडके के साथ फरार हो गई है, उसका केस भी दर्ज हुआ है लेकिन अभी तक कोई सुराग नही मिला है।
पुलिस चौकी से वापसी पर एक मौलाना साहब से मुलाकात हो गई, सलाम दुआ के बाद मेने तजकीरा किया के मोहतरम ये हादसा एक हफ्ते मे दो बार हो गया है इसके रोकथाम के लिए क्या तरीका इख्तियार करना चाहिए?
मौलाना ने कहा के मेरे इल्म मे दो माह के अंदर आठ से दस मुस्लिम लडकिया हिन्दू लडको के साथ फरार हो गई है। ये सब प्लानिंग के जरिए गायब की जा रही है, मेने कहा मौलाना क्या ये सच है या आप कोई कहानी सुना रहे है? उन्होने कहा ये हकीकत है कोई किस्सा कहानी नही है।
मेने कहा के मौलाना हमने सोशल मिडिया पर इस तरह की तहरीर पढी है के एक खबीस गिरोह से ताल्लुक रखने वाले मुस्लिम लडकियो को अपने प्यार मे फंसाकर उनकी इज्जतो को तार तार करके किसी लडकी को बेच देते है, जहा ये बजारो मे दूसरो के बिस्तरो की जीनत बनती है।
इनकी जिंदगी का हर लम्हा गमो, सिसकियो, आंसू के सैलाब मे गुजरता है, हर सुबह उनकी बद से बदतरीन होती जाती है, उनके आंसू पर कोई तरस खाने वाला नही होता है, कोठे मे इंसान की शक्ल मे शैतान जाते है उन्हे अपनी हवस पुरी करना होता है, ये ख्वाहिशात मे अंधे होते है उन्हे किसी की चीख पुकार सुनाई नही देती है। ये खबीस गिरोह वाले किसी लडकी के साथ कुछ दिनो तक उसकी इज्जत से खेलते है, उसके बाद जब वो प्रेग्नेंट हो जाती है तो उसे उसके हाल पर छोड देते है, ये अब ना अपने घर आ सकती है और ना ही कही इज्जत की जिंदगी गुजार सकती है, आखिर मे ये भी कोठो के हवाले हो जाती है।
सब व रोज के अंथक कोशिशो के बावजूद सेकडो मे दो चार लडकिया मिल जाती है लेकिन इतनी देर हो जाती है उनकी इज्जत हमेशा के लिए दागदार हो जाती है, और उनकी कहानी बडी खौफनाक होती है। अक्सर लडकिया जो इन दरिन्दो का शिकार बनती है, वो भोली भाली, सादा दिल, दरिन्दो की दुनिया के फरेब से अंजान होती है।
जरूरत इस बात की है कि हर मुसलमान जो अपनी लाडली को बेहतर तालीम दिलाने के ख्वाहिशमंद है, उसे चाहिए के अपनी बेटी को स्कूल के आने जाने के वक्त पर ध्यान दे, बगैर वालिदेन की हमराही के अपनी बेटी को स्कूलो मे भेजना उनपर जुल्म है, बगैर सरपरस्त के बालिग लडकियो को स्कूल कालेज भेजना गोया के उन्हे अपने हाथो से आग मे डालना है।
अक्सर स्कूल कालेज की लडकिया आसानी से उन शैतानी दरिन्दो के शिकंजे मे खिंचती चली जाती है, इसके अलावा दुसरी लडकिया भी इनके हवस का शिकार होती है लेकिन स्कूल कालेज के बानिस्बत उनकी तादाद आटे मे नमक के बराबर है।
इस तहरीर को भेजना का मकसद ये है कि शहरो मे रहने वाले मुसलमानो के साथ ये मसला बहुत अहम है, इसलिये के शहरी लोग अपनी बेटियो को मौजूदा दौर मे कम से कम दसवी क्लास तक स्कूली तालीम हासिल कराते है, और जिन लडकियो का मेने तहरीर मे जिक्र किया है वो भी नवी क्लास की स्टूडेंट थी जो हिन्दू लडको के साथ चली गई है।
आप लोग कभी इस खुशफहमी मे ना रहे के दीन से दुर रहने वाली लडकिया रही होगी, बिल्कुल नही, नमाज को अदा करने वाली, और कुरान पाक पढती हुई थी, उन्हे इस बात का पुरी तरह इल्म था, मे मुसलमान हु, और मुसलमान घराने से मेरा ताल्लुक है, हां
उन्हे इस बात का इल्म ना हुआ के मेरे साथ बहुत बडा धोका किया जा रहा है, के लडका जो मुझसे मुहब्बत का इजहार करता है, ये किसी से पैसा लेकर ये काम कर सकता है, और एक आलिम स ग्रुप है और वो मुस्लिम लडकियो को फंसाते है कुछ दिनो के लिए गायब हो जाते है।
मौलाना के मुताबिक जो लडकिया वापस आई है उनके साथ फरेब करने वालो के उपर कोई केस दर्ज नही हुआ है,
इन बातो को मद्देनजर रखते हुए मुसलमानो की ये जिम्मेदारी है कि वो अपनी बेटियो की हिफाजत खुद करे, और जहा तक हो सके अपनी इसलामी भाईयो के बहन बेटियो की इज्जत आबरू की हिफाजत के खातिर अपना जान माल वक्त खर्च करे।
ये वाक्या मुम्बई मे पेश आया है, नाम, पता इसलिये छिपाया गया है कि किसी की दिल अजारी ना हो, और दुसरे हजरात इस खबर को पढकर अपनी बच्चीयो की निगरानी करे और अपने अजीज करीब रिश्तेदारो के बच्चीयो की इज्जत को दाग लग जाए इससे पहले उन्हे भी आगाह करे.

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